भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह
लखनऊ। भारतेंदु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती नाट्य समारोह में रविवार को भारतेन्दु नाट्य अकादमी के रंगमण्डल की ओर से पद्मा सचदेव के प्रसिद्ध हिंदी उपन्यास पर आधारित अब न बनेगी देहरी नाटक का मंचन बीएनए के सभागार में किया गया। प्रस्तुति का निर्देशन अकादमी के निदेशक बिपिन कुमार ने किया, जबकि नाट्य रूपांतरण वरिष्ठ रंगकर्मी एवं अभिनेता आसिफ अली ने तैयार किया। आसिफ अली को इन दिनों फिल्म धुरंधर में बाबू डकैत की भूमिका के लिए खूब प्रशंसा मिल रही है। कहानी स्त्री शोषण, आॅनर किलिंग और सामाजिक रूढ़ियों पर गहरा प्रहार करती है। नायिका रेवती एक परम सुंदरी युवती है, जो कम उम्र में विधवा हो जाती है।
समाज की क्रूरता और लोक-लाज के भय से त्रस्त होकर वह आत्महत्या करने का निर्णय लेती है और घर से भाग जाती है। रास्ते में वह एक शिव मंदिर पहुंचती है, जहां महंत गिरिबाबा उसे बचाते हैं। रेवती महंत से रूहानी प्रेम करने लगती है। उसकी बाल विधवा बुआ को भी प्रेम के कारण आॅनर किलिंग का शिकार बनाकर मार डाला गया था और उसकी समाधि (देहरी) बना दी गई थी। रेवती इस अन्याय के खिलाफ प्रण लेती है कि अब लोक-लाज के नाम पर कोई और देहरी नहीं बनेगी। उपन्यास महिलाओं के संघर्ष, ब्रह्मचर्य के द्वंद्व और सामाजिक बंधनों की गहन पड़ताल करता है। नाटक के मंचन ने दर्शकों को गहरे तक छू लिया। भारतेन्दु नाट्य अकादमी के कलाकारों ने संवेदनशील विषय को जीवंत रूप दिया, जिससे स्त्री अधिकारों और रूढ़िवादी परंपराओं पर विचार करने को मजबूर होना पड़ा।





