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प्रदोष व्रत कल, भक्त करेंगे शिव जी की पूजा

जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है
लखनऊ। चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत का विधान है। यह तिथि भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि, इस व्रत में प्रदोष काल में की गई शिव उपासना विशेष रूप से प्रभावशाली होती है, क्योंकि इस समय संपूर्ण ब्रह्मांड की ऊर्जा शिव तत्व से अधिक जुड़ी होती हैं। इससे व्यक्ति को मानसिक शांति, आत्मबल और जीवन में संतुलन प्राप्त होता है। साथ ही, यह व्रत जीवन में आ रही बाधाओं को दूर करने और मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग भी प्रशस्त करता है। पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 30 मार्च को सुबह 7 बजकर 9 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 31 मार्च को सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर होगा। ऐसे में प्रदोष व्रत, सोमवार 30 मार्च 2026 को रखा जाएगा। प्रदोष व्रत के दिन शिवलिंग पर शमी का फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। शमी को पापों का नाश करने वाला और शनि दोष को शांत करने वाला माना गया है। शिवलिंग पर गेहूं अर्पित करना अन्न और समृद्धि का प्रतीक है। इससे घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। शिवलिंग पर शहद चढ़ाने से शरीर और मन दोनों को शुद्धता प्राप्त होती है। यह सेहत से जुड़ी परेशानियों को दूर करने का भी कारगर उपाय है। शिवलिंग पर जल अर्पित करना सबसे सरल और प्रभावी पूजा मानी जाती है। जल अभिषेक से मन को शांति मिलती है, क्रोध और तनाव कम होता है। गुड़ अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। यह जीवन में मिठास और संबंधों में मधुरता लाने का प्रतीक है। साथ ही भोलेनाथ प्रसन्न होकर अपनी विसेष कृपा बरसाते हैं।

प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति के सभी पापों का नाश होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से विवाह, संतान सुख और स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कुंडली के दोष भी शांत होते हैं।

प्रदोष व्रत पूजा विधि
प्रदोष की पूजा के लिए सुबह उठकर स्नान करके साफ कपड़े पहन लें। इसके बाद प्रदोष व्रत का संकल्प लें। इस व्रत को फलाहार या निर्जला अपने हिसाब से रखा जा सकता है। प्रदोष व्रत की पूजा शाम में ही होती है तो ऐसे में एक बार सूर्यास्त से पहले स्नान कर लेना शुभ होता है। पूजा के लिए भगवान शिव और मां पार्वती की मूर्ति या फिर तस्वीर को स्थापित करें। धूप और दीया जलाएं।

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