रजत जयंती वर्ष के मेले का षष्ठम दिवस
लखनऊ। पर्वतीय महापरिषद लखनऊ द्वारा आयोजित उत्तरायणी कौथिग का षष्ठम दिवस रजत जयंती के अवसर पर समाज एवं संस्कृति सेवा के शानदार पच्चीस साल, बेमिसाल पर आधारित वृत्तचित्र से प्रारम्भ हुआ, जिसे मंच से प्रसारित किया गया। वृत्तचित्र में दर्शाया गया है कि पर्वतीय महापरिषद की स्थापना किन कारणों व उद्देश्यों के लिए की गयी साथ ही साथ पर्वतीय महापरिषद ने स्थापना से अभी तक पच्चीस साल में किन-किन सामाजिक, सांस्कृतिक उत्थान व राहत कार्यों में अपनी भूमिका निभाई। उदाहरण के तौर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों व अन्य प्रयासों से समाज और सामाजिक संगठनों को एक सूत्र में पिरोने का महत्वपूर्ण कार्य, समाज के निर्बल परिवारों के सहातार्थ प्रेरणाप्रद कार्य, देश के किसी भी क्षेत्र में आई आपदा के समय राहत कार्य हेतु पर्वतीय महापरिषद की तत्पर एवं साहसिक भूमिका, कोरोनाकाल में सर्वसमाज के लिए आॅक्सीजन सिलेंडर, एम्बुलेस से लेकर औषधि एवं खाद्य पदार्थ की व्यवस्था कर पीड़ितों तक उपलब्ध कराने का सराहनीय कार्य इत्यादि की झलक देखकर दर्शकदीर्घा भावुक व अभिभूत हुई। पर्वतीय महापरिषद के उपाध्यक्ष के एन पाण्डे ने बताया कि वृत्तचित्र का संकलन रार्ष्ट्पति भारत सरकार द्वारा भारतीय रंगमंच में निर्देशन के सर्वोत्तम राष्टर््ीय पुरुष्कार से सम्मानित रंगकर्मी ललित सिंह पोखरिया द्वारा छायाकार दयाल सिंह रावत एवं भुवन पाण्डेय के सहयोग से किया गया। तत्पश्चात् सांस्कृतिक कार्यक्रमों का दौर क्षेत्रीय शाखाओं की नृत्य प्रस्तुतियों से आरम्भ होकर झोड़ा प्रतियोगिता तक निरन्तर चला जिसमें चित्रा काण्डपाल के नेतृत्व में गोमती नगर, नन्दा रावत के जोहार मुनस्यार सांस्कृतिक दल, देवकी बोरा के विकास नगर, हेमा तिवारी के उत्तराखण्ड जनकल्याण समिति विकास नगर, रजनी सिंह के मानस योग केन्द्र शक्तिनगर, लखनऊ, हेमा देवी वाणगी के देवभूमि जन सरोकार सांस्कृतिक समिति लखनऊ के दलों ने झोड़ा नृत्य प्रतियोगिता में भाग लिया, इसके बाद पहाड़ी धुनों पर देशी ठुमका प्रतियोगिता हुई।
सायंकालीन सभा का मुख्य आर्कषण आनन्द कपकोटी के निर्देशन में लोक गाथा पर आधारित नृत्य नाटिका रामी बौराणी का मंचन रहा जोकि गोमती नगर लखनऊ शाखा द्वारा प्रस्तुत किया गया। गायन प्रतियोगिता पहाड़ की आवाज के 5 प्रतिभागियों की, छपेली प्रतियोगिता झुमिगो सीजन 4 के 4 प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों से मंच की निरन्तरता बनी रही।
मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक खेल विभाग उ प्र आरपी सिंह ने शिरकत की। मुख्य अतिथि का स्वागत पर्वतीय महापरिषद के मुख्य संयोजक टी एस मनराल, संयोजक के एन चंदोला, अध्यक्ष गणेष चन्द्र जोषी एवं महासचिव महेन्द्र सिंह रावत की उपस्थिति में भुवन पाण्डेय जहाँवासी, बसंत बल्लभ भट्ट द्वारा पुष्पगुच्छ प्रदान करके व लक्ष्मण सिंह भण्डारी, दिलीप सिंह बोरा द्वारा षॉल पहनाकर, के एस रावत व महेन्द्र सिंह मेहता द्वारा उत्तराखण्डी टोपी पहनाकर एवं सुमन रावत व जानकी अधिकारी द्वारा प्रतीक चिन्ह देकर किया गया। उत्तरायणी कौथिग के मंच से मिस उत्तरायणी का व मिस्टर उत्तरायणी का दिव्यांशु जोषी को सम्मान प्राप्त हुआ।





