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चैत्र नवरात्र आज से, शुभ योग में घर-घर पधारेंगी मां भवानी

चैत्र नवरात्र आज से, 72 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

लखनऊ। इस साल चैत्र नवरात्र 19 मार्च से लेकर 27 मार्च तक मनाए जाएंगे। चैत्र नवरात्र के पहले दिन प्रतिपदा तिथि पर विधि-विधान से कलश स्थापना होगी, फिर अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन के साथ नवरात्र का समापन होगा। इस बार घटस्थापना के दिन तीन बड़े ही खास योग रहने वाले हैं। एक और खास बात ये है कि घटस्थापना के समय चैत्र अमावस्या का प्रभाव भी रहने वाला है। हिंदू पंचांग के मुताबिक, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 मार्च को सुबह 6 बजकर 52 मिनट से प्रारंभ होगी और 20 मार्च को तड़के 4 बजकर 52 मिनट तक रहेगी। 19 मार्च को सूर्योदय अमावस्या तिथि में ही होगा। इसलिए घटस्थापना के समय अमावस्या का प्रभाव भी रहने वाला है. ज्योतिषविदों का कहना है कि यह दुर्लभ संयोग करीब 72 साल बाद बन रहा है।

प्रतिपदा तिथि पर 3 शुभ योग
शुक्ल योग- 19 मार्च को सुबह से शुरू होकर देर रात 01:17 बजे तक रहेगा।
ब्रह्म योग- 19 मार्च की रात 01:17 बजे से शुरू होकर 20 मार्च की रात तक प्रभावी रहेगा।
सर्वार्थ सिद्धि योग- 20 मार्च को सुबह 4:05 बजे से 6:25 बजे तक रहेगा।

कलश स्थापना का मुहूर्त
19 मार्च को कलश स्थापना के लिए दो विशेष मुहूर्त बताए गए हैं. पहला शुभ समय सुबह 6 बजकर 02 मिनट से 7 बजकर 43 मिनट तक रहेगा. इसके बाद दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।

इस बार मां दुर्गा का वाहन-
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्र किस दिन से शुरू हो रहे हैं, उसके आधार पर मां दुर्गा के आगमन का वाहन तय माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार जब नवरात्र गुरुवार या शुक्रवार से शुरू होते हैं, तो मां दुर्गा का आगमन पालकी (डोली) पर माना जाता है। साल 2026 में नवरात्र गुरुवार से शुरू हो रहे हैं, इसलिए इस बार मां दुर्गा के पालकी पर आने की मान्यता बताई जा रही है। पालकी पर मां के आगमन को कई लोग बदलाव और नई परिस्थितियों का संकेत भी मानते हैं।

नवरात्र में कैसे करें कलश स्थापना-
नवरात्र के पहले दिन घर में साफ जगह पर मिट्टी रखकर उसमें जौ बोए जाते हैं। इसके पास जल से भरा कलश रखा जाता है। कलश के ऊपर नारियल और आम के पत्ते रखे जाते हैं। इसके बाद मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है और पास में अखंड दीपक जलाया जाता है। नवरात्र के पूरे नौ दिनों तक मां दुर्गा की पूजा की जाती है और सात्विक भोजन का पालन किया जाता है।

फूलों से सजा चंद्रिका देवी मंदिर:
बीकेटी स्थित मां चंद्रिका देवी मंदिर को फूलों से सजाया जा रहा है। मां चंद्रिका देवी मेला विकास समिति के अध्यक्ष व मीडिया प्रभारी नागेंद्र चौहान ने बताया कि मुख्य दरबार को लाइटों से सजाया गया है। रोजाना अलग.अलग भक्त की ओर से मां का दिव्य श्रृंगार होगा। नवरात्र पर लगने वाले विशाल मेला व मां के दर्शन को सीतापुर, बाराबंकी समेत कई जिलों भक्त आते हैं।

भोर में खुल जाएंगे शीतला मंदिर के कपाट:
राजाजीपुरम के टिकैतराय तालाब के सामने मेहंदीगंज स्थित शीतला माता मंदिर में पहले दिन तड़के चार बजे भक्तों के लिए कपाट खुल जाएंगे। शीतला माता मंदिर कमेटी के अध्यक्ष सुनील सैनी ने बताया कि परिसर को लाइटों, फूलों से सजाया गया है। इस प्राचीन मंदिर में रोजाना भजन, गीत की प्रस्तुति होगी। साथ ही भक्तों को प्रसाद वितरण किया जाएगा।

शास्त्रीनगर दुर्गा मंदिर में लाई गई मां ज्वाला की ज्योत:

शास्त्रीनगर स्थित दुगार्जी मंदिर में सोमवार से नवरात्र उत्सव का शुभारंभ हो गया। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा से मां ज्वाला देवी मंदिर से ज्योत लखनऊ लाई गई। शाम को चारबाग स्टेशन पर मां के भक्तों ने जयकारों के साथ ज्योत का स्वागत किया। इसके बाद फूलों से सजे-धजे रथ पर ज्योत को रखकर शास्त्री नगर स्थित मंदिर लाया गया। इस शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। मंदिर में ज्योत को स्थापित किया गया। मंदिर के प्रबंधक राजेन्द्र गोयल ने बताया कि 18 अप्रैल को ज्योत का विसर्जन किया जायेगा। मंदिर के आसपास मेला लगना शुरू हो गया है।

