कोविड-19 संक्र मित मामलों में सबसे तेज वृद्घि मार्च के 22 से 29 मार्च वाले सप्ताह में हुई थी। उसके बाद से ग्लोबल मामलों में औसत दैनिक वृद्घि दर में धीरे-धीरे कमी आयी है,लेकिन संक्र मितों की कुल संख्या में निरंतर इजाफा हो रहा है, रोजाना संक्रमितों की संख्या भी बढ़ रही है।
मार्च में वृद्घि दर 3 प्रतिशत थी जो अगस्त में गिरकर 1.5 प्रतिशत हो गई है, लेकिन मार्च में जहां संक्रमितों के रोजाना 2,822 मामले सामने आ रहे थे वहीं अब दैनिक संक्रमितों की औसत संख्या 2.6 लाख है।
गौरतलब है कि वृद्घि दर या ग्रोथ रेट का अर्थ होता है कि संक्रमितों की संख्या इतने दिनों में दो गुणी हो रही है यानी जब यह 3 प्रतिशत थी तो संक्रमितों की संख्या 24 दिनों में दोगुनी हो रही थी और अब जब यह 1.5 प्रतिशत है तो यह काम 48 दिनों में हो रहा है।
बहरहाल, इस समय नये कोरोना वायरस महामारी को लेकर तीन प्रमुख ट्रेंड्स हैं, जो चिंता का बड़ा कारण हैं- एक, अधिक जनसंख्या वाले देशों में कोविड-19 रोग अब भी फैलता जा रहा है।
दो, यह नये देशों में फैल रहा है और तीसरा यह कि जिन देशों ने संक्र मण को नियंत्रित कर लिया था उनमें महामारी की दूसरी लहर आ रही है। जहां तक सिर्फ भारत की बात है तो कोविड-19 मामले मेट्रोपोलिटन से निकलकर पास के जिलों व नये राज्यों में फैल रहे हैं।
हाल के दिनों में शोलापुर, नासिक, पालघर, सूरत, जलगांव व दक्षिण कन्नड़ में ज्यादा कन्टेनमेंट जोन देखने को मिले हैं, क्योंकि प्रत्येक में रोजाना संक्र मण के 1000 से अधिक मामले सामने आ रहे हैं।
दूसरी ओर अंडमान व निकोबार द्वीपों, लक्षद्वीप, गोवा, आंध्र प्रदेश व पुदुच्चेरी में रोजाना प्रति दस लाख की जनसंख्या पर 190 व 249 के बीच मामले सामने आ रहे हैं।
30 जुलाई तक पुणे, बंग्लुरु, ठाणे, मुंबई, चेन्नै व पूर्वी गोदावरी उन टॉप 20 जिलों में शामिल थे, जिनमें सक्रिय मामलों की संख्या ज्यादा सामने आ रही थी, लेकिन इस समय बिहार, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर पूर्व के राज्यों में संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसलिए टेस्टिंग व उपचार के संदर्भ में क्षेत्र-विशेष प्रतिक्रिया आवश्यक है, विशेषकर उन शहरों व जिलों में जिनमें आउटब्रेक तेज है।
अगर वैश्विक परिदृश्य पर नजर डालें तो पहले जिन देशों (जैसे अस्ट्रेलिया, जापान व वियतनाम) में संक्र मण नाम मात्र को ही था, उनमें अब बहुत तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिका, ब्राजील व भारत को कोरोना वायरस से कोई राहत नहीं मिल रही है और अफ्रीका संक्र मण का नया केंद्र बनता जा रहा है।
इस सबका केवल एक ही अर्थ है कि महामारी का खतरा अभी टला नहीं है। ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कोई देश कोविड-19 से बच नहीं रह सकता अगर वह अन्य देशों में फैलता रहेगा।
यूरोप में, विशेषकर फ्रांस व स्पेन में संक्रमण के मामले एक बार फिर बढ़ने लगे हैं। वियतनाम, जिसकी कोविड-19 नियंत्रण मामले में मिसाल दी जाती थी, में इस समय ग्रोथ रेट 5.2 प्रतिशत है और रोजाना संक्रमण के औसतन 25 मामले सामने आ रहे हैं।
ऑस्ट्रेलिया व जापान में शुरुआत में कोरोना वायरस कोई विशेष गंभीर समस्या नहीं थी,लेकिन अब स्थिति क्रमश: यह है कि ग्रोथ रेट 3.1 व 3 प्रतिशत है और रोजाना संक्रमण के औसतन 476 व 957 मामले सामने आ रहे हैं।
सिंगापुर (0.7 प्रतिशत), फ्रांस (0.6 प्रतिशत) व स्पेन (0.8 प्रतिशत) ने अपना ग्रोथ रेट अवश्य कम किया है, लेकिन इन देशों में एक बार फिर रोजाना संक्रमण के औसतन 375,1,056 व 2,300 मामले सामने आ रहे हैं।
