लखनऊ। मकर संक्रांति हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आनंदमय पर्व है, जिसे नए वर्ष का पहला बड़ा त्योहार माना जाता है। यह केवल धार्मिक महत्व का त्योहार नहीं है, बल्कि सामाजिक और कृषि से भी जुड़ा हुआ उत्सव है। देश के विभिन्न हिस्सों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है जैसे बिहार और उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति या खिचड़ी पर्व, पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी, तमिलनाडु में पोंगल, और असम में माघ बिहू या भोगाली बिहू। इस दिन लोग सूर्य देव की पूजा करते हैं, तिल-गुड़ का सेवन करते हैं और अपने घरों और खेतों में खुशहाली की कामना करते हैं। साथ ही, मकर संक्रांति का त्योहार दान और पुण्य के अवसर के रूप में भी जाना जाता है। इस दिन स्नान-दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। पतंग बाजी, त्योहारी व्यंजन और पारिवारिक मेलजोल इस पर्व को और भी खास बनाते हैं। इस बार मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनायी जायेगी।
मकर संक्रांति का महत्व
मकर संक्रांति हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र पर्व माना जाता है। इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। मकर राशि शनि देव की मानी जाती है और शनि-सूर्य के संबंध को पिता-पुत्र के बीच शत्रुता के रूप में देखा गया है। मान्यता है कि इसी दिन सूर्य शनि के घर (मकर राशि) जाते हैं।
स्नान-दान का महत्व
इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करना और सूर्य देव को जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। साथ ही, तिल, गुड़, खिचड़ी, गर्म कपड़े, कंबल और अन्न दान का विशेष महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इन पुण्य कर्मों से व्यक्ति को पुण्य तो मिलता ही है, साथ ही पितृ तृप्ति भी होती है।
क्यों मनाई जाती है मकर संक्रांति?
मकर संक्रांति फसल के मौसम की शुरूआत का प्रतीक है और खगोलीय दृष्टि से यह शीत संक्रांति के अंत और लंबे दिन शुरू होने का संकेत देती है। ज्योतिष के अनुसार, इसी दिन सूर्य उत्तर गोलार्ध की ओर अपनी यात्रा प्रारंभ करते हैं, जिसे उत्तरायण कहा जाता है। कई राज्यों में यह दिन पतंग महोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है। मकर संक्रांति का उल्लेख महाभारत और पुराणों में भी मिलता है। महाभारत में बताया गया है कि भीष्म पितामह सूर्य के उत्तरायण होने की प्रतीक्षा में बाणों की शैया पर पड़े रहे और इसी काल में उन्होंने देह त्याग की। एक अन्य कथा के अनुसार, इसी दिन गंगा जी राजा भगीरथ के पीछे-पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में मिली थीं।
मकर संक्रांति की पूजा विधि
इस दिन गंगा नदी में पवित्र स्नान करना चाहिए। फिर सूर्य देव की विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए। सबसे पहले सूर्य देव को अर्घ्य दें। उनके नामों का जाप, चालीसा, कवच आदि का पाठ करें। फल, मिठाई घर पर बने तिल के लड्डू का भोग लगाएं। आरती से पूजा का समापन करें। खिचड़ी बनाएं, खाएं और उसका दान करें। गरीबों को गर्म कपड़े और जरूरत की चीजें दान दें। इस दिन गाय को हरा चारा खिलाना अत्यंत शुभ और लाभकारी माना जाता है। साथ ही इस दिन तामसिक चीजों से परहेज करें और पिता का अपमान भूलकर भी न करें।
मकर संक्रांति के दिन 4 राशियों को मिलेगा शनिदेव का आशीर्वाद

लखनऊ। वैदिक पंचांग के अनुसार, बुधवार 14 जनवरी को मकर संक्रांति है। यह पर्व आत्मा के कारक सूर्य देव के मकर राशि में गोचर करने के उपलक्ष्य पर मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर गंगा स्नान कर भक्ति भाव से सूर्य देव और देवी मां गंगा की पूजा की जाती है। धार्मिक मत है कि संक्रांति के दिन गंगा स्नान करने से व्यक्ति विशेष द्वारा जाने-अनजाने में किए गए पाप नष्ट हो जाते हैं। वहीं, सूर्य देव की कृपा से आरोग्य जीवन का वरदान मिलता है।
ज्योतिषियों की मानें तो मकर संक्रांति के दिन कई भाग्यशाली राशियों पर न्याय के देवता शनिदेव की कृपा विशेष बरसेगी। उनकी कृपा से हर मनोकामना पूरी होगी। साथ ही सभी प्रकार के कष्टों से मुक्ति मिलेगी।
मकर संक्रांति शुभ मुहूर्त
वैदिक पंचांग गणना अनुसार, बुधवार 14 जनवरी के दिन पुण्य काल दोपहर 03 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 45 मिनट तक है। इसके साथ ही महा पुण्य काल दोपहर 03 बजकर 13 मिनट से लेकर शाम 04 बजकर 57 मिनट तक है। तुला संक्रांति के दिन पुण्य क्षण दोपहर 03 बजकर 13 मिनट पर है। साधक 14 जनवरी के दिन सुविधा अनुसार समय पर स्नान-ध्यान कर सूर्य देव की उपासना कर सकते हैं। मकर संक्रांति के दिन मेष राशि के जातकों पर शनिदेव की कृपा बरसेगी। उनकी कृपा से आपके जीवन में परिवर्तन देखने को मिल सकता है। मन प्रसन्न रहेगा। आप निवेश के लिए सीक्रेट प्लानिंग कर सकते हैं। धर्म-कर्म और दान-पुण्य कर सकते हैं। कई कामों से आपको धन लाभ हो सकता है। आपको मधुरभाषी होना है। गुस्से पर कंट्रोल रखना है। जीवन में सफल होने के लिए परिश्रम करें। शनिदेव अवश्य ही आपको शुभ फल देंगे। मकर संक्रांति के दिन काले चीजों का दान करें।
तुला राशि
मकर संक्रांति के दिन तुला राशि के जातकों पर शनिदेव की कृपा बरसेगी। शनिदेव की मेहरबानी से आपको धन लाभ हो सकता है। यह लाभ ससुराल से मिल सकता है। भूमि-भवन मामलों में खुशखबरी मिल सकती है। नौकरी के लिए भी समय बेस्ट रहेगा। भाग्य का साथ मिलेगा। फ्यूचर की गणना आप करने में सफल होंगे। आलस का त्याग करें। घर पर मेहमानों का आगमन होगा। मकर संक्रांति के दिन कच्चे दूध या गंगाजल में काले तिल मिलाकर भगवान शिव का अभिषेक करें। इस उपाय को करने से सभी संकट दूर हो जाएंगे।
मकर एवं कुंभ राशि
मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव और आराध्य देवों के देव महादेव हैं। सूर्य देव के शनि की राशि मकर में गोचर से इन दोनों राशि के जातकों के जीवन में नया सवेरा होगा। मकर राशि के जातकों को सभी रुके या अधूरे काम बनेंगे। शनिदेव की मेहरबानी से जीवन में मंगल ही मंगल होगा।
मकर संक्रांति के दिन काले तिल और उड़द की दाल का दान करने से साधक को शनिदेव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होगा। उनकी कृपा से हर काम में सफलता मिलेगी। मकर संक्रांति के दिन काले कंबल, चमड़े के जूते-चप्पल, उड़द की दाल आदि चीजों का दान करें। साथ ही भगवान शिव की भक्ति भाव से पूजा करें।





