लखनऊ। हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास समाप्त हो गया है, लेकिन इसके बावजूद अभी शादी-विवाह और अन्य मांगलिक कार्यों के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा। दरअसल, खरमास खत्म होने के बाद भी कुछ समय तक शुभ योग और विवाह मुहूर्त नहीं बन रहे हैं, जिस वजह से लोग शादी की तारीख तय नहीं कर पा रहे हैं। खरमास के दौरान सूर्य धनु राशि में रहता है, इस समय शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के बाद खरमास तो समाप्त हो जाता है, लेकिन इसके बाद भी ग्रहों की स्थिति और तिथियों के कारण विवाह मुहूर्त सीमित रहते हैं।
क्यों करना होगा मांगलिक कार्यों के लिए इंतजार
ज्योतिष के अनुसार शादी जैसे मांगलिक कार्य तभी किए जाते हैं, जब पंचांग में शुभ तिथि, वार और योग बनते हों। आमतौर पर मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव उत्तरायण होते हैं और इसी के साथ खरमास खत्म माना जाता है। उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा जाता है, इसलिए इस समय को शुभ माना जाता है। लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है। इस साल 14 जनवरी 2026 को मकर संक्रांति तो है, लेकिन इसके बाद भी शादी-विवाह और दूसरे मांगलिक काम शुरू नहीं हो पाएंगे। इसकी वजह है शुक्र ग्रह का अस्त होना। ज्योतिष के अनुसार, शुक्र ग्रह 11 दिसंबर 2025 को अस्त हो गए थे। शुक्र को प्रेम, विवाह, दांपत्य सुख और वैवाहिक जीवन का कारक ग्रह माना जाता है। जब शुक्र अस्त रहते हैं, तब विवाह जैसे संस्कार शुभ फल नहीं देते। इसी कारण सूर्य के उत्तरायण होने के बावजूद मांगलिक कार्यों पर रोक बनी रहेगी।
विवाह मुहूर्त कब से शुरू होंगे?
शुक्र ग्रह करीब 53 दिन तक अस्त रहते हैं और 1 फरवरी 2026 को उदय होंगे। धार्मिक मान्यता के अनुसार, किसी भी ग्रह के उदय के तीन दिन बाद उसके शुभ प्रभाव पूरी तरह माने जाते हैं। ऐसे में 4 फरवरी 2026 से विवाह और अन्य शुभ कार्यों की शुरूआत मानी जाएगी।
2026 के विवाह शुभ मुहूर्त-
फरवरी-5, 6, 8, 10, 12, 14, 19, 20, 21, 24, 25, 26
मार्च-2,3, 4, 7, 8, 9, 11, 12
अप्रैल- 15, 20, 21, 25, 26, 27, 28, 29
मई- 1, 3, 5, 6, 7, 8, 13, 14
जून-21, 22, 23, 24, 25, 26, 27, 29
जुलाई- 1, 6, 7, 11, 12
अगस्त, सितंबर और अक्टूबर तीन महीनों में विवाह के लिए कोई शुभ मुहूर्त नहीं है
नवंबर-21, 24, 25, 26
दिसंबर-2, 3, 4, 5, 6
अबूझ मुहूर्त क्या होता है
ज्योतिष में कुछ खास दिनों को अबूझ मुहूर्त कहा जाता है। इन दिनों की खास बात यह होती है कि इन पर अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती। माना जाता है कि इन तिथियों पर ग्रह-नक्षत्र अपने आप शुभ स्थिति में होते हैं, इसलिए विवाह और अन्य मांगलिक कार्य बिना किसी रुकावट के किए जा सकते हैं। इन्हें सिद्ध मुहूर्त भी कहा जाता है।
2026 के अबूझ विवाह मुहूर्त
बसंत पंचमी: 23 जनवरी
फुलेरा दूज: 19 फरवरी
अक्षय तृतीया: 19 अप्रैल
देवउठनी एकादशी: 30 सितंबर
विजयादशमी (दशहरा): 20 अक्टूबर





