कार्यक्रम 10 मार्च को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग, लखनऊ में
लखनऊ। भारतीय संस्कृति, कला और नृत्य परंपराएँ सदियों से समाज में सौंदर्य, संवेदना और आध्यात्मिकता का संदेश देती आई हैं। इन्हीं मूल्यों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से अनुज अर्जुन मिश्रा डांस कंपनी के सहयोग से लखनऊ में एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम रंगोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, नारी सशक्तिकरण और लखनऊ की समृद्ध ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत को समर्पित होगा।
लखनऊ सदियों से कला, संगीत और नृत्य की परंपराओं का केंद्र रहा है। विशेष रूप से कथक की लखनऊ घराना परंपरा ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य को विश्व स्तर पर पहचान दिलाई है। इसी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देते हुए यह कार्यक्रम भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का प्रयास है।
इस अवसर पर जर्मनी से आईं श्रद्धा मिश्रा विशेष रूप से उपस्थित रहेंगी। वे जर्मनी में भारतीय समुदाय और भारतीय संस्कृति से जुड़े मीडिया कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं तथा भारतीय दूतावास के साथ विभिन्न सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों में भी सहभागिता करती रही हैं। वे भारत और जर्मनी के बीच सांस्कृतिक संवाद को सशक्त बनाने और भारतीय परंपराओं को यूरोप में प्रस्तुत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही हैं।
कार्यक्रम 10 मार्च को राय उमानाथ बली प्रेक्षागृह, कैसरबाग, लखनऊ में सायं 6 बजे आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की शुरूआत लखनपुरी और लखनऊ का महत्व विषय पर एक संगोष्ठी से होगी। इस संगोष्ठी में लखनऊ की सांस्कृतिक विरासत, उसकी ऐतिहासिक पहचान और कला परंपराओं की वैश्विक संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। इसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की श्रृंखला आरंभ होगी। कार्यक्रम में गणेश वंदना से शुभारंभ होगा। इसके पश्चात पंडित अनुज मिश्रा और उनके समूह द्वारा इन्फिनिटी शीर्षक से विशेष प्रस्तुति दी जाएगी। प्रसिद्ध कथक कलाकार नेहा सिंह मिश्रा द्वारा जब फाल्गुन रंग छलकते हैं पर एकल नृत्य प्रस्तुति भी कार्यक्रम का आकर्षण होगी। साथ ही अकादमी के जूनियर विद्यार्थियों द्वारा पारंपरिक कथक प्रस्तुतियाँ भी मंचित की जाएँगी। कार्यक्रम के अगले चरण में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक गुरु पंडित अनुज मिश्रा द्वारा गीतगोविंद पर विशेष एकल नृत्य प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद अकादमी के वरिष्ठ विद्यार्थियों द्वारा समूह नृत्य प्रस्तुत किए जाएँगे और कार्यक्रम का समापन मोरे मुरारी खेले होली पर एक विशेष कथक प्रस्तुति के साथ होगा, जो होली के उत्सव और भारतीय सांस्कृतिक रंगों की जीवंत अभिव्यक्ति होगी।
इस अवसर पर श्रद्धा मिश्रा उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विशेष रूप से लखनऊ की कथक परंपरा को यूरोप में किस प्रकार व्यापक रूप से प्रचारित और प्रसारित किया जा सकता है, इस विषय पर अपने विचार साझा करेंगी। उनका मानना है कि भारतीय कला और संस्कृति केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी वैश्विक पहचान और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। आयोजकों के अनुसार रंगोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भारतीय परंपराओं, गुरु-शिष्य परंपरा और नारी सशक्तिकरण के मूल्यों को समाज के सामने प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। यह कार्यक्रम लखनऊ की कलात्मक परंपरा को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुँचाने की दिशा में भी एक सार्थक पहल माना जा रहा है।





