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आज देखा जायेगा माह-ए-रमजान का मुबारक चांद

लखनऊ। माह-ए-रमजान का चांद बुधवार को देखा जाएगा। चांद दिखने पर पहला रोजा 19 फरवरी को होगा नहीं तो 20 फरवरी को होगा। चांद दिखने के साथ ही सभी मस्जिदों में तरावीह की नमाज शुरू होगी।
रमजान में तरावीह नमाज का विशेष महत्व है। तरावीह में बीस रकात नमाज अदा की जाती है। सभी मस्जिदों में तरावीह की नमाज विशेष रूप से अदा की जाती है। ज्यादातर मस्जिदों के लिए हाफिज-ए-कुरआन तय हो चुके हैं। साथ ही इस्लामिक सेंटर आॅफ इंडिया से तमाम मस्जिदों में पारे और समय की घोषणा कर दी गई है। शहर की अधिकांश मस्जिदों में ईशा यानी रात की नमाज आठ बजे होगी। इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी ने कहा कि तरावीह की नमाज मर्द व औरत सबके लिए सुन्नत है। तरावीह की नमाज पूरे माह-ए-रमजान में पढ़नी है। रमजान में तरावीह नमाज के दौरान एक बार खत्मे कुरआन करना सुन्नत है। दो बार खत्म करना अफजल हैं। तीन बार कुरआन मुकम्मल करना फजीलत माना गया है। ऐशबाग ईदगाह में औरतों की तरावीह की नमाज के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।

चांद देखने की अपील: मरकजी चांद कमेटी फरंगी महल के सदर एवं इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने तमाम मुसलमानों से अपील की कि वह 28 फरवरी रमजानुल मुबारक के चांद देखने का एहतिमाम करें। चांद देख कर कमेटी के अध्यक्ष को गवाही दें या इस सिलसिले में 9415023970 9335929670, 9415102947, 9839313602, 9889911119 9839132548 7376952721, 9140427677 इन नम्बरों पर सूचना दें। मरकजी शिया चांद कमेटी अध्यक्ष मौलाना सैय्यद सैफ अब्बास नकवी ने लोगों से अपील की है कि 18 फरवरी को रमजान का चांद देखनें की कोशिश करें। अगर चांद दिखाई देता है तो इन नम्बरों पर 9839097407, 9415784680, 9651623004, 7905912573, 9621168661,9415580936 बताएं।

चांद 18 की शाम को दिखने पर पहला रोजा 19 को रखा जाएगा

लखनऊ। मुस्लिम और गैर-मुस्लिम दोनों ही रमजान को इस्लामी कैलेंडर का सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण महीना मानते हैं। यह महीना रोजा रखने, आत्मचिंतन करने और अल्लाह की इबादत में खुद को समर्पित करने का होता है। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है, जिसकी शुरूआत चांद दिखने पर होती है। रोजा रखने का उद्देश्य केवल भूखा रहना नहीं, बल्कि नफ्स यानी इच्छाओं पर काबू, बुरी बातों से दूरी और सकारात्मक सोच को अपनाना है। साल 2026 में रमजान फरवरी महीने में शुरू होने की संभावना है, जिससे रोजेदारों को मौसम की वजह से रोजा रखने में सहूलियत मिल सकती है। आइए जानते हैं कि इस साल रमजान कब से शुरू होने वाला है। मुस्लिम एड वेबसाइट संस्था के अनुसार, माह-ए-रमजान 2026 की शुरूआत 19 या 20 फरवरी से हो सकती है। हालांकि, इसकी अंतिम पुष्टि चांद दिखने पर ही होगी। रमजान का महीना 29 या 30 दिनों का होता है। चांद 18 फरवरी की शाम को दिखने पर पहला रोजा 19 फरवरी को रखा जाएगा। अगर चांद नहीं दिखा, तो रोजा 20 फरवरी से शुरू होगा।

