सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामलों में संस्था पर कार्रवाई
लखनऊ। लव जिहाद को लेकर देशभर में गरमायी सियासत के बीच मुख्यमंत्री योगी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में धर्मांतरण अध्यादेश के मसौदे को मंजूरी दे दी गयी है। इसका नाम ‘विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश- 2020’ होगा। इसके तहत झांसा देकर, झूठ बोलकर या छल-प्रपंच करके धर्म परिवर्तन करने-कराने वालों के साथ सरकार सख्ती से पेश आयेगी। अगर सिर्फ शादी के लिए लड़की का धर्म बदला गया तो ऐसी शादी न केवल अमान्य घोषित होगी, बल्कि धर्म परिवर्तन कराने वालों को 10 साल तक जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।
अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही यह कानून प्रभावी हो जायेगा। नया कानून अमल में आने के बाद प्रदेश में बलपूर्वक, झूठ बोलकर, लालच देकर या अन्य किसी कपटपूर्ण तरीके से अथवा विवाह के लिए धर्म परिवर्तन गैर जमानती अपराध होगा। इसके अलावा योगी कैबिनेट ने 14 और अहम प्रस्तावों को भी मंजूरी प्रदान की है। इनमें उप्र प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (शैक्षणिक संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश-2020 को प्रख्यापित कराने एवं उसका प्रतिस्थानी विधेयक राज्य विधान मंडल में पारित कराने का प्रस्ताव भी शामिल है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों में आर्थिक रूप से पिछड़े सामान्य वर्ग के लोगों को आरक्षण देने का प्रावधान है।
कैबिनेट के फैसले
- उप्र प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (शैक्षणिक संवर्ग में आरक्षण) अध्यादेश-2020 का प्रतिस्थानी विधेयक विधान मंडल में पारित होगा
- पीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में प्रोफेसरों के रिक्त पदों पर रिटायर प्रोफेसरों की संविदा पर होगी भर्ती
- मंडी शुल्क 02 प्रतिशत से घटाकर 01 प्रतिशत किया जायेगा
- अयोध्या एयरपोर्ट होगा मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाई अड्डा
- उत्तर प्रदेश राज्य न्यायालय वीडियो कॉंफ्रेंसिंग नियमावली-2020 प्रख्यापित होगी
- सरयू नहर परियोजना फेज-3 एवं अर्जुन सहायक परियोजना के अंतर्गत प्रक्षेत्र विकास कार्य कराये जायेंगे
- गोरखपुर एवं वाराणसी मंडल में मंडल स्तर पर एकीकृत कार्यालय परिसर का निर्माण होगा
- लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर सुरक्षा की दृष्टि से 5 निर्माणाधीन पुलिस चौकियों तथा 10 पुलिस चौकियों की स्थापना का प्रस्ताव मंजूर
- प्रयाग स्टेशन से फाफामऊ रेलवे स्टेशन के मध्य दो लेन रेल उपरिगामी सेतु का व्यय भार राज्य सरकार वहन करेगी
- जनपद हमीरपुर में जैविक खेती का विकास होगा
- राज्य विश्वविद्यालय, सहारनपुर में राजकीय महाविद्यालय पुँवारका आमेलित होगा
इसके अलावा पीजीआई, केजीएमयू और डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में प्रोफेसरों के रिक्त पदों पर रिटायर प्रोफेसरों को संविदा के आधार पर भर्ती किया जायेगा। मंडी शुल्क की वर्तमान दर को 02 प्रतिशत से घटाकर 01 प्रतिशत करने का प्रस्ताव भी अनुमोदित किया गया है। अयोध्या स्थित एयरपोर्ट का नामकरण मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम हवाई अड्डा, अयोध्या करने तथा उत्तर प्रदेश राज्य न्यायालय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग नियमावली, 2020 के प्रख्यापन के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गयी है।
