प्रेरक नाटक दिल की दुकान ने दिया सब्र का महामंत्र
लखनऊ। उ.प्र. संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ-संस्कृति विभाग, उ.प्र. द्वारा इस साल भी भव्य दो दिवसीय राज्य नाट्य समारोह का आयोजन किया गया। उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी द्वारा बिहार के दरभंगा स्थित ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, के सहयोग से इसका आयोजन 24 और 25 मार्च को स्थानीय गोमती नगर स्थित संत गाडगे जी महाराज आॅडिटोरियम में किया गया। बुधवार को लोकप्रिय हास्य नाटक दिल की दुकान का मंचन, रतन सिंह राठौर के कुशल निर्देशन में किया गया। नाटक ने सब्र का महामंत्र गुदगुदाते हुए दिया। कार्यक्रम की शुरूआत अकादमी की उपाध्यक्ष विभा सिंह, लखनऊ के वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी एवं पूर्व आईएएस रमेश मिश्रा द्वारा दीप प्रज्वलन के द्वारा की गई।
हास्य नाटक दिल की दुकान के लेखक राजेन्द्र कुमार शर्मा ने इस नाटक में संदेश दिया कि परिवार में परस्पर सामंजस्य ही सफलता का आधार है। कथानक के अनुसार इस बाजारवाद के युग में एक दुकान ऐसी भी परिकल्पित की गई जहां लोग अपने मन माफिक दिल का चयन कर सकते हैं। नाटक में सबसे पहले ऐसा परिवार दिखाया गया जिसका नायक पहले दर्जे का कंजूस होता है। इसके चलते उसकी पत्नी तंग आ कर उसे बादशाह का दिल लगवा देती है। उसकी यह युक्ति काम करती है पर बाद में अति हो जाती है। वह कंजूस, हकीकत में अपने को बादशाह समझ कर अपना धन दोनों हाथों से लुटाना शुरू कर देता है। इससे पत्नी परेशान हो उठती है।
नाटक के दूसरे प्रसंग में दिखाया गया कि झगड़ालू पत्नी से तंग आकर पति, उसका दिल लैला के दिल से बदलवा देता है। फिर क्या था उसकी पत्नी सुबह शाम, प्यार ही प्यार लुटानें लगती हैं। आखिरकार उसका पति भी परेशान हो उठता है। दूसरी ओर एक ऐसा परिवार भी दिखाया गया जिसमें पति शराबी होता है। ऐसे में उसकी पत्नी उसका दिल, स्वामी महात्मा के दिल से बदलवा देती है। इसके कारण स्थितियां और बिगड़ जाती हैं। उसका पति, महात्मा बन कर अपनी पत्नी को ही माता, कहकर दूरियां बना लेता है। नाटक का सुखद अंत होता है जब सबके मूल दिल लगा दिये जाते हैं। मंच पर कंजूस धनीराम की भूमिका मुरारी गौड़, कंजूस की पत्नी रानी की अंकिता चौधरी, लड़ाकू पत्नी के पति मोहन की श्याम मनोहर तिवारी, लड़ाकू पत्नी सरला की मीत कमल द्विवेदी, शराबी प्रीतमलाल की योगेन्द्र श्रीवास्तव, शराबी की पत्नी चन्दा की प्रिया वर्मा, डॉक्टर साहब की वलीउल्लाह खॉन, नर्स की हंसशिखा, चन्दा मांगने वाला-एक अमरनाथ की अक्षय इनैमुअल सिंह और दो-बंसीलाल की शेखर यादव ने अदा कर दर्शकों को लोटपोट कर दिया।
इस मंचीय प्रस्तुति में राकेश सुधाकर की मंच सज्जा, कैलाश श्रीवास्तव की प्रकाश एवं ध्वनि परिकल्पना एवं संचालन, सरिता की रुप सज्जा, प्रदीप मिश्रा व सुचिता दुबे का प्रस्तुति प्रबन्धन एवं शिखा उद्धव की मंच व्यवस्था अत्यंत सराहनीय रही।