रमजान 2026 की मुख्य तारीखें
रमजान 2026 की शुरूआत- 19 या 20 फरवरी
रमजान कितने दिन का होगा- 29 या 30 दिन
रमजान खत्म होने की तारीख- लगभग 20 मार्च
लैलात अल-कद्र 2026- 27वां रमजान (संभावित तारीख 17 मार्च)
ईद-उल-फितर 2026: 20 या 21 मार्च के आसपास

लैलात अल-कद्र का महत्व
लैलात अल-कद्र रमजान की आखिरी 10 रातों की विषम रातों में से एक होती है। इस रात को हजार महीनों से बेहतर बताया गया है। कई हदीसों के अनुसार, 27वीं रात को लैलात अल-कद्र माना जाता है। इस रात में इबादत, दुआ, दान और नेक काम का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।

ईद-उल-फितर कब और क्यों मनाई जाती है?
ईद-उल-फितर रमजान के महीने के खत्म होने के बाद मनाई जाती है। इसे रोजा खोलने का त्योहार भी कहा जाता है। 30 रोजे पूरे होने के बाद शव्वाल महीने के पहले दिन ईद मनाई जाती है। लोग इस दिन एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हैं। रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ समय बिताते हैं और बच्चों को ईदी देते हैं। ईद-उल-फितर अल्लाह के प्रति आभार का प्रतीक है। यह पर्व त्याग और भाईचारे का संदेश देती है।

जकात-उल-फितर क्या है?
रमजान के अंत में और ईद की नमाज से पहले जकात-उल-फितर देना अनिवार्य होता है। यह आमतौर पर गेहूं, चावल या अन्य खाद्य सामग्री के रूप में दी जाती है।

जकात-उल-फितर का उद्देश्य
गरीब और जरूरतमंदों को ईद की खुशियों में शामिल करना। समाज में बराबरी और सहयोग की भावना बढ़ाना। इसे रमजान के आखिरी दिनों में या लैलात अल-कद्र के दिन देना अधिक सवाब का काम माना जाता है।

रमजान की तारीख हर साल क्यों बदलती है?
रमजान की शुरूआत इस्लामी चंद्र कैलेंडर पर आधारित होती है। जैसे ही शाबान महीने के अंत में नया चांद दिखता है, अगले दिन से रमजान शुरू हो जाता है। अगर चांद न दिखे, तो शाबान के 30 दिन पूरे किए जाते हैं। इसी कारण रमजान हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर में 10-11 दिन पहले आ जाता है। अलग-अलग देशों में चांद दिखने के समय में फर्क होने से तारीखें अलग हो सकती हैं।

औरतों की नमाज के लिए विशेष इंतजाम
इस्लामिक सेन्टर आफ इण्डिया फरंगी महल में माहे रमजान के इस्तकबाल के विषय पर बैठक हुई। अध्यक्षता सेन्टर के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने की। मौलाना ने बताया कि जामा मस्जिद ईदगाह लखनऊ में तरावीह में पांच पारे होंगे। इशा की जमाअत का समय शाम 7: 45 बजे है। औरतों के लिए भी जमाअत के साथ नमाज अदा करने का अलग इंतजाम किया गया है। मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि रमजान का महीना बहुत बरकत वाला है। इसकी फजीलत अनगिनत हैं। उन्होंने कहा कि हदीस शरीफ में हजरत अबू हुरैरा से रिवायत है कि रसूल पाक ने फरमाया है कि रोजा दोजख से बचने के लिए एक ढाल है। इस लिए राजेदार न बेकार बात करें और न जिहालत की बातें और अगर कोई शख्स उससे लड़े या उसे गाली दे तो इसका जवाब सिर्फ यह होना चाहिए कि मैं रोजेदार हूं। यह शब्द दो बार कह दे। मौलाना ने कहा कि रमजान का महीना हमदर्दी, गमख्वारी और सहायता करने का महीना है। बैठक में मौलाना मौलाना नईमुर्रहमान सिद्दीकी, मौलाना मुशताक नदवी और मौलाना अब्दुल लतीफ नदवी व अन्य शामिल रहे।

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