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ठुमरी एवं खयाल गायकी की बारीकियों से रूबरू हुए छात्र

भातखण्डे में शुभ्रा गुहा के निर्देशन में ठुमरी व खयाल कार्यशाला का द्वितीय दिवस
लखनऊ। पद्मभूषण बेगम अख्तर की पावन स्मृति में स्थापित पीठ के अंतर्गत ठुमरी एवं खयाल गायकी पर आयोजित चार दिवसीय कार्यशाला का द्वितीय दिवस विश्वविद्यालय के सुजान सभागार में अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायक वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह कार्यशाला 16 से 19 फरवरी 2026 तक गायन विभाग द्वारा आयोजित की जा रही है, जिसमें सुप्रसिद्ध हिंदुस्तानी शास्त्रीय गायिका विदुषी शुभ्रा गुहा विशेषज्ञ के रूप में विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं।
कार्यशाला के द्वितीय दिवस के शुभारम्भ अवसर पर विशेषज्ञ विदुषी शुभ्रा गुहा के साथ कार्यक्रम संयोजिका एवं गायन विभागाध्यक्ष प्रो. सृष्टि माथुर, सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, संगतकर्ता, शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
इस अवसर पर विदुषी शुभ्रा गुहा ने ठुमरी एवं खयाल गायकी की बारीकियों, स्वर-साधना, भाव-अभिव्यक्ति, राग की संवेदनशीलता तथा शैलीगत विशेषताओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। संवादात्मक शैली में उन्होंने विद्यार्थियों व शोधार्थियों को गायन की तकनीकी तथा शोधपरक समझ को सुदृढ़ करने हेतु प्रेरित किया। प्रशिक्षण सत्र में गायन में सबीना, तानपुरे पर प्रशांत पाण्डेय तथा तबले पर सौरभ सिंह ने प्रभावी संगत प्रदान की।
कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों को भारतीय शास्त्रीय गायन परंपरा की समृद्धि, तकनीकी विशेषताओं तथा महान कला विभूतियों के सांस्कृतिक योगदान से परिचित कराना है। साथ ही इस अमूल्य सांगीतिक धरोहर को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों में संगीत के प्रति गहन समझ, अनुशासन एवं रचनात्मक दृष्टि विकसित करते हैं तथा परंपरा और आधुनिक शोध के बीच सार्थक सेतु स्थापित करते हैं। विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. सृष्टि धवन ने बताया कि बेगम अख्तर स्मृति पीठ के अंतर्गत वर्षभर व्याख्यान, संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएँ, संगीत-नृत्य प्रस्तुतियाँ एवं शोधपरक कार्यक्रम आयोजित किए जाने की योजना है, जिससे संगीत शिक्षा, अनुसंधान तथा सामाजिक सहभागिता को नई दिशा प्राप्त होगी।

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