भातखण्डे में कथक की समृद्ध परंपरा पर पांच दिवसीय मास्टर क्लास – द्वितीय दिवस
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय, लखनऊ द्वारा पद्मविभूषण पंडित बिरजू महाराज की स्मृति में स्थापित पीठ के अंतर्गत कथक नृत्य की पांच दिवसीय मास्टर क्लास का आयोजन विश्वविद्यालय के कला मंडपम सभागार में किया जा रहा है। प्रख्यात कथक गुरु पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य के निर्देशन में 10 फरवरी से 14 फरवरी 2026 तक आयोजित यह मास्टर क्लास अत्यंत गरिमामय एवं प्रेरणादायक वातावरण में संपन्न हो रही है।
कार्यक्रम के द्वितीय दिवस का शुभारम्भ वरिष्ठ गुरु पंडित राम मोहन महाराज, विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य, कार्यक्रम संयोजक एवं विभागाध्यक्ष (नृत्य) ज्ञानेन्द्र दत्त बाजपेयी, सहायक आचार्य (कथक नृत्य) डॉ. मंजुला पंत तथा डॉ. रूचि खरे की उपस्थिति में हुआ ।
मास्टर क्लास के द्वितीय दिवस पर पंडित असीम बंधु भट्टाचार्य ने कथक नृत्य के तकनीकी पक्षों पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को ऋतु बसंत के भाव की प्रस्तुति का उच्चस्तरीय प्रशिक्षण प्रदान किया तथा शुद्ध नृत्य के अंतर्गत आमद, टुकड़े एवं चक्करों के अभ्यास का विशेष प्रशिक्षण भी दिया। इस अवसर पर शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों के साथ संवाद करते हुए उन्होंने कथक की सूक्ष्म बारीकियों को व्यावहारिक रूप से स्पष्ट किया, जिससे नृत्य की तकनीकी, सौंदर्यात्मक तथा शोधपरक समझ को नई दिशा मिली।
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय के शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को कथक नृत्य की समृद्ध परंपरा, उसकी तकनीकी विशेषताओं तथा महान कला विभूतियों के जीवन मूल्यों एवं सांस्कृतिक योगदान से परिचित कराना है। साथ ही इस अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर को समाज के व्यापक वर्ग तक पहुँचाना भी इसका प्रमुख लक्ष्य है।
विश्वविद्यालय द्वारा पंडित बिरजू महाराज की स्मृति में स्थापित इस पीठ के अंतर्गत वर्ष भर व्याख्यान, संगोष्ठियाँ, कार्यशालाएँ, संगीत-नृत्य प्रस्तुतियाँ तथा शोधपरक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे संगीत शिक्षा, अनुसंधान और सामाजिक सहभागिता को नई दिशा प्राप्त होगी।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. मांडवी सिंह ने कहा कि कथक केवल एक नृत्य शैली नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, सौंदर्यबोध और आध्यात्मिक अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम है। ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को परंपरा से जुड़ने के साथ-साथ उत्कृष्टता की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा मिलती है।
कुलसचिव डॉ. सृष्टि धवन ने बताया कि विश्वविद्यालय निरंतर ऐसे शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कर विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण, शोध उन्मुख दृष्टि और सांस्कृतिक संवेदनशीलता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।





