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संतान की लंबी उम्र के लिए 14 को रखा जायेगा जितिया व्रत

लखनऊ। पितृपक्ष की अष्टमी तिथि को जितिया व्रत किया जाता है। अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अष्टमी तिथि यानि श्राद्ध पक्ष की अष्टमी तिथि को संतान की लंबी आयु के लिए माताएं व्रत रखती हैं। इस साल जितिया व्रत आश्विन कृष्ण पक्ष अष्टमी को यानी 14 सितंबर को मनाया जाएगा। इस दिन अष्टमी तिथि तड़के 03:06 बजे लगेगी। इस साल जितिया व्रत पर रोहिणी नक्षत्र है। जो सुबह 8:41 तक रहेगा, इसके बाद मृगशीर्षा नक्षत्र लग जाएगा। इस दिन सिद्धि योग और वज्र योग का भी संयोग बन रहे है। इस प्रकार यह व्रत बहुत ही फलदायी और पुण्यदायी माना जाएगा। इस व्रत को उत्तरप्रदेश, बिहार के कुछ जिलों, झारखंड में मनाया जाता है। ऐसा कहा जाता है कि इस व्रत को रखने से संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं और संतान को लंबी आयु मिलती है। विवाहित महिलाएं निर्जला व्रत रखकर श्रीकृष्ण की पूजा करती हैं और जीमूतवाहन की कथा का पाठ करती हैं।

जितिया व्रत शुभ योग
ज्योतिषियों की मानें तो अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर सिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इसके साथ ही रवि और शिववास योग का भी निर्माण हो रहा है। इन योग में जगत के नाथ भगवान कृष्ण की पूजा करने से व्रती की हर मनोकामना पूरी होगी।

शिववास योग
जितिया व्रत पर शिववास योग का संयोग दिन भर है। वहीं, शिववास योग का समापन 15 सितंबर को देर रात 03 बजकर 06 मिनट तक है। इस योग में व्रती जगत के पालनहार भगवान श्रीकृष्ण और शिवजी की पूजा करने से साधक को सभी प्रकार के सुखों की प्राप्ति होती है।

जितिया व्रत का महत्व
इस व्रत में राजा जीमूतवाहन की पूजा की जाती है, जिन्होंने नागवंश की रक्षा के लिए अपने प्राणों की भी परवाह नहीं की। इसके अलावा यह भी कहा जाता है कि इस कथा का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है। दरअसल अश्व्थामा ने उत्तरा की अजन्मी संतान को गर्भ में मारने के लिए ब्रह्मास्त्र का इस्तेमाल किया, भगवान कृष्ण ने अपने सभी पुण्यों का फल उत्तरा की अजन्मी संतान को देकर उसको गर्भ में ही पुन: जीवित किया। गर्भ में मरकर जीवित होने के कारण उसका नाम जीवित्पुत्रिका पड़ा और आगे जाकर यही राजा परीक्षित बना। जितिया व्रत विधि: जितिया व्रत में जीमूतवाहन और भगवान कृष्ण की पूजा का विधान है। इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि करके स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। व्रत का संकल्प लें। विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। इस व्रत में कथा पढ़ने या सुनने का विशेष महत्व है।

जितिया व्रत की पूजा विधि
व्रत के पहले दिन महिलाएं सुबह स्नान करके पूजा करती हैं और व्रत का संकल्प लेती हैं. इस दिन, व्रती महिलाएं सात्विक भोजन करती हैं। व्रत के दूसरे दिन, जिसे खुर जितिया कहते हैं, महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन व्रती महिलाएं कुछ भी खाती या पीती नहीं हैं. व्रत के तीसरे दिन, जिसे पारण कहते हैं, पूजा करने के बाद व्रती महिलाएं व्रत का पारण करती हैं. इस दिन पूजा के बाद व्रत खोला जाता है। पारण करने से पहले, व्रती महिलाएं जितिया के गीत गाती हैं और कथा सुनती हैं।

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