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सीएए के विरोध में हुए हिंसक टकराव को लेकर विधानसभा में हंगामा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तरप्रदेश विधानमंडल के दोनों सदनों में गत दिसंबर में प्रदेश में संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हिंसा में हुई मौतों की किसी सेवारत न्यायाधीश से जांच कराने की मांग की।

विधानसभा में शून्य काल के दौरान सदन में सपा और विपक्ष के नेता रामगोविंद चौधरी ने कहा कि देश की आजादी के लिए हिंदू और मुसलमान दोनों मिलकर लड़े हैं। जिन लोगों ने आजादी की लड़ाई लड़ी उन्हें देशद्रोही करार दिया जा रहा है। वहीं, जिन लोगों ने अंग्रेजों का साथ दिया वे राष्ट्रवादी होने का दावा कर रहे हैं।

संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान केवल मुस्लिम समाज के लोग ही मारे गए। उन्होंने कहा कि लोग शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन पुलिस और भाजपा के लोगों ने गोलियां चलाईं जिससे लोगों की मौत हुई। इन हत्याओं की जांच उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय के किसी सेवारत न्यायाधीश से कराई जानी चाहिए।

विधान परिषद में सपा ने गत दिसंबर में नए नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में पुलिस उत्पीडऩ का मुद्दा कार्य स्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाया। इसी विषय से संबन्धित बसपा के दिनेश चंद्रा, सुरेश कुमार कश्यप एवं अन्य सदस्यों की सूचना और कांग्रेस के दीपक सिंह की नियम-111 की सूचना को इस सूचना के साथ सम्बद्घ किया गया।

नेता विपक्ष अहमद हसन ने कहा कि प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा में पुलिस की गोली से कितने लोग मरे यह पता नहीं है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी नहीं दी जा रही है। इसका एक ही समाधान है कि सरकार किसी सेवारत न्यायाधीश से मामले की जांच कराए।

विधानसभा में बसपा विधायक दल के नेता लालजी वर्मा ने कहा कि भाजपा लोकतंत्र की हत्या कर रही है और पुलिस ने नए नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों पर बर्बरता पूर्ण तरीके से लाठीचार्ज किया। इस मामले की जांच उच्च न्यायालय के किसी न्यायाधीश द्वारा कराई जानी चाहिए और ज्यादती का शिकार हुए सभी लोगों के परिजन को 50-50 लाख रुपए मुआवजा दिया जाना चाहिए।

कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ने कहा कि पुलिस ने शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रही महिलाओं पर भी अत्याचार किया है। उन्होंने कहा कि लखनऊ में पुलिस ने कड़ाके की सर्दी की रातों में भी प्रदर्शन कर रही महिलाओं से कंबल और खाने-पीने का सामान छीन लिया।

पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए रात में ढाई बजे धरनास्थल में पानी भर दिया। सपा सदस्य नफीस खान ने कहा कि आजमगढ़ के बिलरियागंज में पुलिस ने महिला प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस का इस्तेमाल किया और रबर की गोलियां चलाई। उसके बाद लाठीचार्ज भी किया।

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है। अगर कोई व्यक्ति कानून हाथ में लेने की कोशिश करेगा तो उसके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी चाहे वह कितना ही ताकतवर क्यों ना हो।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 67 को छोड़कर बाकी सब जगह प्रदर्शन हुए। विपक्ष आम लोगों को भड़का कर प्रदर्शन करा रहा है। नया नागरिकता कानून किसी के खिलाफ नहीं है। विपक्ष के पास प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई भी मुद्दा नहीं रह गया है।

संशोधित नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्वाई का बचाव करते हुए खन्ना ने कहा कि प्रदेश के आठ जिलों में आगजनी की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान 61 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं। ऐसी स्थिति में पुलिस हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती। अगर पुलिस ने कार्यवाही नहीं की होती तो स्थिति और भी खराब हो जाती। पूरे प्रदेश में करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचा है। प्र

देश में नए नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान केवल 21 लोगों की मौत आपसी टकराव के कारण हुई है, ना कि पुलिस की गोली लगने से। इसके पूर्व, विधानसभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने इस मुद्दे पर सदन का बाकी काम रोक कर चर्चा कराए जाने की नोटिस की अनुमति नहीं दी।

इसे लेकर विपक्षी सदस्य सदन के बीचोंबीच आकर हंगामा करने लगे जिसके बाद सदन की कार्यवाही आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। इससे पहले, सपा और कांग्रेस सदस्यों द्वारा प्रदेश सरकार पर कानून व्यवस्था के मोर्चे पर पूरी तरह से विफल रहने का आरोप लगाते हुए हंगामा किए जाने के कारण सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।

इस पर संसदीय कार्य मंत्री खन्ना ने कहा कि सपा हमेशा अपराधियों का साथ देती है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था व्यवस्था पूरी तरह से नियंत्रण में है और वह सपा के कार्यकाल के मुकाबले हजार गुना अच्छी है।

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