भारत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर पूरी दुनिया में तमाशा करने वाले पाकिस्तान, उसकी कट्टरपंथियों और शासकों का नकाब एक बार फिर उतर गया है। जम्मू-कश्मीर में धारा 370 के उन्मूलन के बाद जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर जो एहतियाती उपाय किये गये थे, उसके बहाने इमरान खान और उनकी सरकार पूरी दुनिया में ढ़िंढोरा पीट रही थी कि भारत में 80 लाख मुस्लिमों को कैद कर उन पर बेइंतिहा जुल्म किये जा रहे हैं।
भारत के अल्पसंख्यकों की जरूरत से ज्यादा चिंता करने वाला पाकिस्तान अगर अपने अल्पसंख्यक नागरिकों की चिंता करता, तो निश्चय ही आज पाकिस्तान की स्थिति इतनी दयनीय नहीं होती। पाकिस्तान कितना दोगला, धोखेबाज और अपराधी मुल्क है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक तरफ चीन ने दस लाख से अधिक मुस्लिमों को डिटेंशन कैंप में रखकर उनका धर्म भ्रष्ट कर रहा है, इस्लाम छोड़ने पर उन्हें मजबूर कर रहा है, लेकिन पाकिस्तान कभी चीन की निंदा नहीं करता है।
पाकिस्तानी शासक चीनी में हो रहे मुस्लिमों के दमन की जानकारी तक नहीं होने की बात करते हैं। यह भी पाकिस्तान का दोगला और धोखेबाजी वाला चरित्र ही है कि अपने यहां अल्प संख्यकों पर लगातार जुल्म करता है और भारत में अल्प संख्यकों की सुरक्षा को लेकर दुष्प्रचार कर अपनी काली करतूतों को छिपाना चाहता है। अल्पसंख्यकों का धर्म परिवर्तन, उनकी लड़कियों का अपहरण, उनसे जबरिया शादी करना, अल्पसंख्यक धर्म स्थलों पर हमला और हत्या जैसी शर्मनाक घटनाएं पाकिस्तान में लगातार हो रही हैं। यही कारण है कि लगातार पाकिस्तान से गैर हिन्दुओं का पलायन हो रहा है।
कभी पाकिस्तान में गैर मुस्लिमों की आबादी 23 प्रतिशत थी, जो आज घट कर पांच प्रतिशत से कम रह गयी है। पाकिस्तान में मुस्लिम आबादी 95 फीसद से अधिक हो गयी है। महज साढ़े चार फीसद के आसपास ही गैर मुस्लिम हैं, लेकिन इनको भी खत्म करने के लिए लगातार पाकिस्तानी कट्टरपंथी हमले कर रहे हैं। अल्पसंख्यकों की हत्या, उनकी लड़कियों से जबरिया शादी करने या फिर धर्मपरिवर्तन करने वाले अपराधियों को बाकायदा पाकिस्तान में सम्मान मिलता है। कट्टरपंथियों के इस आपराधिक कृत्य को वहां की सरकार, सेना और मजहबी संगठनों का भी समर्थन हासिल रहता है। यही कारण है कि पाकिस्तान में लगातार अल्पसंख्यकों का दमन हो रहा है।
गुरुद्वारा ननकाना साहिब पर हमला, सिख लड़की से जबरिया शादी और धर्मपरिवर्तन तथा दूसरे सिख युवक ही हत्या, दरअसल उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो धर्मनिरपेक्षता के नाम पर सीएए का विरोध कर रहे हैं। धर्म निरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य का कोई धर्म नहीं होगा और सभी लोगों को अपने मत के अनुसार उपासना की आजादी होगी। धर्म निरपेक्षता का यह मतलब कदापि नहीं है कि पीड़ित लोगों की मदद न की जाये। भारत का संविधान मानवीय गरिमा और जीवन एवं उपासना की स्वतंत्रता का प्रबल समर्थक है।
इसलिए अगर पड़ोसी देशों से धार्मिक उत्पीड़न के शिकार लोग शरण मांगते हैं, तो उनके साथ खड़ा होना हमारे संविधान की मंशा को साकार करता है। ननकाना साहिब पर हमला और अल्पसंख्यकों का दमन परोक्ष रूप से भारत पर हमला है। इसलिए पीड़ितों की मदद के साथ ही यूएनओ सहित पूरी दुनिया में इसे उठाकर पाकिस्तान को बेनकाब करना चाहिए।





