फगुनाहट कवि सम्मेलन का आयोजन
लखनऊ। हिंदुस्तानी अकादमी प्रयागराज एवं साहित्यिक संस्था लोकायतन की ओर से फगुनाहट कवि सम्मेलन में एक से बढ़कर एक रचनाएं सुनायी गईं। कपूरथला स्थित एक होटल में हुए सम्मेलन में कवियों का स्वागत कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. मालविका हरिओम ने किया। कवि सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अम्बरीश अम्बर ने की, जबकि संचालन युवा कवि शाहबाज तालिब ने किया। मुख्य अतिथि सदस्य विधान परिषद पवन सिंह चौहान रहे।कवि सम्मेलन में डॉ. मालविका ने हिंदी का परचम हमको लहराना है, दुनिया-भर में इसका अलख जगाना है कविता से हिन्दी की महिमा का गुणगान किया। वहीं पंकज प्रसून ने समकालीन तकनीक और नई पीढ़ी पर व्यंग्य करते हुए कहा कि अब तो लुगाई से कहीं बेहतर है एआई, जाने क्या गुल खिलाएगी इक्कीसवीं सदी, लाइक, शेयर, सब्सक्राइब जिनके मूलमंत्र हैं, जेन जी ही अब चलाएगी इक्कीसवीं सदी को सुनाकर श्रोताओं की तालियां अर्जित कीं। शाहबाज तालिब ने वतन मंजूर हमको मौत लेकिन तेरा परचम तो ऊंचा हो गया ना रचना से देशभक्ति का संचार किया। इसके साथ ही अभिश्रेष्ठ तिवारी ने इतना करम हुआ कि तमाशा नहीं हुआ, वरना तुम्हारी सम्त से क्या-क्या नहीं हुआङ्घ, फैज खुमार बाराबंकवी ने फैज यूं ही गजल नहीं होती, मुद्दतों जहन को खंगालना पड़ता है जैसी रचनाओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज करायी। कवि सम्मेलन में आदर्श श्रीवास्तव मुकेश मानक, पवन आगरी, डॉ. वंदना शुक्ला, शिखा श्रीवास्तव, योगेंद्र योगी, रविंद्र अजनबी, लोकेश त्रिपाठी, करतल किशोर, सैयद मेराज, निर्भय निश्छल सहित अनेक कवियों ने भी अपनी रचनाओं से समां बांधा।





