दर्शकों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित करता
लखनऊ। उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग एवं रंगनाद के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित नाट्य गतिविधियों के अंतर्गत माध्यमिक विद्यालय इंटर कॉलेज प्रेक्षागृह तोपखाना बाजार कैंटोनमेंट लखनऊ में पर्यावरण विषयक नाटक चिमनी-चोगा का सफल मंचन किया गया। यह नाटक प्रकृति और औद्योगिक विकास के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए दर्शकों को गहन चिंतन के लिए प्रेरित करता है।
नाटक का कथानक पंचतत्व—अग्नि, वायु, जल, आकाश और पृथ्वी—पर आधारित है, जिनके माध्यम से आधुनिक समय में बढ़ते प्रदूषण और उसके दुष्परिणामों को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया। चिमनी औद्योगिक विकास की अंधी दौड़ और प्रदूषण का प्रतीक बनी, वहीं चोगा ने प्रकृति की सहनशीलता और संरक्षणकारी शक्ति को अभिव्यक्त किया। नाटक ने यह प्रश्न उठाया कि क्या मानव अपने ही अस्तित्व को खतरे में डाल रहा है?
मंच पर मानवी की भूमिका में आद्या मिश्रा, पापा के रूप में लोकेश पांडे, के.पी./गांव वाली की भूमिका में शालू तिवारी, मानव/गांव वाले के रूप में अभिषेक त्रिपाठी, जमादार की भूमिका में रवि सिन्हा तथा अन्य पात्रों में अंकित देव मिश्रा और भूमिका गुप्ता ने सशक्त अभिनय प्रस्तुत किया।
मंच सज्जा में आकाश दयाल, मंच सामग्री में भूमिका गुप्ता व अंकित मिश्रा, वेशभूषा में शिल्पी दुबे, संगीत संयोजन व संचालन में राहुल शर्मा, मुख सज्जा में भावना गुप्ता तथा प्रकाश संचालन में देवाशीष मिश्र का विशेष योगदान रहा। मंच संचालन के.डी. तिवारी ने किया। पोस्टर निर्माण आद्या मिश्रा, ब्रोशर रवि सिन्हा तथा वीडियो व फोटोग्राफी का कार्य हेरी तिवारी द्वारा किया गया।





