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चैत्र नवरात्र : मंत्रोच्चार के साथ हुई स्कंदमाता की पूजा-अर्चना

लखनऊ। चैत्र नवरात्र के पांचवे दिन सोमवार को स्कंदमाता स्वरूप की पूजा हुई। स्कंदमाता ममता और वात्सल्य की प्रतीक हैं। माता की गोद में भगवान स्कंद बाल रूप में विराजित हैं। माता की चार भुजाएं हैं। मां को लाल रंग प्रिय है। माता कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। वाहन सिंह है। माता की पूजा करने से सभी तरह की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। संतान सुख और बेहतर स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।
माता के मंदिरों में सुबह से ही भक्त दर्शन के लिए पहुंचने लगे। भक्तों ने माता रानी के जयकारे लगाए। माता को पुष्प, फल और मिष्ठान अर्पित किए। वहीं घरों में भी पूरे विधि विधान के साथ पूजन कर ज्योत जलाई। भक्तों ने मां दुर्गा सप्तशती का पाठ कर आरती उतारी। सभी ने सुख, शांति, कल्याण के साथ कोरोना से मुक्ति के लिए प्रार्थना की। चौक स्थित बड़ी काली मंदिर में माता को हरे रंग के वस्त्र पहनाए गए और गुलाब के फूलों से शृंगार किया गया। माता को सिंघाड़े का हलवा और खीर का भोग लगाया गया। ठाकुरगंज स्थित मां पूर्वी देवी मंदिर में माता को फिरोजी रंग के वस्त्र पहनाए गए। माता को 21 किलो के दूध के केक का भोग लगाया गया। मंदिर की महिला मण्डली ने सोने का दरबार सिंघासन, मां को जन्मदिन आज बधाई गाओ सजनी जैसे एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। चौपटिया स्थित संदोहन देवी मंदिर में मां ने हाथी पर सवार सहस्त्र नेत्रों द्वारा इंद्राणी रूप में दर्शन दिए। पक्का पुल स्थित मरी माता मंदिर, शीतला माता मंदिर, संतोषी माता आदि मंदिरों में भी विधि विधान के साथ पूजन हुआ।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी
लखनऊ। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर पाँचवें दिन माँ स्कंदमाता की पूजा-अर्चना अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के साथ संपन्न हुई। इस अवसर पर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दूर से आए भक्तों ने माँ स्कंदमाता के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया और अपने परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना की। महंत विवेकानंद गिरी ने बताया मंदिर परिसर में पूरे दिन भक्ति और उत्साह का वातावरण बना रहा। विशेष रूप से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने अपने बच्चों के मुंडन संस्कार भी करवाए और मंदिर प्रांगण के बाहर लगे मेले का भी आनंद लिया । भक्तों ने पूरे विधि-विधान के साथ माता रानी की पूजा-अर्चना कर प्रसाद ग्रहण किया। मंदिर प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ सुचारू रूप से की गई थीं। शाम की आरती में भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए और माता के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर प्रशासन ने सभी श्रद्धालुओं के लिए माँ स्कंदमाता से सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। मंदिर में प्रत्येक दिन रात्रि 10 रात्रि आरती की जाती है जिसमें ढोल नगाड़े ताशे का प्रयोग किया जाता है एवं भजन कीर्तन कार्यक्रम आरती पश्चात प्रत्येक दिन नवरात्रि तक चलता रहता है । मंदिर में विशेष रूप लखनऊ नगर निगम महापौर सुषमा खर्कवाल पार्षद अन्नू मिश्रा मनीष रस्तोगी ने माता के दर्शन लाभ लिए । मंदिर व्यवस्था में मुख्य रूप से अभय उपाध्याय मुकुंद मिश्रा सिंह देवराज सिंह आदर्श महाराज शिवम् पंडित जी राहुल सारस्वत तुषार वर्मा पंकज उपाध्याय मेघांश वैभव सिंह एवं अन्य सेवादार उपस्थित रहे।