कैबिनेट ने सरयू नहर परियोजना फेज-3 एवं अर्जुन सहायक परियोजना के अंतर्गत प्रक्षेत्र विकास कार्य कराने की कार्य योजना व गोरखपुर एवं वाराणसी मंडल में मंडल स्तर पर एकीकृत कार्यालय परिसर के निर्माण का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया है। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे पर यातायात सुरक्षा की दृष्टि से 05 निर्माणाधीन पुलिस चौकियों तथा 10 पुलिस चौकियों की स्थापना के संबंध में प्रस्ताव मंजूर किया गया है। जनपद प्रयागराज में प्रयाग-लखनऊ रेल खंड पर प्रयाग स्टेशन से फाफामऊ रेलवे स्टेशन के मध्य दो लेन रेल उपरिगामी सेतु निर्माण की संपूर्ण परियोजना का व्यय भार राज्य सरकार द्वारा करने का प्रस्ताव भी अनुमोदित किया गया है।
जनपद हमीरपुर में जैविक खेती के विकास की योजना तथा राज्य विश्वविद्यालय, सहारनपुर में राजकीय महाविद्यालय, पुँवारका को आमेलित करने, उप्र पंडित दीन दयाल उपाध्याय पशु चिकित्सा विज्ञान विश्वविद्यालय एवं गो-अनुसंधान संस्थान, मथुरा के कुलपति/शिक्षकों के वेतनमान का पुनरीक्षण प्रस्ताव भी पास हुआ है। एमएसएमई मंत्री व राज्य सरकार के प्रवक्ता सिद्धार्थ नाथ सिंह ने यह जानकारी देते हुए बताया कि धर्मांतरण रोक संबंधी कानून में प्रावधान किया गया है कि यदि सिर्फ शादी के लिए धर्म बदला तो वह अमान्य होगी। अध्यादेश के अनुसार प्रदेश में किसी एक धर्म से अन्य धर्म में लड़की के धर्म में परिवर्तन से एकमात्र प्रयोजन के लिए किये गये विवाह पर ऐसा विवाह शून्य (अमान्य) की श्रेणी लाया जा सकेगा।
एक धर्म से दूसरे धर्म में परिवर्तन के लिए संबंधित पक्षों को विहित प्राधिकारी के समक्ष उद्घोषणा करनी होगी कि यह धर्म परिवर्तन पूरी तरह स्वेच्छा से है। संबंधित लोगों को यह बताना होगा कि उन पर कहीं भी, किसी भी तरह का कोई प्रलोभन या दबाव नहीं है। दबाव डालकर या झूठ बोलकर अथवा किसी अन्य कपटपूर्ण ढंग से अगर धर्म परिवर्तन कराया गया तो यह संज्ञेय अपराध होगा। यह गैर जमानती होगा और प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मुकदमा चलेगा। दोष सिद्ध हुआ तो दोषी को कम से कम 01 वर्ष और अधिकतम 05 वर्ष की सजा भुगतनी होगी। साथ ही कम से कम 15,000 रुपये का जुर्माना भी भरना होगा।
अगर धर्म परिवतर्न का मामला अवयस्क महिला, अनूसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति की महिला के संबंध में हुआ तो दोषी को तीन से 10 वर्ष तक कारावास और न्यूनतम 25,000 रुपये जुर्माना अदा करना पड़ेगा। अध्यादेश में धर्म परिवर्तन के सभी पहलुओं पर प्रावधान तय किये गये हैं। इसके अनुसार धर्म परिवर्तन का इच्छुक होने पर संबंधित पक्षों को तय प्रारूप पर जिला मजिस्ट्रेट को दो माह पहले सूचना देनी होगी। इसका उल्लंघन करने पर छह माह से तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है। इस अपराध में न्यूनतम जुर्माना 10,000 रुपये तय किया गया है। योगी सरकार ने सामूहिक धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर लगाम लगाने के भी पुख्ता इंतजाम किये हैं। नये कानून में सामूहिक धर्म परिवर्तन के मामले में तीन से 10 वर्ष तक जेल हो सकती है और कम से कम 50,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा।





