लखनऊ। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, आषाढ़ माह चौथा महीना होता है। इस महीने की आखिरी में गुरु पूर्णिमा का पर्व बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस शुभ अवसर पर पवित्र नदी में स्नान और दान करने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूर्णिमा के दिन पवित्र नदी में स्नान और दान करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही सभी तरह के दुख और संकट से छुटकारा मिलता है।
यह दिन गुरु शिष्य के पवित्र संबंध को दशार्ने का काम करता है। इस दिन लोग अपने गुरु को ज्ञान और मार्गदर्शन के लिए उनका सम्मान करते हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि की शुरूआत 10 जुलाई को रात 01 बजकर 36 मिनट से होगी और अगले दिन यानी 11 जुलाई रात को 02 बजकर 06 मिनट पर तिथि खत्म होगी। इस प्रकार से 10 जुलाई को गुरु पूर्णिमा का पर्व मनाया जाएगा।
गुरु पूर्णिमा का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि पर भगवान वेद व्यास का जन्म हुआ था। इसलिए इस तिथि पर गुरु पूर्णिमा के पर्व को मनाया जाता है। वेद व्यास ने कई वेदों और पुराणों की रचना की थी। इस खास अवसर पर भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और वेद व्यास जी की पूजा-अर्चना करने का खास महत्व है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, गुरु पूर्णिमा का विधिपूर्वक व्रत करने से जीवन खुशहाल होता है। साथ ही साधक पर प्रभु की कृपा बनी रहती है।
गुरु पूर्णिमा पर बृहस्पति को मजबूत करने के लिए विशेष उपाय
जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति कमजोर हों, तो उन्हें इस दिन विशेष उपाय करने चाहिए। इस दिन जो लोग व्रत रखते हैं, उनकी कुंडली में गुरु मजबूत होते हैं। इसलिए इस दिन पीली चीजों का दान, जैसे चने की दाल, बेसन के लड्डू, पीले कपड़े, हल्दी, पीले वस्त्र, पीतल के बर्तन, केला, केसर आदि का दान किसी गरीब व्यक्ति को करना चाहिए। इससे आपकी कुंडली में गुरु मजबूत होते हैं। बृहस्पति ग्रह के उपाय के साथ ही आपको गुरु पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा भी करनी चाहिए। भगवान को पीले वस्त्र पहनाएं और पीले फूल अर्पित करना चाहिए। कहते हैं, इन उपायों को करने से संतान, विवाह, धन आदि की स्थिति में सुधार होता है।
गुरु पूर्णिमा पूजा विधि
सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करके आप अपने गुरु की तस्वीर या मूर्ति को सजाकर उनकी पूजा कर सकते हैं। पूजा के लिए जरूरी सामग्री जैसे कि फूल, धूप, दीप, नैवेद्य, और पवित्र जल इकट्ठा कर लीजिए। गुरु का आवाहन करें और उनकी उपस्थिति का अनुभव करें। गुरु को पवित्र जल चढ़ाएं और उनकी पूजा करिए। गुरु को फूल चढ़ाएं और उनकी सुंदरता का वर्णन करिए.वहीं, धूप और दीप जलाएं और गुरु की आरती करिए। अब गुरु को नैवेद्य चढ़ाएं और उनकी कृपा का अनुभव करिए। आप इस दौरान गुरु मंत्रों का जाप करें और उनकी महिमा का वर्णन करिए।
शहर में जगह-जगह होंगे विविध कार्यक्रम
लखनऊ। गुरु पूर्णिमा पर शहर में विविध आयोजन किये जायेंगे। मनकामेश्वर मठ मंदिर पर गुरु पूर्णिमा के अवसर पर मठ के महंत रहे पूज्य गुरुओं का पंच द्रव्यों से अभिषेक किया जाएगा। इस अनुष्ठान में महंत देव्यागिरि मठ के पूर्व महंत को रोली, चंदन अक्षत से तिलक कर पूजन करेंगी। वहीं मठ से दीक्षा लिए भक्त भी गुरु का पूजन कर आशीर्वाद लेने आएंगे। शाम को मनकामेश्वर घाट पर गुरु की स्मृति में आरती होगी। लखनऊ विश्वविद्यालय मार्ग स्थित हनुमान सेतु मंदिर में गुरु पूर्णिमा के एक दिन पूर्व रामायण का पाठ शुरू होगा। गुरु पूर्णिमा के दिन गुरुजन, मंदिर के पुजारी और गुरुकुल के अंतिम वर्ष के छात्र बजरंगबली और बाबा नीम करोरी महाराज का अभिषेक करेंगे।
पर्व को लेकर शहर में तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं। इस अवसर पर शहर में जगह-जगह शिष्य गुरु की पादुका पूजन करेंगे। साथ ही आशीर्वाद लेंगे। हर साल आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा त्योहार मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को आषाढ़ पूर्णिमा भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन वेद व्यास जी का जन्म हुआ था, यही कारण है कि इस दिन को वेद व्यास जी की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा के दिन पूजा और व्रत करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा इस दिन गुरुओं की पूजा भी की जाती है।





