भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय में सीनियर सिटीजन के लिए खुले द्वार
लखनऊ। भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय नए शैक्षणिक सत्र के लिए ही जल्दी आवेदन शुरू होने वाले हैं। नए शैक्षणिक सत्र से सीनियर सिटीजन (बुजुर्गों) के लिए संगीत की शिक्षा के दरवाजे खुले हैं। अब उम्र की कोई बाधा नहीं रहेगी और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोग भी डिप्लोमा कोर्स में नामांकन कर भारतीय शास्त्रीय संगीत सीख सकेंगे। विश्वविद्यालय की ओर से दावा किया गया है कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए संगीत में डिप्लोमा देने वाला भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय देश का पहला विश्वविद्यालय है। विश्वविद्यालय में सीनियर सिटीजन अपनी रुचि के अनुसार कोर्स में दाखिला ले सकेंगे। वोकल ट्रेनिंग, तबला, हारमोनियम, सरोद और बांसुरी समेत विभिन्न कोर्स में प्रवेश ले सकते हैं। इन डिप्लोमा कोर्सेज की अवधि 1 से 2 वर्ष तक होगी। जहां पाठ्यक्रम में भारतीय शास्त्रीय संगीत की बुनियादी से लेकर उन्नत तकनीकें शामिल हैं। ये कोर्स मुख्य रूप से अंशकालिक या विशेष रूप से बुजुर्गों के लिए अनुकूलित है। कोर्स में प्रवेश से पूर्व वरिष्ठ नागरिकों को विश्वविद्यालय की अभिरुचि कार्यशाला में प्रवेश का मौका मिलेगा। जहां बुजुर्ग अभ्यर्थियों को सीखने की रुचि के आधार पर डिप्लोमा कोर्स में प्रवेश मिलेगा। इन कोर्स में ले सकते हैं प्रवेश वोकल (गायन) – तबला (वादन), हारमोनियम/सिंथेसाइजर, सरोद, बांसुरी, ध्रुपद-धमार, ठुमरी-दादरा, सुगम संगीत, लोक संगीत और ढोलक । प्रो. माण्डवी सिंह, कुलपति, भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्यालय ने बताया कि सीनियर सिटीजन के लिए संभवत: भातखण्डे पहला विश्वविद्यालय है जो संगीत में डिप्लोमा देगा। रिटायर के बाद या उर्म्र के किसी भी पड़ाव में यदि व्यक्ति को संगीत में रुचि है तो वह विश्वविद्यालय से संगीत सीख सकता है।





