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आयी रे बसंत बहार कुहुक बोले कोयलिया…

लोक चौपाल में बसन्त का स्वागत, गोमती तट पर उड़ी रंग-बिरंगी पतंगें

लखनऊ। बसन्त के स्वागतार्थ लोक संस्कृति शोध संस्थान की 82वीं लोक चौपाल शनिवार को अहिमर्दन पातालपुरी मन्दिर परिसर में आयोजित की गई। इस अवसर पर हुई पतंगबाजी प्रतियोगिता में गोमती तट पर उड़ती रंग-बिरंगी पतंगों ने बसंतोत्सव का मनोहारी दृश्य प्रस्तुत किया। शुभारंभ चौपाल प्रभारी अर्चना गुप्ता ने श्रीरामस्तवन से किया। संस्थान के अध्यक्ष जीतेश श्रीवास्तव ने स्वागत और सचिव डा. सुधा द्विवेदी ने विषय प्रवर्तन किया। वक्ताओं ने लोक परंपराओं, सामूहिक जीवन और ऋतु-उत्सवों की महत्ता पर विचार व्यक्त किए।
सांस्कृतिक सत्र में गायिकाओं ने बसंत से जुड़े गीत एवं भजन प्रस्तुत कर वातावरण को मधुर और उल्लासपूर्ण बना दिया। वरिष्ठ लोकगायिका शारदा पाण्डेय ने आयी रे बसंत बहार कुहुक बोले कोयलिया, मधु श्रीवास्तव ने मेरे कण्ठ बसो महारानी, अरुणा उपाध्याय ने गंगा गीत तोरी लहर धुधनार, सरिता अग्रवाल ने मैं तो नवल बसंत मनाय रही, चित्रा श्रीवास्तव ने सखि बसंत आया, नीलिमा सिंह ने जहां रामायण हो हैं राम वहां, रेनू दुबे ने नदिया बहे जोर हमहूं का पार कियो राम जी, प्रीति श्रीवास्तव ने ओ कान्हा अब तो मुरली, रत्ना शुक्ला ने कलजुग में सिद्ध हो, गीता शुक्ला ने मुझे दर्शन दिखा दो श्याम, शिखा श्रीवास्तव ने बावरी बसंत ऋतु आई, अनुज श्रीवास्तव ने मंदिर में सोये हनुमान जी कोई जाके जगा दो, अलका चतुवेर्दी ने आज बसंत की रात गमन की बात न करना, प्रो. उषा बाजपेयी ने आया बसंत खुशियां लाया, युवा गायक अनुप शर्मा ने बड़ा नीक लागे राघव जी के गउंवां, देवेश्वरी पंवार ने पहाड़ी गीत ऐगे ऋतु बसंत की, मीना मिश्रा ने कृष्ण भजन, स्वरा त्रिपाठी ने बोल मेरी रसना राम राम बोल सुनाया। अन्त में तहरी भोज का आयोजन हुआ, जिसमें सहभागिता और सामूहिकता की लोक परंपरा को सजीव रूप मिला। पतंगबाजी प्रतियोगिता में महिलाओं और बच्चों ने पतुग उड़ाने की बारिकियां सीखीं। पतंग की डोर किसी के गले की फांस न बने इसके लिए आगाह किया गया। सोशल लाइफलाइन फाउण्डेशन के सहयोग से अध्यक्ष डा. अनिल गुप्ता के संयोजन में पुराने लखनऊ के पतंगबाज सर्वश्री अनूप कुमार शुक्ला, शिवांश, अक्षत, रीशू, मानस व अरुण ने कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में सर्वश्री राजनारायण वर्मा, लिटिल चैम्प्स की प्रधानाचार्य ऋचा माथुर, अवनीश शुक्ला, अखिलेश त्रिवेदी शाश्वत, नीलम वर्मा, होमेन्द्र मिश्रा, वरिष्ठ पत्रकार शम्भूशरण वर्मा, युवा कवि कृष्णा सिंह, शशांक शर्मा, अर्पित श्रीवास्तव, माधुरी, अनिल श्रीवास्तव, हेमलता त्रिपाठी, आध्वन मणि त्रिपाठी सहित अन्य मौजूद रहे।

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