कम्बल, खिचड़ी आदि का दान किया
लखनऊ। माघ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या यानी मौनी अमावस्या पर रविवार को लोगों ने शुभमुहूर्त में मौन रखकर श्रद्धा के साथ पवित्र स्नान किया। कुछ लोगों ने गोमती नदी में आस्था की डुबकी लगायी। वहीं अधिकतर लोगों ने अपने घरों में पानी में गंगाजल डालकर स्नान किया। दिनभर मौन रहकर उपवास रखा। स्नान के बाद लोगों ने काले तिल, तिल का तेल, आंवला, कम्बल, खिचड़ी आदि का दान किया।
मंदिरों में जाकर अपने आराध्य का दर्शन- पूजन किया। माघ आमवस्या शनिवार की मध्य रात्रि 12:03 बजे से शुरू होकर 18 जनवरी की देर रात 01:21 बजे तक रहेगी। मौनी अमावस्या पर हर्षण और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहे हैं। साथ ही शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। आचार्य बिन्द्रेस दुबे ने बताया कि मौनी अमावस्या के दिन पूर्वाअषाढा नक्षत्र, चंद्रमा धनु राशि में और चार ग्रह सूर्य बुध शुक्र मंगल मकर राशि में संयोग बना रहे हैं। अर्धोदय योग भी बनेगा। स्कंदपुराण में इस अर्धोदय योग को बहुत पुण्यदायी बताया गया है। इसमें स्नान दान आदि पुण्य कार्य करने से कई गुना अधिक फल की प्राप्ति होती है। इस दिन की गई पूजा और दान से राहु, केतु और शनि से संबंधित दोषों की शांति होती है। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान आदि कर पूरे दिन मौन रहकर उपवास करते हैं। भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है। मौनी अमावस्या के दिन मौन रहने और कटु शब्दों को न बोलने से मुनि पद की प्राप्ति होती है। तिल, तिल का तेल, आंवला, कंबल आदि वस्त्रों का दान करना चाहिए। साथ ही जिनकी कुंडली में पितृ दोष है। उनको पितरों को तर्पण आदि कर दान दक्षिणा करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।
शहर में गोमती के कुड़ियाघाट, लल्लूमल घाट, कलाकोठी घाट पर भी कुछ लोगों ने स्नान किया। कुड़िया घाट पर पुरोहित पारूल शुक्ला ने बताया कि जिनकी कुंडली में पितृ दोष होता है उन्होंने पितरों का तर्पण व पिंडदान किया। पितृ देव को प्रसन्न करने के लिए दान-दक्षिणा दी। ऐसी मान्यता है कि इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। वहीं लोगों ने अपने घरों पर स्नान करने के बाद भगवान विष्णु के साथ पीपल के पेड़ की पूजा की। मंदिरों में जाकर भगवान का दर्शन किया।