हरे रंग में रंगा 51 शक्तिपीठ:
नन्दना बीकेटी स्थित इक्यावन शक्तिपीठ में चल रहे नवरात्र महोत्सव में सोमवार को मां स्कन्दमाता की पूजा अर्चना हुई। इस मौके पर मां का हरिताम्बर श्रंगार किया गया। मां के वस्त्र हरे रंग के थे तो पूरा मन्दिर हरे रंग की रोशनी से जगमगा रहा था। शाम को भजन संध्या का आयोजन किया गया। जिसमें पुष्पा दीक्षित ने स्वीकार करो जगदम्बे मां मेरी आरती भजन सुनाया। मन्दिर की अध्यक्ष तृप्ति तिवारी ने बताया कि आज पीण्डी पूजन आचार्य मयंक पाण्डेय और वन्दना पाण्डेय ने किया।

मंदिरों में महिलाओं ने किया भजन कीर्तन:
इंदिरा नगर स्थित भूतनाथ मंदिर में मां की विधि.विधान के साथ पूजा की गई। मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ रही। स्कंदमाता प्रेम और वात्सल्य की देवी हैं। मान्यता है कि संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण करने के लिए दंपत्तियों को इस दिन सच्चे मन से मां के इस स्वरूप की आराधना करनी चाहिए, इससे उनकी मुराद पूरी होती है। भगवान कार्तिकेय यानी स्कंद कुमार की माता होने के कारण दुगार्जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता कहा जाता है। देवी के इस स्वरूप में भगवान स्कंद बालरूप में माता की गोद में विराजमान हैं। शाम को मंदिरों में महिलाओं ने भजन कीर्तन किया तथा मां की आराधना कर घर में सुखशांति की कामना की।

नवरात्रि के पंचम दिन फलहारी प्रसादी का आयोजन:
डालीगंज स्थित श्री माधव मंदिर की संस्था श्री राधा माधव सेवा संस्थान के बैनर तले नवरात्रि के पंचम दिन क्षेत्र के विशिष्ट जनों के संग फलाहारी प्रसादी कराया गया। स्कंदमाता का पूजन करते हुए तरबूज खरबूजा पपीता सेब केला का भोग लगाया गया इसके साथी मिक्स फलों का जूस अर्पित कर सर्व निरोगता की कामना करते हुए प्रार्थना की गयी। कार्यक्रम की शुरूआत माँ दुर्गा के बीज मन्त्रो के उच्चारण से किया गया फिर 11 ब्राह्मणों फलहारी प्रसादी कराकर किया गया।

हर संकट हरती हैं माता संकटा देवी:
चौपटिया स्थित रानी कटरा इलाके में स्थित संकटा देवी बेहद प्राचीन मंदिर है। मंदिर की स्थापना करीब आज से 500 वर्ष पूर्व हुई थी। माता की आराधना करने से हर संकट दूर होते हैं। मां को पिन्नी का प्रसाद चढ़ाने की परंपरा है। माता संकटा देवी मंदिर समिति के महामंत्री राजुकमार मेहरोत्रा ने बताया कि मां के दरबार में जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा से आराधना करते हैं मां उनकी हर मुराद पूरी करती हैं। नवरात्र में मंदिर में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं। मां की पूजा करने से विवाह में आ रही समस्या दूर होती है। मनोकामना पूर्ण होने के बाद भक्त चावल, खोया और शकर को मिलाकर बना पिन्नी का प्रसाद चढ़ाते हैं।

चंद्रिका देवी में लगी भक्तों की भीड़, गूंजे जयकारे
लखनऊ। चौपटिया के संदोहन देवी मंदिर में माता रानी का भव्य शृंगार किया गया। वहीं मां सिंह पर विराजी। मां के इस रूप के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। बीकेटी स्थित प्राचीन मां चंद्रिका देवी मंदिर में दर्शन पूजन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। लम्बी कतार लगी रही। लोगों ने मंदिर परिसर में कई तरह के संस्कार कराये, वहीं पवित्र कुंड में स्नान भी किया। शास्त्रीनगर के दुर्गा मंदिर में कलश स्थापना व मां का शृंगार किया गया। इसके अलावा हुसैनगंज के भुइयन देवी मंदिर, त्रिवेणीनगर के दुर्गा मंदिर, चिनहट के छोहरिया माता मंदिर, चिनहट कोतवाली रोड स्थित दुर्गा मंदिर, सीतापुर रोड के विंध्यांचल देवी मन्दिर, टिकैतराय तालाब के शीतला देवी मन्दिर, चौक के संकटा देवी मंदिर, बाबूगंज के भुइयन देवी मन्दिर में भी हवन, पूजन हुआ। भक्तों ने मां के दर्शन किए।

