दो दिवसीय राज्य नाट्य समारोह के पहले दिन नाटक मांझी रे का मंचन किया गया
लखनऊ। योगी आदित्यनाथ की कला संवर्धन-संरक्षण की नीति के अनुपालन में एवं जयवीर सिंह की प्रेरणा व मार्गदर्शन में तथा प्रो जयंत खोत अध्यक्ष, श्रीमती विभा सिंह उपाध्यक्ष के कुशल निर्देशन में उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी, द्वारा इस साल भी भव्य दो दिवसीय राज्य नाट्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। एसएनए द्वारा बिहार के दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, के सहयोग से इसका आयोजन 24 और 25 मार्च को स्थानीय गोमती नगर स्थित संत गाडगे जी महाराज आॅडिटोरियम में किया गया है।
इसकी पहली संध्या पर एमओयू के अंतर्गत पंचम प्रकाश के लिखे नाटक मांझी रे का मंचन सागर सिंह के कुशल निर्देशन में किया गया। दरभंगा के कामेश्वर नगर स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, के संगीत एवं नाट्य विभाग की ओर से मंचित इस नाटक ने संदेश दिया गया कि मन के हारे हार है, मन के जीते जीत। सच्ची घटना पर आधारित इस नाटक के नायक, माउंटेन मैन नाम से मशहूर दशरथ मांझी ने विश्व को इंसानियत, अदम्य साहस, प्रेम, संघर्ष और दृढ़ निश्चय का संदेश दिया।
मांझी रे नाटक के नायक, बिहार के गया जिले के गहलौर गाँव में रहने वाले जुझारू दशरथ मांझी आ है, जो एक बेहद गरीब मजदूर होता है जो पत्थर तोड़ने का काम करता है। कहानी में एक दु:खद मोड़ तब आता है जब फगुनिया पहाड़ पार करते समय गिर जाती हैं और गंभीर रूप से घायल हो जाती हैं। अस्पताल दूर होने के कारण उन्हें समय पर इलाज नहीं मिल पाता और उनकी मृत्यु हो जाती है। यह घटना दशरथ मांझी के जीवन को पूरी तरह बदल देती है। ऐसे में दशरथ मांझी एक दृढ़ संकल्प लेते हैं कि वह इस पहाड़ को काटकर एक आम रास्ता बनाएंगे ताकि भविष्य में किसी और को ऐसी पीड़ा न सहनी पड़े। गाँव के लोग शुरू में उनके इस निर्णय का मजाक उड़ाते हैं और उन्हें पागल कहते हैं, लेकिन दशरथ मांझी अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटते हैं। नाटक में उनके संघर्ष को बहुत मार्मिक ढंग से दिखाया गया। कई वर्षों तक लगातार मेहनत करते हुए वह अकेले ही पहाड़ को काटकर रास्ता बनाते हैं। मंच पर दशरथ मांझी का केन्द्रीय किरदार रौशन कुमार दास, फल्गुनिया का प्राची कुमारी, दशरथ के पिता मंगरु का मोहन कुमार, मांझी के दोस्त जुगनू का मिथिलेश कुमार, जुगूनू की पत्नी चमेली का दिव्या कुमारी, जमीदार का अर्जुन कुमार राय, पत्रकार का चंदन कुमार, नटुओं का हुकुमदेव यादव, जमीदार के लठैत एक का नीरज कुमार पाण्डेय और दूसरे का विजय कुमार पासवान ने प्रभावी रूप से निभाया। पार्श्व संगीत में गायन के साथ-साथ हारमोनियम वादन का दायित्व शिवम मिश्रा, तबला वादन का धीरज मिश्रा, प्रकाश परिकल्पना का विक्रम कुमार ठाकुर, संगीत का राहुल कुमार राम, कोरस का अंकित कुमार, मंच सज्जा का चंदन कुमार, रूप सज्जा का नीरज कुमार पाण्डेय, वस्त्र विन्यास का हुकुमदेव यादव व मोहन कुमार और मिथिलेश कुमार ने सह निर्देशक का दायित्व बखूबी निभाकर नाटक के आकर्षण को बढ़ाया।





