भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का उत्सव मनाया
लखनऊ। त्रिसामा आर्ट्स और पंडित अनोखेलाल मिश्रा कल्चरल सेंटर के संयुक्त तत्वाधान से लखनऊ में अपने आप में अनूठी विभावरी बैठक का आयोजन किया गया । इस अनूठे संगीत समारोह में देश के विभिन्न स्थानों से आए कलाकारों सम्पूर्ण रात्रि शास्त्रीय , रात्रि कालीन रागों की सांगीतिक प्रस्तुतियां दी । दिल्ली, लखनऊ, पुणे तथा अन्य शहरों से आए कलाकारों की लगभग 13 प्रस्तुतियों से सुसज्जित यह आयोजन देर रात से लेकर प्रात:काल तक चलता रहा, जिसने गहन संगीत साधना और उत्सव का अद्भुत वातावरण निर्मित किया। कार्यक्रम का आरंभ युवा गायक अक्षय अवस्थी द्वारा राग जोग की सधी हुई और भावपूर्ण प्रस्तुति से हुआ, जिसने पूरी रात के संगीत का वातावरण निर्मित कर दिया। इसके पश्चात अमित विश्वकर्मा ने ऊजार्वान तबला एकल प्रस्तुत किया तथा मैहर घराने के वरिष्ठ सरोद वादक पंडित . अभिजीत रॉयचौधुरी ने राग चारुकेशी की मनमोहक सरोद प्रस्तुति दी । ख्यातिलब्ध शास्त्रीय गायक वरुण मिश्रा ने राग मधुकौंस प्रस्तुत करते हुए महान गायक पंडित वसंत राव देशपांडे कि प्रसिद्ध बंदिश जा रे आ जा पथिकवा को अत्यंत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। वहीं दिल्ली से आए अमृतेश शांडिल्य ने तबला एकल वादन के अंतर्गत तीनताल में पेशकार, कायदा, गत, टुकड़े और परन प्रस्तुत किया। दिल्ली से आए मैहर घराने के सरोद वादक स्मित तिवारी ने राग कौशी कान्हड़ा में आलाप, जोड़, झाला और तीनताल की पारंपरिक गत बजाकर सबको मंत्र मुग्ध किया । गायन के क्रम में बनारस घराने के पीयूष मिश्रा ने राग पटदीप। ग्वालियर घराने के शास्त्रीय गायक कुलदीप कृष्ण ने राग दरबारी में दुल्हन तेरी आछी प्रस्तुत किया, जबकि कुणाल वर्मा ने प्रात: ब्रह्म मुहूर्त की प्रस्तुति में राग विभास की बंदिश नर हर नारायण से सबको प्रभावित किया। तदन्तर अक्षत अवस्थी ने राग भटियार और राजीव मलिक ने राग बिलासखानी तोड़ी में रस भरी बाँसुरी बजाई प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समापन डॉ. गरुणमिश्र द्वारा राग भैरवी की शांत और भक्तिमय प्रस्तुति के साथ हुआ। इस आयोजन में लखनऊ के बड़ी संख्या में संगीतकारों, विद्यार्थियों और संगीत प्रेमियों की उपस्थिति रही। उपस्थित श्रोताओं ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे और रात्रिकालीन शास्त्रीय संगीत आयोजनों की इच्छा व्यक्त की। आयोजक अभिषेक शर्मा एवं अरुणेश पांडेय ने सभी कलाकारों और श्रोताओं के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया, जिन्होंने पूरी रात जागकर भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा का उत्सव मनाया।





