नयी दिल्ली । सांख्यिकी सचिव सुमित गर्ग ने शुक्रवार को कहा कि भारत एक ऐसे मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रहा है जहां सरकार, परोपकारी संस्थाएं और निजी क्षेत्र मिलकर यह सुनिश्चित कर सकें कि किफायती कंप्यूटिंग क्षमताएं सभी के लिए सुलभ हों। गर्ग ने यहां आयोजित एआई इम्पैक्ट समिट में एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा,हमारा ध्यान कंप्यूटिंग क्षमता तक पहुंच को सीमित करने पर नहीं, बल्कि बुद्धिमानी से प्राथमिकता तय करने पर है। मेरा मानना है कि कंप्यूटिंग क्षमता को एक सक्षम मंच बनाने पर ही मुख्य ध्यान रहेगा।
उन्होंने कहा कि इसमें परोपकारी संगठनों की अहम भूमिका होगी, क्योंकि उनका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कृत्रिम मेधा (एआई) का लाभ सभी तक पहुंचे।गर्ग ने कहा, इस उद्देश्य के साथ सरकार, परोपकारी संस्थाएं और निजी क्षेत्र सहयोग कर सकते हैं ताकि सभी को किफायती कंप्यूटिंग क्षमताएं मिल सकें।
हम इसी तरह के मॉडल पर विचार कर रहे हैं और इससे भविष्य में प्रयोगों को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि एआई निश्चित रूप से दुनिया को बदल देगा, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह बदलाव न्यायसंगत, समावेशी और जनहित के अनुरूप होगा।सचिव ने कहा, निस्संदेह, कंप्यूटिंग क्षमता आज की सबसे बड़ी बाधा है। जीपीयू एक्सेलेरेटर तक पहुंच सभी एआई परिवेशों के लिए एक प्रमुख मुद्दा है, लेकिन सवाल यह है कि इसे कुछ ही क्षेत्रों में केंद्रित रखने के बजाय वैश्विक स्तर पर वितरण योज्ञ और किफायती किस तरह बनाया जाए? उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान नवाचार और इस पहलू को जनहित अवसंरचना के रूप में विकसित करने के तरीकों पर है। हालांकि, उन्होंने कहा कि केवल अवसंरचना ही पर्याप्त नहीं होगी।





