लखनऊ। मुकद्दस रमजान का पहला रोजा अल्लाह की इबादत में गुजरा। गुरुवार को रोजेदार खुदा की बंदगी में लगे रहे। पांच वक्त की नमाज के साथ कुरान की तिलावत की। महिलाओं ने घरों इफ्तार के इंतजाम के साथ इबादत में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। बच्चों ने भी अल्लाह का जिक्र किया और कुरान की तिलावत की।
सुबह करीब सवा चार बजे सहरी का वक्त खत्म हुआ, उससे पहले लोगों ने सहरी की सुन्नत अदा की। फज्र की नमाज के बाद घरों में कुरान की तिलावत का दौर शुरू हुआ। असर की नमाज के बाद रोजेदारों ने इफ्तार के लिए बाजार में फल, खजूर और मिठाइयां मगरिब में इफ्तार के बाद तरावीह की तैयारियों में जुट गए।
मस्जिदों में हुई नमाज:
रोजेदारों ने समूह में जाकर मस्जिदों में नमाज पढ़ी और परिवार के लिए दुआ मांगी। मस्जिदों में तरावीह की विशेष नमाज लोगों ने ही अदा की। रमजान में अल्लाह की रहमतों से सराबोर होने के लिये घरों में तरावीह की नमाज अदा की गई।
घरों में अदा की तरावीह :
रमजान का चांद देखने के साथ ही शहर की मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू हो जाती है, जो रमजान भर जारी रहती है। शहर की मस्जिदों में तरावीह नहीं पढ़ी गयी।
नौ वर्ष की आलिया खातून मंसूरी ने रखा पहला रोजा :
माहे रमजान के पहले दिन आलिया खातून मंसूरी (10 वर्ष )ने माहे मुबारक का पहला रोजा रखा। आलिया खातून मंसूरी मोहम्मद इलियास मंसूरी की बेटी है जो एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं,आलिया खातून मंसूरी अब्राहम पब्लिक कॉलेज लखनऊ की कक्षा 3 की छात्रा है।
रमजान शुरू होते ही पुराने लखनऊ के बाजारों में बिखरी रौनक
लखनऊ। रमजान पहला रोजा गुरुवार से शुरू हो चुका है। रमजान इबादत व बरकतों का महीना है। इस माह में मुसलमान रोजे रखते हैं व नमाज के साथ तिलावते कुरान-ए-पाक करके अल्लाह की इबादत करते है।
रमजान में जहां पुरुषों व बच्चों की इबादत से मस्जिदों में रौनक रहती है। वही महिलाएं अल्लाह की इबादत करके अपने घरों को रौशन करती है। इसके इफ्तार और सहरी के लिए रोजाना विभिन्न तरह के पकवान भी बनाती है। जिससे लोग रोजा खोलते है। रमजान के मौके पर पुराने शहर के अकबरी गेट, विक्टोरिया स्ट्रीट, कश्मीरी मोहल्ला, नक्खास, मौलवीगंज, वजीरगंज, गोलागंज आदि क्षेत्रों में लोगों की चहल कदमी बढ़ गई है। वहीं देर शाम तक बाजार गुलजार हो रहे है। विशेषकर अकबरी गेट पर लोग काफी दूर-दूर से रात में आकर कुल्चे-नहारी, बिरयानी, कश्मीरी चाय आदि का भरपूर मजा लेने पहुंच रहे हैं।
बाजारों में दिन में खूब हुई खरीदारी:
रमजान की तैयारियों को लेकर बाजारों में दिन में खूब खरीदारी हुई। खजूर, केला, सेब, अंगूर के साथ खीरा ककड़ी और गाजर खूब बिके। वही महिलाओं ने विभिन्न तरह के पापड़ खरीदने के साथ इफ्तारी के लिए बेसन आदि की खरीदारी की। इसके अलावा किनारे की दुकानों में भीड़ लगी रही। लोगों ने राशन भी खरीदा। शाम होते ही अकीदतमंद बाजार में निकल पड़े। उन्होंने दूधी, दही, चीनी, घी, खीरा, तरबूज, खरबूज, मौसीमी, नारंगी, नींबू, सेवई के अलावा किराना सामग्री की खरीदारी की। बाजार में खरीदारी को लेकर लोगों की भीड़ रही। घरों में महिलाएं पाक रमजान माह को लेकर किचेन की तैयारी में जुटी रहीं। किन चीजों की जरूरत है की सूची बनाई और बाजार जा रहे परिवार के सदस्यों को थमा दीं।
