लखनऊ। हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है। यहां हम बात करने जा रहे हैं कामदा एकादशी के बारे में, जो चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। मान्यता है इस दिन व्रत को श्रद्धा और नियम के साथ करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। वहीं ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन शिववास योग बन रहा है, जो साधना और मंत्र जप के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है। पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत 28 मार्च को सुबह 8 बजकर 46 मिनट पर होगी। वहीं एकादशी तिथि का समापन 29 मार्च को सुबह 7 बजकर 45 मिनट पर होगा। कामदा एकादशी का व्रत 29 मार्च 2026 को रखा जाएगा।
कामदा एकादशी व्रत 2026 शुभ मुहूर्त
कामदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त का आरंभ सुबह 5 बजकर 2 मिनट से सुबह 5 बजकर 47 मिनट तक रहेगा। वहीं अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से दोपहर 1 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। ये दोनों ही मुहूर्त कामदा एकादशी की पूजा के लिए उत्तम रहेगा। इन मुहूर्तों में आप पूजा- अर्चना कर सकते हैं।
कामदा एकादशी का महत्व
कामदा एकादशी का व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत प्रभावशाली माना गया है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। पुराणों के अनुसार, कामदा एकादशी का व्रत करने से न केवल इस जन्म के बल्कि पूर्व जन्म के पाप भी समाप्त होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
पूजा की विधि
पूजा के दिन सुबह जल्दी उठकर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. यदि संभव हो तो इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनें, इसे शुभ माना जाता है। इसके बाद पूजा घर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करें. फिर बैठकर हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद एक चौकी लें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें. उन्हें पीले फूल, फल, अक्षत और चंदन अर्पित करें. फिर धूप-बत्ती, अगरबत्ती और दीपक जलाएं। भगवान विष्णु को भोग लगाएं. तुलसी दल उन्हें अत्यंत प्रिय है, इसलिए भोग में इसे अवश्य शामिल करें. ध्यान रहे कि एकादशी के दिन तुलसी के पत्ते नहीं तोड़ने चाहिए, इन्हें एक दिन पहले ही तोड़कर रख लें. इसके बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें.
कामदा एकादशी की व्रत कथा पढ़ें या सुनें और अंत में विष्णु जी की आरती करें. शाम को दीपदान करें और अगले दिन पारण करें।





