-डीजीपी ने जारी किये निर्देश
लखनऊ। सूबे के डीजीपी हितेश चन्द्र अवस्थी ने ऐसे पुलिसकर्मियों जो श्वास रोग, फेफड़े की बीमारी, हृदय रोग, गंभीर मधुमेह जैसी बीमारी से ग्रसित हैं, उनको लॉग डाउन की फ्रन्ट लाइन डियूटी में न लगाया जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे कर्मियों को चिन्हित करते वक्त यह अवश्य ध्यान में रखा जाए कि वही पुलिस कर्मी फ्रन्ट लाइन डियूटी से मुक्त होंगे जो गंभीर बीमारियों से ग्रसित होने के कारण पूर्व में अस्पताल में भर्ती हुए हों। सामान्यत: स्वस्थ पुलिस कर्मी को अवमुक्त न किया जाए। उन्होंने कहा कि अस्वस्थ्य पुलिसकर्मियों का ख्याल रखा जाए।
पुलिस प्रमुख ने इस संबंध में सभी जोन के एडीजी, रेंज के आईजी व डीआईजी और सभी जिलों के एसपी व एसएसपी को निर्देश देते हुए कहा कि 55 वर्ष की आयु से ऊपर के कार्मिकों की बीमारी के पूर्व इतिहास के आधार पर समीक्षा कर यथासंभव उन्हें भी फ्रन्ट लाइन डियूटी से मुक्त करने पर विचार कर लिया जाए। फ्रन्ट लाइन डियूटी की परिभाषा में वह सभी कार्य सम्मिलित होंगे जहॉ अनजान व्यक्तियों के निकट सम्पर्क में आने की संभावना अधिक है।
उदाहरण के तौर पर हास्पिटल डियूटी, रैपिड एक्शन टीम डियूटी, क्वारंटाइन सुरक्षा डियूटी, स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षा डियूटी, मुल्जिम गिरफ्तारी की ड्यूटी एवं 112 वाहन की डियूटी आदि। उन्होंने कहा कि फ्रन्ट लाइन डियूटी में लगे समस्त कर्मियों को एसओपी का पालन करने हेतु नियमित ब्रीफिंग किया जाए। डियुटी में तैनात कर्मियों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा उपकरणों को पर्याप्त संख्या में उपलब्ध कराते हुए इसके उपयोग करने के संबंध में पर्यवेक्षण किया जाए।
डीजीपी ने कहा कि नियमित खान-पान-रोग निरोधक क्षमता को बढ़ाने के उपायों पर विशेष ध्यान रखने हेतु निरन्तर ब्रीफिंग की जाए। उन्होंने निर्देश दिये ये आदेश तत्काल प्रभाव से लागू किये जाएं। जो पुलिसकर्मी वास्तव में बीमार हों, उनके स्वास्थ्य का भी ध्यान रखा जाए।
यहां बता दें पूरे प्रदेश में यूपी पुलिस के जवान लॉक डाउन का सख्ती से पालन कराने के लिए रातदिन डियूटी दे रहे हैं। जिलों में शिफ्ट वाइज डियूटी लगायी जा रही हैं। पुलिसकर्मियों के खाने और पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है।