टीवी शो ‘कैसा ये प्यार है’ से हर घर में पहचाने जाने लगे
लखनऊ। साल 2003 में ‘फंटूश’ फिल्म से अपने करियर की शुरूआत करने वाले इकबाल खान टीवी शो ‘कैसा ये प्यार है’ से हर घर में पहचाने जाने लगे। इन दिनों वह अपने नए शो ‘हुई गुम…यादें-एक डॉक्टर दो जिंदगियां’ को लेकर चर्चा में हैं। इकाबाल खान ने वॉयस आॅफ लखनऊ से बातचीत में अपने इस नए सीरियल के अलावा अपने किरदार, करियर और बाकी चीजों के बारे में बात की। इकबाल खान ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने अब तक के करियर में क्या कुछ बदलाव देखे। साथ ही किरदारों के सिलेक्शन पर सोशल मीडिया के प्रभाव के बारे में भी बात की।
छोटे पर्दे पर आपका एक लंबा सफर रहा है, क्या आज करियर में कुछ बदलाव देखते हैं?
मेरी पहली फिल्म आई थी 2003 में ‘फंटूश’, वहां से मेरा करियर शुरू हुआ था। उसके बाद ‘कैसा ये प्यार है’ शो ने मुझे अंगद के रूप में हर घर में पहचान दी थी। बदलाव तो जीवन का नियम है। मुझे लगता है कि मैं पहले से बेहतर ही हुआ हूं। जिंदगी में इंसान सीखने के लिए ही आता है। मैंने भी बहुत सीखा है।
जब आपने करियर की शुरूआत की थी, उस समय सोशल मीडिया की भी शुरूआत हो रही थी। आपको क्या लगता है, सोशल मीडिया ने किरदारों और कंटेंट चुनने पर भी असर डाला है?
मेरी जिंदगी में सोशल मीडिया मुझे कंट्रोल नहीं करता, मैं उसे कंट्रोल करता हूं। दूसरा, बीच में एक ऐसा वक्त आया था, जब सोशल मीडिया को लेकर बहुत सारी चीजें हो रही थीं, कास्टिंग वगैरह भी उसको देखकर होने लगी थी, लेकिन वो बड़े लेवल पर नहीं होता है। मुझे लगता है कि प्रमोशन के लिए सोशल मीडिया बहुत बढ़िया है। लेकिन आपका प्रोडक्ट कितना बढ़िया से चल रहा है, वो आप सोशल मीडिया से पता नहीं कर सकते। चाहे आप फिल्म ले लें या टीवी शोज ले लें, इन सबके दर्शक अलग-अलग होते हैं। सोशल मीडिया पर पूरी दुनिया है, लेकिन पता नहीं आपके फॉलोअर्स क्या देखना पसंद करते हैं। क्या पता उनमें से कितने दर्शक टिकट खरीदकर फिल्म देखने जाते हैं।
आप पिता हैं तो कंटेंट चुनने को लेकर आपकी सोच में कितना बदलाव आया है?
क्या करना चाहिए क्या नहीं करना चाहिए, इस चुनाव को करने के लिए सब उतने खुशकिस्मत नहीं होते। मैं अपनी बात नहीं कर रहा। मैं इस मामले में कोई राय नहीं देना चाहता। बहुत सारे लोग कुछ भी काम कर रहे होते हैं, क्योंकि उन्हें अपना घर चलाना होता है, तो इस चीज में कुछ कहूंगा तो वो अच्छी बात नहीं लगेगी। ऊपर वाले ने मुझ पर बहुत रहम किया है, काम को लेकर मेरी जिंदगी में कभी कोई कमी नहीं रही। उतार-चढ़ाव जिंदगी का हिस्सा है, कोई ये नहीं कह सकता कि पिछले 23 साल में उसकी जिंदगी में मजे ही रहे हैं।
आप खाली वक्त में क्या कुछ करते हैं और उनकी प्लानिंग कैसे होती है?
एक परिवार वाला व्यक्ति क्या ही करेगा। जब बच्चे होते हैं तो उसे हर चीज उसे देखकर ही करनी होती है। मुझे अपने लिए कुछ खरीदने या करने का शौक नहीं है। ट्रैवलिंग के लिए 80 प्रतिशत प्लानिंग तो बीवी ही करती है, और उन्हें करनी भी चाहिए। अगर हमसे कोई गलती हो जाए तो गड़बड़ हो जाएगी। अगर बीवी करती है, तो गड़बड़ भी उसका ही माना जाएगा (
अपने नए शो में आप डॉक्टर बने हैं। क्या है इसके पीछे की कहानी?
ये एक ऐसे डॉक्टर की कहानी है, जिसकी पिछले 8 साल की यादें खो जाती हैं। उससे पहले वो क्या था और बाद में वो क्या बन जाता है, पहले लोगों के साथ वह कैसा था, अब वो लोगों के साथ कैसा है, बहुत सारी ऐसी चीजें हैं, जो इस शो में दिखाई जाएंगी। रिलेशनशिप इंसान की जिंदगी में बहुत जरूरी चीज होती है, इस शो में भी रिलेशनशिप काफी मायने रखती है। इसकी बीवी, बच्चों, डॉक्टर्स और मरीजों के साथ कैसा रिश्ता है वो इसमें दिखाया जाएगा।