रुचि-रुचि भोग लगाओ मेरी मैया….:
ठाकुरगंज स्थित मां पूर्वी देवी मंदिर में सुबह छह बजे आचार्यों ने मंत्रोच्चारण के बीच कलश स्थापना की। माता का दरबार दोपहर 12 बजे तक भक्तों के लिए दर्शन के लिए खुला रहा। शाम को महिला कीर्तन मंडल की सदस्यों द्वारा भजनों से माता को मनाया जाएगा। रात में आरती व भोग गायन रुचि-रुचि भोग लगाओ मेरी मैया…. के साथ फल, मेवे के लड्डुओं, नारियल का भोग मां को लगाया जाएगा।


आज होगी मां कात्यायनी की आराधना
लखनऊ। कात्यायनी नवदुर्गा या हिंदू देवी पार्वती शक्ति के नौ रूपों में छठवीं रूप हैं। कात्यायनी अमरकोष में पार्वती के लिए दूसरा नाम है, संस्कृत शब्दकोश में उमा, कात्यायनी, गौरी, काली, हेमावती व ईश्वरी इन्हीं के अन्य नाम हैं। शक्तिवाद में उन्हें शक्ति या दुर्गा, जिसमे भद्रकाली और चंडिका भी शामिल है, में भी प्रचलित हैं। यजुर्वेद के तैत्तिरीय आरण्यक में उनका उल्लेख प्रथम किया है। स्कन्द पुराण में उल्लेख है कि वे परमेश्वर के नैसर्गिक क्रोध से उत्पन्न हुई थीं, जिन्होंने देवी पार्वती द्वारा दी गई सिंह पर आरूढ़ होकर महिषासुर का वध किया। वे शक्ति की आदि रूपा है, जिसका उल्लेख पाणिनि पर पतञ्जलि के महाभाष्य में किया गया है, जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व में रचित है। परम्परागत रूप से देवी दुर्गा की तरह वे लाल रंग से जुड़ी हुई हैं।
नवरात्रि उत्सव के षष्ठी को उनकी पूजा की जाती है। उस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक माँ कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से माँ के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार महर्षि कात्यायन ने संतान प्राप्ति के लिए देवी भगवती की कठोर तपस्या की। महर्षि की तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए और उन्हें वरदान दिया कि वह उनके घर उनकी पुत्री के रूप में जन्म लेंगी। एक बार जब महिषासुर नामक के एक दैत्य का अत्याचार बहुत बढ़ गया, जिससे सभी परेशान हो गए।
तब त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) के तेज से देवी उत्पन्न हुईं, जिसने महर्षि कात्यायन के घर जन्म लिया, जिस कारण उनका नाम कात्यायनी पड़ा। माता रानी के घर में पुत्री के रूप में जन्म लेने के बाद ऋषि कात्यायन ने सप्तमी, अष्टमी और नवमी तिथि पर मां कात्यायनी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद मां कात्यायनी ने दशमी तिथि पर महिषासुर का वध किया, इसलिए उन्हें महिषासुर मर्दनी के नाम से भी जाना गया।

मां कात्यायनी की पूजा विधि:
नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा करने के लिए सुबह स्नान आदि करने के बाद पूजा घर की सफाई करें। मां कात्यायनी का ध्यान लगाते हुए उनके चरणों पर पुष्प अर्पित करें। इसके बाद माता को अक्षत, कुमकुम, पुष्प और सोलह श्रृंगार आदि अर्पित करें। मां को जल अर्पित करके दुर्गा चालीसा व दुर्गा सप्तशती का पाठ करें।

मां कात्यायनी का भोग:
मां कात्यायनी को शहद या हलवे का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन सुखद होता है और घर में धन-धान्य का आगमन होता है।

मां कात्यायनी का प्रिय रंग:

मां कात्यायनी का प्रिय रंग लाल है। मान्यता है कि इस दिन लाल रंग के वस्त्र धारण करना शुभ होता है।

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