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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के पिता की मौत के मामले में सेंगर को 10 साल की कैद

नई दिल्ली। दिल्ली की एक अदालत ने भाजपा से निष्कासित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में शुक्रवार को 10 साल कड़े कारावास की सजा सुनाई और उस पर 10 लाख रुपए जुर्माना भी लगाया।

अदालत ने आदेश सुनाते हुए कहा कि परिवार के लिए रोजी रोटी कमाने वाले एकमात्र व्यक्ति की हत्या करने वाले के प्रति कोई नरमी नहीं दिखाई जा सकती। जिला न्यायाधीश धर्मेश शर्मा ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में सेंगर के भाई अतुल सेंगर और पांच अन्य को बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत में उनकी भूमिका के लिए 10-10 साल कारावास की सजा सुनाई।

अदालत ने दोषियों को भारतीय दंड संहिता के तहत हत्या का दोषी नहीं ठहराया लेकिन आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या के मामले में अधिकतम कारावास की सजा सुनाई। सेंगर और उसके भाई को बलात्कार पीड़िता समेत मृतक के कानूनी वारिसों को तीन महीने में जुर्माने के तौर पर 10-10 लाख रुपए देने होंगे। अदालत ने कहा कि सेंगर और उसके साथ अन्य दोषी- दो पुलिस अधिकारियों को जनसेवक होने के नाते कानून का पालन करना चाहिए था लेकिन इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन्होंने कानून का उल्लंघन किया।

न्यायाधीश ने कहा, जिस तरीके से पीड़िता के पिता को पीटा गया… उसे देखते हुए दोषियों से कोई नरमी नहीं बरती जा सकती और इसलिए मैं सभी दोषियों को अधिकतम सजा सुनाता हूं। अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को चिकित्सकीय लापरवाही बरतने के मामले में उन चिकित्सकों के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्वाई करने का आदेश दिया जिन्होंने पीड़िता के पिता का उस समय इलाज किया था, जब वह घायल थे और न्यायिक हिरातस में थे।

पीड़िता के पिता को सेंगर के कहने पर शस्त्र कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था और उनकी पुलिस की बर्बरता के कारण नौ अप्रैल, 2018 हिरासत में मौत हो गई थी। सेंगर, उसके भाई और पांच अन्य को चार मार्च को इस मामले में दोषी ठहराया गया था। सेंगर ने पीड़िता के पिता की मौत में किसी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था और कहा था कि उसने कुछ गलत नहीं किया है। गैर इरादतन हत्या के मामले में 10 साल कारावास की सजा के अलावा सेंगर, उसके भाई, माखी पुलिस थाने के तत्कालीन प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया, तत्कालीन सब इंस्पेक्टर के पी सिंह, विनीत मिश्रा, बीरेंद्र सिंह और शशि प्रताप सिंह को अन्य धाराओं के तहत भी दोषी ठहराया गया।

उन्हें आईपीसी की इन धाराओं के तहत सजा सुनाई गई : 120 बी (आपराधिक साजिश) के तहत पांच साल, 193 (झूठे साक्ष्य पेश के लिए सजा) के तहत सात साल, 203 (झूठी जानकारी देना) के तहत दो साल, 201 (अपराध के सबूत गायब करना) के तहत दो साल, 211 (चोट पहुंचाने के इरादे से झूठे आरोप लगाना) के तहत सात साल , 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना) के तहत एक वर्ष , 341 (गलत तरीके से रोककर रखना) के तहत एक महीने और शस्त्र कानून की धारा 25 के तहत तीन साल कारावास की सजा सुनाई गई। अदालत ने ए सजा सुनाते हुए स्पष्ट किया कि दोषियों को दी गई कारावास की सजा की अवधियां साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने अन्य आरोपी कांस्टेबल आमिर खान, शैलेंद्र सिंह, राम शरन सिंह और शरदवीर सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था।

बलात्कार के एक अलग मामले में पिछले साल 20 दिसंबर को सेंगर को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पीड़िता का 2017 में सेंगर ने बलात्कार किया था। घटना के समय वह नाबालिग थी। सीबीआई ने मामले में 55 गवाहों से जिरह की थी और बचाव पक्ष ने नौ गवाहों से जिरह की थी। अदालत ने दुष्कर्म पीड़िता के चाचा, मां, बहन और उसके पिता के एक सहकर्मी के बयान दर्ज किए थे जिसने घटना का चश्मदीद होने का दावा किया था। सीबीआई के अनुसार, तीन अप्रैल 2018 को दुष्कर्म पीड़िता के पिता और शशि प्रताप सिंह के बीच झगड़ा हुआ था। 13 जुलाई 2018 को दाखिल आरोपपत्र में कहा गया कि पीड़िता के पिता और उनके सहकर्मी अपने गांव माखी लौट रहे थे तभी उन्होंने सिंह से (अपने वाहन में) लिफ्ट देने के लिए कहा।

सिंह ने लिफ्ट देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद उनके बीच विवाद हुआ। सिंह ने अपने सहयोगियों को बुलाया। इसके बाद कुलदीप सेंगर का भाई अतुल सिंह सेंगर अन्य लोगों के साथ घटनास्थल पर पहुंचा और महिला के पिता तथा उनके सहकर्मी की पिटाई की। इसके बाद वे महिला के पिता को पुलिस थाना ले गए, जहां उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपपत्र में कहा गया है कि इन सबके दौरान कुलदीप सेंगर जिले के पुलिस अधीक्षक और माखी पुलिस थाने के प्रभारी अशोक सिंह भदौरिया के संपर्क में था।

बाद में उसने उस डॉक्टर से भी बात की जिसने दुष्कर्म पीड़िता के पिता की जांच की थी। पिछले साल एक अगस्त को उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर मामला उत्तर प्रदेश की एक निचली अदालत से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया गया। जुलाई 2019 में एक ट्रक ने उस कार को टक्कर मार दी, जिसमें पीड़िता अपने परिवार के कुछ सदस्यों तथा अपने वकील के साथ यात्रा कर रही थी। घटना में उसकी दो रिश्तेदारों की मौत हो गई। पीड़िता को लखनऊ के एक अस्पताल से विमान से दिल्ली स्थित एम्स लाया गया। पीड़िता को दिल्ली में ठहराया गया है और वह सीआरपीएफ की सुरक्षा में है।

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