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प्रतिशोध, हिंसा और विध्वंस की दास्तान है ‘डकैत एक प्रेम कथा’

फिल्म का पहला हिस्सा धीमा है, जहां कहानी अपने ही बोझ तले दबती हुई लगती है
लखनऊ। कहा जाता है कि प्यार कभी सरल नहीं होता, उसका कॉप्लेक्स्ड नेचर ही उसे यूनिक बनाता है। निर्देशक शेनिल देव की डकैत एक ऐसी सघन प्रेम कहानी है, जहां प्यार रॉंग टर्न ले लेता है और फिर शुरू होती है प्रतिशोध, हिंसा और विध्वंस की दास्तान। कहानी का मूल विचार मजबूत है, मगर अफसोस कमजोर स्क्रीनप्ले और लॉजिक की कमी के कारण यह एक यादगार लव स्टोरी बनते-बनते रह जाती है। कहानी की शुरूआत होती है,जेल में दस सालों से हत्या और बलात्कार की सजा काटने वाले हरि (आदिवि शेष)से। असल में हरि जिस लड़की जूलियट (मृणाल ठाकुर) से दिलो -जान से मोहब्बत करता था, उसी की झूठी गवाही पर उसकी जिंदगी तबाह हो गई थी और अब हरि जेल से भागकर जूलियट को बर्बाद करके अपना बदला पूरा करना चाहता है। मगर जब दोनों के रास्ते एक बार फिर से टकराते हैं, तब आपसी रंजिश और नफरत के बावजूद पुराने जज्बात सतह पर आ जाते हैं और फिर कुछ ऐसे राज खुलते हैं कि दोनों का रिश्ता और जटिल हो जाता है। इस पूरे घटनाक्रम की जटिल परतों को खंगालने का काम करता है पुलिस इंस्पेक्टर स्वामी (अनुराग कश्यप) और उसकी पुलिस अधिकारी बेटी (जैन मेरी खान) मगर जब ये परतें खुलती हैं, तो गुस्से, बदले और तबाह करने वाला जज्बा धुंधला हो जाता है और प्यार की एक अनोखी तस्वीर सामने आती है। ‘दिल जला है, दुनिया जला कर राख कर दूंगाह्ण जैसे तेवर वाले कॉन्सेप्ट पर निर्देशक शेनिल देव ने एक जटिल और भावनात्मक कहानी गढ़ने की कोशिश की है। विचार दमदार है, लेकिन समस्या यह है कि इसे कई जगहों पर जरूरत से ज्यादा ओवर-द-टॉप, अनुमानित और सुविधाजनक बना दिया गया है। फिल्म का पहला हिस्सा धीमा है, जहां कहानी अपने ही बोझ तले दबती हुई लगती है। दूसरा हिस्सा एक्शन और बेहतर एग्जीक्यूशन के साथ थोड़ी पकड़ बनाता है और कुछ ट्विस्ट वाकई चौंकाते हैं। लेकिन कमजोर स्क्रीनप्ले के कारण पूरी फिल्म लगातार डगमगाती रहती है। कई सीक्वेंस ऐसे हैं जहाँ लॉजिक की साफ कमी खलती है, जिससे कहानी की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। तकनीकी रूप से फिल्म समृद्ध नजर आती है। सिनेमैटोग्राफी कहानी के रॉ और कठोर भाव को प्रभावी ढंग से सामने लाती है। निर्देशक का झुकाव साफ तौर पर विजुअल अपील पर ज्यादा दिखता है। हालांकि, नैरेटिव में एकजुटता की कमी बार-बार महसूस होती है। कहानी बिना ठोस बिल्ड-अप के एक मूड से दूसरे मूड में छलांग लगाती है। वहीं संगीत, जो आमतौर पर प्रेम कहानियों की जान होता है, यहां वैसा असर पैदा नहीं कर पाता और फिल्म की भावनात्मक पकड़ को मजबूत करने में चूक जाता है।परफॉर्मेंस की बात की जाए तो, आदिवि शेष ने अपनी जटिल भूमिका के साथ न्याय करने की कोशिश की है, मगर कहीं -कहीं वे भी नाटकीय नजर आते हैं। मृणाल ठाकुर अपने रोल में दमदार नजर आती हैं। अनुराग कश्यप ने पुलिस अफसर-कम आध्यात्मिक गुरु वाली भूमिका में याद रह जाते हैं, मगर प्रकाश राज को हम इस तरह की भूमिकाओं में पहले भी देख चुके हैं।

ऐक्टर:आदिवि शेष,मृणाल ठाकुर,अनुराग कश्यप,प्रकाश राज,जैन मेरी खान,अतुल कुलकर्णी
डायरेक्टर :शेनिल देव
रेटिंग-3/5

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