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फ्लैग-यूपी में बनेगी खिलौना उद्योग नीति, मंत्रिमंडल में जल्द रखा जायेगा प्रस्ताव

  • तीन लाख लोगों को मिलेगा रोजगार

  • परंपरागत उद्योगों को मिलेगी नयी जान

  • पांच साल में 20 हजार करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य

  • जल्द मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जायेगा फैसला

  • 200 करोड़ का निवेश व 1000 से अधिक रोजगार देने पर मिलेंगी अतिरिक्त रियायतें

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्वदेशी खिलौना उत्पादन का हब बनाने का खाका तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दिशा में तेजी से कार्य करने के निर्देश दिये हैं। सरकार इसके लिए खिलौना उद्योग नीति लायेगा और इससे संबंधित प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट की बैठक में रखा जायेगा।

खिलौने के इस कारोबार से जहां सूबे के तीन लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं परंपरागत रूप से खिलौना बनाने वालों को नयी जान मिलेगी। इस उद्योग के तहत अगले पांच सालों में 20 हजार करोड़ रुपये तक निवेश का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमं ाी ने गुरुवार को एक ट्वीट कर यह जानकारी दी।

नयी खिलौना नीति का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी भारतीय खिलौना उद्योग को विकसित करने पर विशेष बल दिया था। उस वक्त भी योगी ने कहा था कि यूपी में भी इसी तरह की नीति बनाने पर कार्य चल रहा है।

चीनी खिलौनों की विदाई की योजना के तहत ही ग्रेटर नोएडा में एक ट्वॉय क्लस्टर भी बनने जा रहा है। ये देश का पहला ऐसा ट्वॉय क्लस्टर होगा, जहां बड़े पैमाने पर ट्वॉय इंडस्ट्रीज एक साथ लगायी जायेंगी और इस ट्वाय सिटी को अंतर्राष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जायेगा। छह सौ करोड़ की लागत से बन रही इस ट्वॉय सिटी से करीब 15 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा।

इसमें पांच हजार लोगों को तो प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा। खास बात यह है कि यमुना इंडस्ट्रियल अथॉरिटी के नियमानुसार, ट्वॉय सिटी की हर इंडस्ट्री को 40 प्रतिशत स्थानीय कर्मचारी रखने होंगे। अथॉरिटी ने ट्वॉय सिटी के लिए 100 एकड़ भूमि आवंटित की है।

इसके 50 एकड़ में 80 खिलौना फैक्ट्रियां और सामूहिक उपयोगिता की सुविधाएं होंगी। बाकी 50 एकड़ भूमि को ट्वॉय सिटी के विस्तार के लिए छोड़ा जायेगा। अगले छह महीने में इंफ्रास्ट्रक्चर का काम हो जायेगा। उसके बाद डेढ़ साल में वहां ट्वॉय उद्योगों का विकास होगा।

गौरतलब है कि इस वक्त काफी तादाद में खिलौनों का आयात विदेशों से किया जाता रहा है। जिसमें चीनी खिलौनों की तादाद भी काफी संख्या में थी। बताया जाता है कि देश में करीब 90 प्रतिशत खिलौने चीन और ताइवान से आते हैं। वैश्विक कारोबार में भी भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 5 प्रतिशत है। पिछले कुछ महीनो में चीन से आयत होने वाले चीनी खिलौनों की डिमांड में कमी आयी है।

बच्चों में बढ़ते खिलौनों के के्रज को देखते हुए यूपी सरकार ने फैसला लिया है कि यूपी में खिलौनों का ऐसा हब बनाया जाये जिससे इसका सीधा फायदा प्रदेश को मिल सकें। सरकार ने इस नीति को काफी सहज और सरल बनाने का फैसला लिया है जिससे खिलौना उद्योग में निवेश करने वालों को किसी प्रकार की कोई परेशानी न हो।

इस योजना के तहत निवेश करने वाले देसी और विदेशी निवेशकों को पूंजी, ब्याज, जमीन की खरीद और स्टाम्प ड्यूटी, पेटेंट, बिजली परिवहन समेत अन्य सुविधाएं सब्सिडी के साथ दी जायेंगी।

इसके अलावा कई और रियायतें भी इस योजना में देने का प्रावधान किया जायेगा। अगर निवेशक महिला या अर्धसैनिक बलों से जुड़े हों तो अतिरिक्त रियायतें भी दी जायेंगी। इसके अलावा देशी या विदेशी कंपनियों द्वारा 200 करोड़ का निवेश व 1000 से अधिक के रोजगार देने पर अतिरिक्त रियायतें दी जायेंगी।

प्रदेश में खिलौना इंडस्ट्री को बढ़ावा देने से सबसे ज्यादा लाभ उन जिÞलों को होगा जो अभी उद्योगों की दृष्टि से पिछड़े हुए है। इसमें चित्रकूट, गोरखपुर, आजमगढ़ जैसे जिले शामिल है।

झांसी के अलावा चित्रकूट में लकड़ी, गोरखपुर में टेराकोटा और आजमगढ़ में ब्लैक पॉटरी से खिलौने बनाने का काम बड़े पैमाने पर किया जाता है। आईएमआरसी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में खिलौना उद्योग का सालाना कारोबार करीब 10 हजार करोड़ रुपये का है। इसमें संगठित क्षेत्र की हिस्सदोरी 35 से 45 फीसदी है।

असंगिठत क्षेत्र में भी 12 से 15 फीसदी हिस्सेदारी घरेलू इकाइयों की है। झांसी के सॉफ्ट खिलौनों को जनवरी 2018 में ही सरकार ने अपनी फ्लैगशिप योजना ओडी-ओपी में शामिल कर इसकी बेहतरी के लिए काम करना शुरू कर दिया था। इसके लिए डेली स्टेटस रिपोर्ट भी तैयार करवायी जा चुकी है।

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