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कान्हा की छठी 22 को, मंदिरों व घरों में होगी विशेष पूजा

लखनऊ। भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया गया, अब उनकी छठी मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के 6 दिन बाद छठी मनाई जाती है, यही परंपरा श्रीकृष्ण के जन्म के 6 दिन बाद निभाई जाती है। जिसे बाल गोपाल की छठी या लड्डू गोपाल की छठी के नाम से जाना जाता है। भगवान कृष्ण की छठी घर के साथ मंदिरों में भी धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन लड्डू गोपाल को विधि-विधान से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं और उन्हें प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। जिन लोगों ने इस साल 15 अगस्त 2025 को कान्हा का व्रत रखते हुए उनका जन्मोत्सव मनाया है वे 21 अगस्त 2025 को और जिन्होंने उदया तिथि को आधार मानते हुए 16 अगस्त 2025 को जन्माष्टमी का पर्व मनाया था, वे लोग 22 अगस्त 2025 के दिन दोपहर या शाम के समय उनकी छठी मनाएंगे।

लड्डू गोपाल को छठी में किन चीजों का भोग लगाना चाहिए:
भगवान कृष्ण की छठी पर कढ़ी चावल का भोग अत्यंत शुभ माना गया है। इसके अलावा आप माखन, मिश्री व मालपुआ आदि का भोग लगा सकते हैं।

बाल गोपाल की छठी पर बन रहे खास संयोग:
इस बार लड्डू गोपाल की छठी पर सर्वार्थ सिद्धि योग का शुभ संयोग बन रहा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस योग में किए गए कार्य सफलतादायक होते हैं।

छठी पूजा का क्या है धार्मिक महत्व
पं. रामगणेश मिश्र के अनुसार सनातन परंपरा में छठी या फिर कहें षष्ठी देवी की पूजा का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है। मान्यता है कि छठी माता की पूजा करने पर नवजात शिशु तमाम तरह की आपदाओं से बचा रहता है. ऐसे में कान्हा के भक्त जन्मोत्सव के बाद इस पर्व का हर साल बड़ी धूम-धाम से मनाते हैं।

किस विधि से करें कान्हा की छठी पूजा
प्रत्येक व्यक्ति अपने लड्डू गोपाल की अपनी आस्था के अनुसार छठी पूजा का समय चुनता है। कोई यह पूजा दोपहर में तो कोई शाम के समय करता है। यदि आप दोपहर के समय कान्हा की छठी मना रहे हैं तो इसके लिए सुबह 11:58 से दोपहर 12:50 तक अभिजित मुहूर्त अत्यंत ही शुभ रहने वाला है. कान्हा की छठी पूजा करने से पहले आप तन-मन से पवित्र हो जाएं फिर उसके बाद पूजा की सभी सामग्री अपने पास रख लें। इसके बाद जिस तरह आम बच्चे की छठी मनाने से पहले उसका स्नान कराया जाता है, कुछ वैसे ही कान्हा को स्नान कराएं। भगवान श्री कृष्ण को पहले पंचामृत से फिर गंगाजल से स्नान कराएं और फिर उन्हें साफ कपड़े से पोंछने के बाद नए वस्त्र और आभूषण आदि से विशेष श्रृंगार करें, फिर इसके बाद अपने लड्डू गोपाल को चंदन, केसर, हल्दी, फल, फूल, धूप, दीप, अर्पित करें. कान्हा की छठी पूजा में उनकी प्रिय चीजें जैसे बांसुरी, मक्खन मिश्री, मोर पंख जरूर अर्पित करें. इसके बाद उनका नाम करण करने के लिए जिस नाम से उन्हें आप पूजते हों, वह नाम बुलाएं और पूरे साल उनकी उसी नाम से साधना करें. पूजा के अंत में उनकी आरती करें तथा सभी को प्रसाद बांटे और स्वयं भी ग्रहण करें।

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