कुवैत। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुँच गया है, जहाँ ईरान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और शांति के दावों के उलट कुवैत पर एक बड़ा हमला कर दिया है। रविवार की सुबह ईरान ने कुवैत एयरपोर्ट को निशाना बनाते हुए वहाँ खड़े ईंधन टैंकरों पर कई घातक हमले किए। इस हमले ने न केवल कुवैत की सुरक्षा व्यवस्था को हिला कर रख दिया है, बल्कि पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादलों को और गहरा कर दिया है। कुवैत के गृह मंत्रालय ने इस हमले की पुष्टि करते हुए बेहद दुखद जानकारी साझा की है कि देश की रक्षा करते हुए उनके दो जांबाज अधिकारी शहीद हो गए हैं। इस खबर के बाद से पूरे कुवैत में शोक की लहर दौड़ गई है और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, शहीद होने वाले अधिकारियों की पहचान लेफ्टिनेंट कर्नल अब्दुल्ला इमाद अल-शर्राह और कैप्टन फहद अब्दुलअजीज अल-मजमौद के रूप में हुई है। ये दोनों अधिकारी गृह मंत्रालय के जनरल डिपार्टमेंट ऑफ लैंड बॉर्डर सिक्योरिटी में तैनात थे और अपनी ड्यूटी के प्रति बेहद समर्पित माने जाते थे। मंत्रालय ने बताया कि जिस समय ईरान ने एयरपोर्ट के ईंधन टैंकरों को निशाना बनाया, उस समय ये दोनों अधिकारी अपनी विशेष सुरक्षा जिम्मेदारियों को निभा रहे थे। मंत्रालय ने अपनी श्रद्धांजलि में कहा कि इन अधिकारियों ने मातृभूमि की सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया है, जिसे देश हमेशा याद रखेगा। कुवैती सुरक्षा बलों ने स्पष्ट किया है कि वे किसी भी स्थिति में अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
इस हमले की टाइमिंग ने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है, क्योंकि यह घटना ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान द्वारा खाड़ी देशों से मांगी गई माफी के ठीक एक दिन बाद हुई है। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह अमेरिकी ठिकानों पर किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद उपजे तनाव को कम करने के लिए राष्ट्रपति पेजेशकियान ने खेद जताया था। उन्होंने आश्वासन दिया था कि ईरान तब तक अपने पड़ोसी देशों को निशाना नहीं बनाएगा जब तक कि उस पर सीधा हमला न हो। हालांकि, उनके इस बयान का ईरान के भीतर ही कड़ा विरोध शुरू हो गया था। विशेष रूप से इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के शक्तिशाली अधिकारियों ने राष्ट्रपति के इस रुख को अव्यावहारिक और कमजोर बताया था।
आंतरिक दबाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति कार्यालय ने बाद में अपने बयान पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि क्षेत्रीय देशों को अमेरिका के खिलाफ ईरान का साथ देना होगा, अन्यथा उन्हें भी परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। रविवार को कुवैत पर हुआ यह हमला इसी बदली हुई नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो यह दर्शाता है कि ईरान अब किसी भी दबाव में पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस बीच, हिंसा की आग सात समुंदर पार अमेरिका तक भी पहुँच गई है। न्यूयॉर्क के मेयर ममदानी के आधिकारिक निवास ‘ग्रेसी मेंशन’ के बाहर एक संदिग्ध बमबारी की कोशिश की गई, जिसके बाद वहाँ प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़प हुई। पुलिस ने इस मामले में दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा चिंताओं में भारी इजाफा हुआ है।