कोरोना वायरस से जो सबसे अधिक प्रभावित देश हैं- अमेरिका, ब्राजील व भारत। उन्हें इस रोग से फिलहाल कोई राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। इन देशों में संक्रमण के नये हॉटस्पॉट्स बनते जा रहे हैं और जहां स्थिति नियंत्रित कर ली गई थी, वहां महामारी की दूसरी लहर आती प्रतीत हो रही है। ग्लोबल स्तर पर संक्रमण के कुल मामलों में जिन देशों की तरफ से सबसे ज्यादा इजाफा हो रहा है,उनमें संक्रमण अधिक तेजी से फैल रहा है।
कोलंबिया (ग्रोथ रेट 3.5 प्रतिशत), भारत (ग्रोथ रेट 3.4 प्रतिशत), फिलीपींस (ग्रोथ रेट 3.3 प्रतिशत) और अर्जेंटीना (ग्रोथ रेट 3.1 प्रतिशत) में 3 प्रतिशत से अधिक का ग्रोथ रेट है। अमेरिका में ग्रोथ रेट तो 1.4 प्रतिशत है, लेकिन रोजाना संक्रमण के औसतन 63,202 मामले सामने आ रहे हैं। इसी तरह ब्राजील में ग्रोथ रेट तो 1.8 प्रतिशत है, लेकिन रोजाना संक्रमण के औसतन 44,766 मामले सामने आ रहे हैं। जबकि दक्षिण अफ्रीका में ग्रोथ रेट तो 2.1 प्रतिशत है, लेकिन रोजाना संक्रमण के औसतन 9,341 मामले सामने आ रहे हैं।
नया कोरोना वायरस शुरू तो चीन से हुआ था, लेकिन यूरोप, एशिया व अमेरिका में स्थिति बदतर करते हुए अब अफ्रीका को अपना मुख्य केंद्र बनाता हुआ प्रतीत हो रहा है। पिछले एक सप्ताह के दौरान सबसे ज्यादा ग्रोथ रेट अफ्रीका के उन गरीब देशों में दर्ज किया गया है, जिनमें स्वास्थ्य व्यवस्था बहुत कमजोर है, जैसे ईस्ट गिनी (ग्रोथ रेट 6.7 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 250), जिंबाब्वे (ग्रोथ रेट 6.0 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 175), जाम्बिया (ग्रोथ रेट 5.3 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 271), लीबिया (ग्रोथ रेट 5.2 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 153), इथियोपिया (ग्रोथ रेट 5.1 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 758), वेनेजुएला (ग्रोथ रेट 4.5 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 740), केन्या (ग्रोथ रेट 3.6 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 674), मोरक्को (ग्रोथ रेट 3.5 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 767), कोलंबिया (ग्रोथ रेट 3.5 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 9,341) और मेडागास्कर (ग्रोथ रेट 3.5 प्रतिशत, रोजाना औसत केस 344)। यह सारे आंकड़े 2 अगस्त तक के हैं।
भारत में इस समय मेघालय (874), अंडमान व निकोबार द्वीपों (734), सिक्किम (658) व मिजोरम (482) में ही संक्रमण के 1000 मामलों से कम हैं। 27 जुलाई से 3 अगस्त तक के सप्ताह में भारत में ग्रोथ रेट 3.4 प्रतिशत था। 12 बड़े राज्यों- दिल्ली (0.7 प्रतिशत), गुजरात(1.6 प्रतिशत), हरियाणा (1.8 प्रतिशत), महाराष्टÑ (2.0 प्रतिशत), जम्मू कश्मीर, तमिलनाडु (2.2 प्रतिशत), मध्य प्रदेश (2.3 प्रतिशत), उत्तराखंड, राजस्थान (2.6 प्रतिशत), छतीसगढ़ (2.7 प्रतिशत), तेलंगाना (2.9 प्रतिशत) और पश्चिम बंगाल (3.1 प्रतिशत)- में ग्रोथ रेट राष्टÑीय औसत से कम था। लेकिन 9 बड़े राज्यों- असम (3.6 प्रतिशत), पंजाब (3.8 प्रतिशत), उत्तर प्रदेश, केरल (4.0 प्रतिशत), कर्नाटक (4.1 प्रतिशत), ओडिशा (4.4 प्रतिशत), बिहार (4.8 प्रतिशत), झारखंड (5.6 प्रतिशत), आंध्र प्रदेश (6.5 प्रतिशत) में यह राष्ट्रीय औसत से ऊपर है, जो कि चिंता का विषय है। अंतर्राष्ट्रीय व राष्ट्रीय डाटा से सिर्फ यही संकेत है कि कोविड-19 को लेकर किसी किस्म की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है।





