श्रीराम-विवाह हमें नि:स्वार्थ प्रेम, सम्मान, और धैर्य की प्रेरणा देता है
लखनऊ। त्रिवेणीनगर में चल रही श्रीराम कथा के 5वें दिन गुरुवार को कथा व्यास दिलीप शुक्ल ने श्रीराम विवाहोत्सव प्रसंग में कहा कि श्री सीताराम विवाह केवल एक दांपत्य संबंध नहीं, बल्कि धर्म, मयार्दा और आदर्श जीवन मूल्यों की स्थापना का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज के युग में जहाँ संबंध तात्कालिक सुख (विषय सुखों) पर आधारित हो रहे हैं, जबकि श्रीराम-विवाह हमें नि:स्वार्थ प्रेम, सम्मान, और धैर्य की प्रेरणा देता है। यह प्रसंग हमें याद दिलाता है कि जब संबंध धर्म के आधार पर बनते हैं, तो वे युगों तक प्रेरणा बनते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम और माता सीता का यह विवाह केवल पाणिग्रहण संस्कार नहीं था, यह धर्म और मयार्दा के संयोग का संदेश था। यह हमें सिखाता है कि प्रेम केवल आकर्षण नहीं होता, वह कर्तव्य और त्याग से सिंचित होता है। इस अवसर पर डॉ वीके खन्ना, महेंद्र श्रीवास्तव, प्रदीप शर्मा, मुकेश शर्मा, विवेक सोनकर उपस्थित रहे।





