कथक की समृद्ध परंपरा पर पाँच दिवसीय मास्टर क्लास चतुर्थ दिवस
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा पंडित बिरजू महाराज की पावन स्मृति में स्थापित पीठ के अंतर्गत कथक नृत्य की पाँच दिवसीय मास्टर क्लास विश्वविद्यालय के कला मंडपम सभागार में गरिमामय एवं प्रेरणादायक वातावरण में आयोजित की जा रही है। मास्टर क्लास के चतुर्थ दिवस का शुभारम्भ विश्वविद्यालय के वरिष्ठ गुरु पंडित राम मोहन महाराज, विशेषज्ञ पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य तथा सहायक आचार्य (कथक) डॉ. मंजुला पंत की उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य ने कथक नृत्य के तकनीकी पक्षों पर विस्तारपूर्वक मार्गदर्शन प्रदान करते हुए ‘ऋतु वर्षा’ के भावों की प्रस्तुति का कुशल प्रशिक्षण दिया। साथ ही शुद्ध नृत्य के अंतर्गत तिहाई, टुकड़े, उठान एवं चक्करों का पुन: अभ्यास कराते हुए उन्होंने नृत्य की सूक्ष्म बारीकियों को व्यावहारिक रूप से स्पष्ट किया। शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान उन्होंने कथक की तकनीकी, सौंदर्यात्मक एवं शोधपरक समझ को समृद्ध करने पर विशेष बल दिया। विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित इस पीठ के अंतर्गत वर्ष भर व्याख्यान, संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएँ, संगीत-नृत्य प्रस्तुतियाँ एवं शोधपरक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे, जिससे संगीत शिक्षा, अनुसंधान तथा सामाजिक सहभागिता को नई दिशा प्राप्त होगी। इस अवसर पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि कथक केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, सौंदर्यबोध और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी समृद्ध परंपरा से जुड़ते हुए उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं। कुलसचिव डॉ. सृष्टि धवन ने बताया कि विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोधोन्मुख दृष्टि तथा सांस्कृतिक संवेदनशीलता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। मास्टर क्लास के आगामी सत्रों में कथक की उन्नत तकनीकों, भावाभिव्यक्ति तथा मंचीय प्रस्तुति से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत उपयोगी एवं प्रेरणादायी बताते हुए विश्वविद्यालय के प्रति आभार व्यक्त किया।