लच्छे हो रहें है तैयार :
रमजान को देखते हुए पुराने लखनऊ के मार्केट में कारीगरों द्वारा सेवई के लच्छे तैयार करना शुरू कर दिए हैं, क्योंकि रोजेदार सहरी में दूध-लच्छे खाना अधिक पसंद करते है। पुराने शहर के खदरा, हुसैनाबाद, अकबरी गेट, नक्खास, मौलवीगंज, काजमैन और कश्मीरी मोहल्ला आदि इलाके के बाजारों में लच्छे की दुकानें सज गई है। यह दुकानदार 160 से 200 रुपये किलो लच्छे बेच रहे हैं।
खजूरों की बढ़ गई डिमांड :
रमजान में खजूर की बड़ी अहमियत होती है। हर रोजेदार चाहता है कि वह बेहतर खजूर से अपना इफ्तार करे और दूसरों को भी कराए। ऐसे खजूर की मांग है, जो स्वादिष्ट व पौष्टिक हो। रोजेदारों की पसंद को देखते हुए खजूरों की एक से बढ़कर एक वैराइटी मार्केट में आ गई है। खाड़ी देशों समेत इराक व इरान आदि से आने वाले खजूरों की मांग सबसे ज्यादा है। इसमें अजवा खजूर की मांग रोजेदारों में सबसे ज्यादा है।
पुराने लखनऊ में देर रात कश्मीरी चाय का रोजेदार ले रहे स्वाद
रमजान को लेकर सजने लगे बाजार, खरीदारी शुरू
लखनऊ। रमजान को लेकर पुराने लखनऊ शहर के अकबरी गेट, विक्टोरिया स्ट्रीट, कश्मीरी मोहल्ला, नक्खास, मौलवीगंज, वजीरगंज, गोलागंज जैसे इलाकों में देर शाम तक बाजार गुलजार हो रहे हैं। खासकर अकबरी गेट पर लोग काफी दूर-दूर से रात में आकर कुल्चे-नहारी, बिरयानी, कश्मीरी चाय का मजा लेने पहुंच रहे हैं। रमजान को देखते हुए पुराने लखनऊ के बाजारों में कारीगरों ने सेवई के लच्छे तैयार करना शुरू कर दिए हैं। रोजेदार सहरी में दूध-लच्छे खाना अधिक पसंद करते हैं। पुराने शहर के खदरा, हुसैनाबाद, अकबरी गेट, नक्खास, मौलवीगंज, काजमैन और कश्मीरी मोहल्ला आदि इलाके के बाजारों में लच्छे की दुकानें सज गई हैं।
रमजान में खजूर की बड़ी अहमियत होती है। हर रोजेदार चाहता है कि वह बेहतर खजूर से अपना इफ्तार करे और दूसरों को भी कराए। ऐसे खजूर की मांग है जो स्वादिष्ट व पौष्टिक हो। रोजेदारों की पसंद को देखते हुए बड़े चमचमाते काले कलमी खजूर आ गए हैं। 120 से लेकर 2000 रुपए प्रति किलो तक बिक रहे हैं। ईरानी 125, कीमिया 300, रब्बी 320, फर्द 380, अम्बर 520, कूबा 1100, अजवा दो से तीन हजार रुपये और चटाई खजूर 100 रुपये किलो है।
लच्छे भी तैयार किये जा रहे हैं। रोजेदार सहरी में दूध. लच्छे खाते हैं। पुराने शहर के खदरा, हुसैनाबाद, अकबरी गेट, नखास, मौलवीगंज, दरगाह, पुल गुलाम हुसैन, नूरबाड़ी, काजमैन हैदरगंज, बजाजा टुरियागंज और कश्मीरी मोहल्ला इलाके के बाजारों में लच्छे की दुकानें सज गई है। दुकानदार 150 से 220 रुपये किलो लच्छे बेच रहे हैं।





