हनुमान सेतु मंदिर में भागवत कथा का तृतीय दिवस
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के प्रतिष्ठित श्री बाबा नीब करौरी जी महाराज आश्रम (हनुमान सेतु मंदिर) में आयोजित सात दिवसीय “श्रीमद्भागवत ज्ञान कथा सत्र” के तीसरे दिन आज भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कथा व्यास, अत्यंत निस्पृह एवं वेद-वेदांग पारंगत वेद पंडित विजय कृष्ण भागवत जी ने अपनी ओजस्वी वाणी से भगवान के विभिन्न अवतारों और भक्तों के चरित्र का सुंदर चित्रण किया। ‘अजामिल आख्यान’ का वर्णन करते हुए कथा व्यास ने बताया कि अनजाने में भी लिया गया भगवान का नाम मनुष्य के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करता है। उन्होंने कहा, “मरणासन्न अवस्था में पुत्र के बहाने नारायण का नाम लेने मात्र से अजामिल को यमदूतों के पाश से मुक्ति मिल गई, यह ईश्वर के नाम की असीम शक्ति है।
कथा के दौरान जड़भरत चरित्र और राजा रहूगण के संवाद के माध्यम से ‘भवाटवी’ (संसार रूपी वन) का मार्मिक वर्णन किया गया। जड़भरत जी द्वारा राजा रहूगण को दिए गए उपदेशों के जरिए समझाया गया कि शरीर नश्वर है और आत्मा का परमात्मा से मिलन ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य है।
सृष्टि और ब्रह्मांड का वर्णन विजय कृष्ण भागवत जी ने श्रीमद्भागवत के आधार पर विभिन्न लोकों, पर्वतों और ग्रहों की स्थिति का वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक विश्लेषण प्रस्तुत किया। इसके साथ ही, नरक की गतियों पर चर्चा करते हुए बताया कि मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति सदैव सचेत रहना चाहिए। कार्यक्रम में मुख्य श्रोता के रूप में श्रीमती शैला चन्द्रा (लखनऊ), रामचन्द्र कातरणीकर (मुंबई) और श्रीमती चन्दा पाण्डेय (बिहार) उपस्थित रहीं। प्रो. नन्दकिशोर पाण्डेय और आयोजन समिति के सदस्य महामाया दत्त पाराशर ने बताया कि यह कथा 25 मार्च तक निरंतर जारी रहेगी।





