तुलसी रंगमंच पर चल रही श्रीकृष्ण लीला
लखनऊ। श्री ऐशबाग रामलीला समिति के तत्वाधान में चल रहे भारतीय नववर्ष मेला एवं चैती महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को बरसात के बाद भी तुलसी रंगमंच पर चल रही श्रीकृष्ण लीला को देखने के लिए दर्शकों की मौजूदगी बनी रही, लीला के मंचन में जहां एक ओर श्रीकृष्ण के जन्म पर नंदगांव में हर्ष का माहौल है तो वहीं दूसरी तरफ कंस द्वारा पूरे राज्य में जन्मे नवजात शिशुओं को मारने का आदेश मिलते ही समस्त जनता में कोलाहल मच जाता है, इन्ही सब घटनाओं के बीच नंद बाबा पुत्र जन्म की खबर लेकर कंस के दरबार में उपस्थित होते हैं जहां वे कंस को पुत्र रत्न की खबर सुनाते हैं और भेंट देते हैं जिसके उपरांत कंस को ये संदेह हो जाता है की नंद का पुत्र ही उसका काल बनकर जन्मा है और वही उसका संहार करेगा । जिसके उपरांत वह शिशु स्वरूपी कृष्ण को मारने के लिए मायावी राक्षसी पूतना को नंदगांव भेजता है जहाँ वह वेष बदल कर छल से शिशु कृष्ण को जहरीला स्तनपान करा उन्हे मारने का प्रयास करती है परंतु श्रीकृष्ण शिशु स्वरूप में है उस मायावी राक्षसी का वध कर देते हैं। पूतना के वध से बौखला कर कंस ने कागासुर नामक खुंखार दैत्य को भगवान श्रीकृष्ण की हत्या करने के उद्देश्य से नंद गांव भेजा जहाँ नन्हे कन्हैया अपने खटोले में लेटे थे और तभी कागासुर ने कौए का रूप धारण कर उन्हे मारने का प्रयास किया परंतु वह राक्षस स्वयं शिशु कृष्ण के हाथों से कुछ इस प्रकार से मारा गया की वह सीधे कंस के पास जाकर गिरता है और अपने प्राण त्याग देता है।
इधर कागासुर के वध से मथुरा में बैठा कंस भयभीत हो कर देवकी और वसुदेव को पुन: कारागार में डाल देता है और उधर नंद बाबा के घर पर हर्षोल्लास के साथ शिशु स्वरूपी बलराम और भगवान श्रीकृष्ण के नामकरण का समारोह आरंभ हो गया । इसी बीच देवों के देव महादेव भेष बदल कर अपने आराध्य श्रीहरि विष्णु के इस शिशु स्वरूप के दर्शन करने माता यशोदा के घर पहुंचते हैं और श्रीहरि को इस स्वरूप में देख कर हर्षित हो उठते हैं ।
समय चक्र घूमता है और शिशु कृष्ण अब बाल्यावस्था में प्रवेश कर कान्हा बन कर माखन की चोरी करने लगते हैं और यह लीला देख दर्शक हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की का उदघोष करने लगते हैं । श्रीकृष्ण लीला से पूर्व सांस्कृति मंच पर नृत्य निर्देशक तनुश्री व अरिंदम सिंह के साथ ही अन्य कलाकारों ने भी गणेश स्तुति, कृष्ण भजन और महारास आदि पर नृत्य की प्रस्तुतियां दीं, जिन्हे दर्शकों द्वारा खूब सराहा गया । श्रीरामलीला समिति ऐशबाग के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल ने बताया है की कोलकाता से आए भास्कर नाट्य कला केंद्र के कलाकरों द्वारा 21 मार्च दिन शनिवार को श्रीकृष्ण लीला में बाल कृष्ण द्वारा माता यशोदा को विराट स्वरूप के दर्शन देना, मटकियां फोड़कर माखन चोरी करना, राधाकृष्ण जी का मिलन, बकासुर वध समेत कालिया मर्दन की लीलाओं का प्रमुख रूप से मंचन किया जाएगा ।