रंगीन झालरों से सजे मंदिर, फूलों से होगा माता का दिव्य शृंगार
लखनऊ। चैत्र नवरात्र पर शहर के मंदिरों में भव्य तैयारियां चल रही हैं। रंग बिरंगी चमकीली झालरों, रंगीन लाइटों व डिस्को लाइट से सजावट का काम पूरा हो चुका है। पुलिस के सहयोग के साथ ही मंदिर प्रशासन भी अपनी ओर से सेवादारों, सुरक्षा गार्डों आदि की ड्यूटी लगा चुका है। महिला और पुरुषों के दर्शन के लिए अलग-अलग लाइन से दर्शन कराए जाएंगे। मंदिरों में भजन, कीर्तन के साथ भंडारा व प्रसाद वितरण का आयोजन होगा। शहर के संदोहन देवी, छोटी कालीजी, नंदना 51 शक्तिपीठ, टड़ियन देवी समेत कई प्रमुख मंदिरों में विशेष पूजा अर्चना होगी।

इक्यावन शक्तिपीठ में नवरात्र उत्सव आज से:
आशीष सेवा यज्ञ न्यास व नवरात्र महोत्सव सेवा समिति की एक आवश्यक बैठक को नन्दना बीकेटी के इक्यावन शक्तिपीठ में सम्पन्न हुई। अध्यक्ष तृप्ती तिवार ने बताया कि नवरा़त्र महोत्सव का आयोजन 19 मार्च से 27 मार्च तक किया जायेगा। नवरात्र में प्रतिदिन अलग.अलग रंगों से श्रंगार व सजावट होगी। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन आचार्य के सानिध्य में पीण्डी पूजन होगा।

चौक में माता का दिव्य शृंगार:
चौक स्थित प्राचीन बड़ी काली जी मंदिर के पुजारी शक्तिदीन अवस्थी ने बताया कि मंदिर को लाइटों से सजाया जा रहा है। नवरात्र महोत्सव में मंदिर के कपाट भक्तों के लिए तड़के 4:30 से रात 12 बजे तक खुले रहेंगे। मंदिर में अलग.अलग दिन मातारानी का फल, मेवा, फूल आदि से भव्य श्रृंगार होगा। साथ ही भंडारे का प्रसाद वितरित होता रहेगा।

कालीवाड़ी में विशेष इंतजाम:

कैसरबाग घसियारी मंडी स्थित कालीवाड़ी मंदिर मैनेजिंग कमेटी के सभापति गौतम भट्टाचार्या ने बताया कि परिसर से करीब 200 मीटर तक पूरी गली को लाइट, झालर से सजाया जा रहा है। भक्तों के दर्शन, पूजन आदि के लिए मंदिर सुबह सात से दोपहर एक बजे और शाम चार से रात 10 बजे तक खुलेगा। दोपहर एक से शाम चार बजे तक मंदिर सफाई आदि के लिए बंद रहेगा।

बाजारों में श्रद्धालुओं ने दिनभर की खरीदारी
लखनऊ। चैत्र नवरात्र को लेकर बाजारों, घरों और मंदिरों में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। सभी देवी मंदिरों को भव्य तरीके से सजाया गया है। नौ दिनों तक श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए मंदिरों में विशेष प्रबंध किए गए हैं। देवी मां की पूजा-अर्चना को लेकर लोग जहां बाजारों में खरीदारी कर रहे हैं, वहीं बाजार भी नवरात्र से जुड़े सामान से सजे हैं। लखनऊ में चंद्रिका देवी मंदिर, चौक स्थित बड़ी काली जी मंदिर, लालबाग स्थित काली बाड़ी सहित अन्य देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ जुटने की संभावना के मद्देनजर पूरी तैयारियां की गई हैं।

फलाहार में खाने वाली सब्जियों के दाम आसमान पर:

फलाहार में खाने वाली सब्जियों के दाम नवरात्र शुरू होते ही आसमान पर पहुंच गए हैं। इन दिनों लौकी, कद्दू, परवल, भिंडी आदि सब्जियों के दाम में तेजी से इजाफा हुआ है। लौकी 40 रुपये, कद्दू 30 रुपये, परवल 120 रुपये व भिड़ी का दम 80 रुपये प्रति किलो पहुंच गया है। अभी हरी सब्जियों के दाम में और इजाफा होने की उम्मीद है।

आज होगी प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा

लखनऊ। नवरात्र का पहला दिन मां भगवती के प्रथम स्वरुप मां शैलपुत्री को समर्पित है। मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं इसलिए इन्हें पार्वती एवं हेमवती के नाम से भी जाना जाता है। मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, इनके दाहिने हाथ में त्रिशूल एवं बाएं हाथ में कमल पुष्प है। भक्तगण मां शैलपुत्री की आराधना कर मन वांछित फल प्राप्त करते हैं। मां दुर्गा को मातृ शक्ति यानी करूणा और ममता का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। अत: इनकी पूजा में सभी तीर्थों, नदियों, समुद्रों, नवग्रहों, दिग्पालों, दिशाओं, नगर देवता, ग्राम देवता सहित सभी योगिनियों आमंत्रित होती हैं। कलश स्थापना के समय इन सभी का आह्वाहन किया जाता है और विराजने के लिए प्रार्थना की जाती है। मां शैलपुत्री कि आराधना से मूलाधार चक्र जागृत होता है, यहीं से योग साधना का आरम्भ भी माना जाता है। कलश में सात प्रकार की मिट्टी, सुपारी और मुद्रा सादर भेट की जाती है। पांच पल्लवों से कलश को सुशोभित किया जाता है। इस कलश के नीचे सात प्रकार के अनाज और जौ बोये जाते हैं और दशमी तिथि को इन्हें काटा जाता है।

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