नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 की घोषणाओं को धरातल पर उतारने के लिए केंद्र सरकार ने ‘भारत के देखभाल परिस्थिति तंत्र को मजबूत करना’ विषय पर एक महत्वपूर्ण वेबिनार आयोजित किया। इस सत्र का मुख्य उद्देश्य 1.5 लाख बहुकुशल देखभाल करने वालों को प्रशिक्षित कर स्वास्थ्य सेवा और कल्याण के क्षेत्र में रोजगार के नए मार्ग प्रशस्त करना रहा। सरकार का लक्ष्य एक ऐसा संरचित और पेशेवर कार्यबल तैयार करना है, जो न केवल भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करे, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों पर भी खरा उतरे। इस पहल के माध्यम से देखभाल करने वालों के लिए मानकीकृत पाठ्यक्रम और बहु-कौशल मॉड्यूल विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने इस अवसर पर कहा कि ‘केयर इकोनॉमी’ भारत के लिए महज एक सेवा क्षेत्र नहीं, बल्कि सामाजिक प्राथमिकता और आर्थिक अवसर का एक अनूठा संगम है। उन्होंने विश्वास जताया कि 1.5 लाख लोगों को प्रशिक्षित करने की यह योजना एक ऐसा पेशेवर इकोसिस्टम तैयार करेगी, जिससे विशेष रूप से महिलाओं के लिए सम्मानजनक और सुरक्षित रोजगार के अवसर पैदा होंगे। मंत्री ने जोर देकर कहा कि जापान और इज़राइल जैसे देशों के साथ बढ़ती साझेदारी भारत को दुनिया की ‘कौशल राजधानी’ बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।
वेबिनार के दौरान कौशल विकास मंत्रालय की सचिव देबाश्री मुखर्जी ने पेशेवर प्रशिक्षण और मानकीकृत प्रमाणन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बजट की यह घोषणा देखभाल करने वालों को एक नई पहचान और गरिमा दिलाने का सुनहरा अवसर है। वहीं, वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार मनीषा सेन शर्मा ने स्पष्ट किया कि यह पूरी पहल वैश्विक स्तर पर प्रशिक्षित देखभाल पेशेवरों की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इस सत्र में यूनिसेफ, एशियाई विकास बैंक और अपोलो मेडस्किल्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया और भारत के इस महत्वाकांक्षी लक्ष्य को सफल बनाने के लिए अपने सुझाव साझा किए।





