40 भक्तों की टोली खाटू धाम यात्रा के लिए जा रही
लखनऊ। श्री श्याम ज्योत मंडल की ओर से ऐशबाग के तिलकनगर स्थित महाराजा अग्रसेन पार्क में चल रहे तीन दिवसीय 44वें श्री श्याम निशानोत्सव का समापन हर्षोल्लास से संपन्न हुआ। 23 फरवरी सोमवार को तिलकनगर से 40 श्याम प्रेमी का बस से सीकर खाटू श्याम धाम यात्रा के लिए रवाना किया गए। मीडिया प्रभारी अनुपम मित्तल ने बताया कि इस बार 40 भक्तों की टोली खाटू धाम यात्रा के लिए जा रही है। मनीष, बच्चू, ज्योति, महेंद्र को पहली बार खाटू धाम यात्रा में जा रहे हैं। अनुराग बालामऊ, महावीर सीए, आलोक अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, श्रवण अग्रवाल, राजरानी अग्रवाल, सुनील गुड्डु डालीगंज, महेंद्र मुंशीपुलिया, बच्चू, मनीष गुप्ता, राजू बाजपेयी, रितेश अवस्थी, शुभम अग्रवाल, मुकेश कंछल, ज्योति यादव, अमित कंछल, अमित अग्रवाल एवं सैकड़ो भक्त खाटू धाम यात्रा में गए हुए थे। श्याम प्रेमी की टोली दूसरे दिन मंगलवार को राजस्थान के सीकर स्थित श्री श्याम कुंज, लखनऊ वालों की धर्मशाला पहुंचेगे।मण्डल के सैकड़ो भक्त जिसमें सुरेश कंचल, जितेन्द्र, अशोक, मुकेश, अनुपम आदि धर्मशाला से लाल ध्वजा हनुमान जी का एवं पीताम्बर ध्वजा ध्वजावाहक लहराते हुए 17 किलोमीटर की पैदल यात्रा राजस्थान के रिंगस स्थित बाबा खाटू नरेश मंदिर के लिए निकलेगें। सैकड़ो श्याम भक्तों का समूह गाजे बाजे के साथ, श्याम निशान लहराते हुए पैदल यात्रा में जयश्री श्याम, हारे का सहारा, शीश का दानी, कलयुग के अवतारी की जय हो जयकारे एवं भक्तिमय भजनों के बीच आस्था और श्रद्धा के साथ बाबा श्याम को निशान अर्पित करते है। श्याम भक्तों की टोली मनोकामना पूर्ण एवं सुख समृद्धि की बाबा श्याम से मंगल कामना करते हैं। खाटू धाम यात्रा में बहुत से श्याम भक्त पहली बार मंडल समिति के संग बाबा श्याम को निशान चढ़ाने का सौभाग्य और आशीर्वाद प्राप्त हुआ। श्याम प्रेमी श्रवण अग्रवाल ने बताया कि राजस्थान के सीकर जिले में खाटू श्याम का विश्व विख्यात मंदिर है। यहां भगवान श्रीकृष्ण के साथ पांडव भीम के पुत्र बर्बरीक (खाटू नरेश) की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बर्बरीक को खाटू श्याम नाम से जाना जाता है। महाभारत काल से बाबा श्याम का संबंध है। बर्बरीक के अंदर अपार शक्ति और क्षमता थी, जिससे प्रभावित होकर श्रीकृष्ण ने उन्हें कलियुग में अपने नाम से पूजे जाने का आशीर्वाद दिया था। धर्म ध्वज विजय का प्रतीक है। श्याम निशान बाबा श्याम द्वारा दिया गया बलिदान और दान का प्रतीक माना गया है। भगवान कृष्ण के कहने पर धर्म की जीत के लिए अपना शीश समर्पित कर दिया था और युद्ध की जीत का श्रेय श्रीकृष्ण को दिया था। श्याम निशान केसरिया, नारंगी और लाल रंग का होता है। श्रीकृष्ण और बाबा श्याम के मुकुट में मोर पंख होते हैं। खाटू में श्याम का मस्तक और रींगस में शीश स्वरूप की पूजा की जाती है। इसी कहा गया है कि फाल्गुन शुक्ल द्वादशी उत्सव भारी होय, बाबा के दरबार से खाली जाय ना कोय। हर साल फाल्गुन मास शुक्ल पक्ष में यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें देश-विदेश से करोड़ो श्याम भक्त पहुंचकर बाबा श्याम का दर्शन एवं पूजन अर्चन करते हैं।





