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तुगलक में दिखी 14वीं शताब्दी के शासक की कहानी

मंचन गोयल इंस्टीट्यूट आॅफ हायर स्टडीज महाविद्याल के सभागार में किया गया
लखनऊ। उत्तर प्रदेश उर्दू अकादमी के सहयोग सें उमंग फाउंडेशन की नवीनतम प्रस्तुति के अन्तर्गत प्रसिद्ध नाटककार गिरीश कर्नाड द्वारा रचित ऐतिहासिक नाटक तुगलक का प्रभावपूर्ण मंचन गोयल इंस्टीट्यूट आॅफ हायर स्टडीज महाविद्याल के सभागार में किया गया। राहुल शर्मा की परिकल्पना एंव निर्देशन में नाटक के कलाकारो द्वारा मंच सें जीवंत एंव प्रभावशाली प्रस्तुति ने सत्ता, राजनीती और मानव स्वभाव की दशा को इतिहास के पन्नो सें उजागर कर दर्शकों को अतीत की गहराईयों में ले जाकर आदर्शवादी व्यक्ति की सबसे विशेष खूबी संतुलन बनाये रखने की शिक्षा को देने का असरदार प्रयास किया है। यह प्रस्तुति केवल ऐतिहासिक नाट्य प्रस्तुति नहीं बल्की समाज के लिए एक आईना है जो जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा का सशक्त मंच बनकर उभरी जिसने दर्शकों में गहरी विचारधारा को जन्म दिया। नाटक में दशार्या गया कि उच्च आदर्श और वास्तविकता के बीच संतुलन न बना पाने के कारण एक शासक का भी पतन हो जाता है।
नाटक तुगलक की कहानी दिल्ली सल्तनत के शासक मूहम्मद बिन तुगलक के जीवन और शासन पर आधारित है। नाटक में तुगलक को एक बुद्धिमान, आदर्शवादी लेकिन विरोधाभासी शासक के रूप में दिखाया गया है। वह अपने शासन में न्याय, धर्मनिरपेक्षता और समानता स्थापित करना चाहता है, लेकिन उसके फैसले-जैसे राजधानी को दिल्ली से दौलताबाद स्थानांतरित करना और तांबे के सिक्कों को चलन में लाना-व्यवहार में असफल साबित होते हैं। जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, तुगलक का आदर्शवाद टूटता जाता है और वह क्रूर, संदेहपूर्ण तथा तानाशाही शासक बन जाता है। उसके निर्णयों के कारण जनता में असंतोष बढ़ता है और राज्य में अराजकता फैल जाती है। अंतत: नाटक यह दशार्ता है कि उच्च आदर्शों और वास्तविकता के बीच संतुलन न बना पाने के कारण तुगलक का पतन होता है। यह नाटक सत्ता, राजनीति और मानव स्वभाव की जटिलताओं को गहराई से प्रस्तुत करता है। नाटक में तमाल बोस, अनामिका सिंह, गुरुदत्त पांडे, शशांक पांडेय, रोहित श्रीवास्तव, कुलदीप श्रीवास्तव, ललित कुमार, आनंद यादव, विनय गुज्जर, सनुज प्रजापति, रवि सिन्हा, ओम प्रकाश केवलानी ने अभिनय किया वही म्यूजिक आकाश दयाल एवं प्रकाश रोजी मिश्रा द्वारा कर गया ।

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