चैत्र शुक्ल के प्रथम दिवस पर सजा 12 दिवसीय चैती महोत्सव
- डिजिटल लाइट एंड साउंड से सजेगा तुलसी रंगमंच
- ऐशबाग श्री रामलीला मैदान में होगा श्री कृष्ण की लीलाओं का मंचन
- प्रतिदिन लखनऊ के कलाकारों द्वारा होंगे विभिन्न नृत्य
लखनऊ । गुरुवार को चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को भारतीय नववर्ष के प्रथम दिन ऐशबाग के ऐतिहासिक रामलीला मैदान मे हुआ चैती महोत्सव का आरंभ । सांस्कृतिक मंच का शुभारंभ उ.प्र. के सांस्कृतिक एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया इस अवसर पर श्री रामतीला समिति ऐशबाग के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल, मंत्री आशुतोष शर्मा, कोषाध्यक्ष ऋतुराज रस्तोगी, हर्षित जयसवाल, शुभम अग्रवाल सहित समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे । मंच आरंभ होने से पूर्व प्रात: ही चैती महोत्सव का शुभारंभ कलश स्थापना व गणेश पूजन के साथ किया गया जिसे आचार्य अशोक कुमार पाधा जी (मंगलू पंडित) एवं पंडित ललित ने मुख्य यजमान शील कुमार अग्रवाल के साथ विधिविधान के साथ पूर्ण किया ।
पूजनोपरान्त मनोज तिवारी के नेतृत्व में भगवान श्रीराम के दरबार मे संगीतमय सुंदरकांड के पाठ का सुंदर आयोजन हुआ, श्रीराम और हनुमान जी की आरती के उपरांत सांस्कृतिक मंच का शुभ आरंभ किया गया ।
पहले दिन की श्रीकृष्ण लीला का मंचन क्रूर कंस के अत्याचारों से शुरू होता है जिसकी गूंज चहुओर सुनाई देती है जिससे विचलित हो समस्त देवता भगवान श्री हरि विष्णु से कंस की व्यथा सुनात हैं यह सुनकर श्रीहरि स्वयं अवतार लेकर कंस के अत्याचारों का अंत करने का वचन देते हैं ।
उधर कंस अपनी बहन देवकी का ब्याह अपने मित्र वासुदेव जी से कराने के उपरांत स्वयं रथ चलाकर बहन को विदा करने निकलता है तभी आकाशीय आकाशवाणी होती है जिसमे देवकी के आठवें पुत्र द्वारा कंस के वध की बात कही जाति है जिसे सुनते ही बौखलाया कंस नवविवाहिता बहन को उसके पति समेत कारागार में डाल देता है और अपने पिता मथुरा नरेश उग्रसेन को अपदस्थ कर उन्हे बंदी बनाकर स्वयं ही मथुरा का राजा बन जाता है और जन मानस पर अत्यधिक अत्याचार करने लग जाता है ।
इधर समय बीतने के साथ माता देवकी के छह पुत्रों को कंस ने पैदा होते ही मार डाला तब विष्णु जी की योगमाया ने देवकी के गर्भ को वासुदेव की पहली पत्नी रोहिणी के गर्भ में स्थापित कर दिया जिसके उपरांत बलराम जी का जन्म होता है । अब बारी थी देवकी के आठवे पुत्र के जन्म की तब भगवान श्री हरि विष्णु ने पुन: योगमाया को माता यशोदा के गर्भ में जाने का आदेश देते हैं और स्वयं कंस के कारागार मे माता देवकी के गर्भ से जन्म लेकर श्रीकृष्ण की लीलाओं का आरंभ करते हैं। श्रीकृष्ण जन्म के बाद कारागार खुल जाता है पहरेदार सो जाते हैं और वासुदेव जी तमाम मुश्किलों को पार कर नंदगांव जाते हैं जहाँ श्रीकृष्ण को छोड़ कर नंदबाबा और माता यशोदा के घर जन्मी योगमाया रूपी कन्या को लेकर कारागार में लौट आते हैं ।
श्रीकृष्ण लीला से पूर्व विक्की राज के निर्देशन मे वर्बे डांस स्टूडियो के कलाकारों ने नृत्य प्रस्तुत किए व शशांक जादूगर ने भी अपने जादू से लोगों का मनमोहा । श्रीरामलीला समिति ऐशबाग के अध्यक्ष हरीशचन्द्र अग्रवाल ने बताया की चैती महोत्सव के मंच पर प्रतिदिन श्रीकृष्ण की विभिन्न लीलाओं का मंचन करने के पीछे ये उद्देश्य है कि प्रत्येक व्यक्ति श्रीकृष्ण के जीवन दर्शन को जाने श्रीकृष्ण की प्रत्येक लीला के पीछे जनकल्याण के भाव हैं समाज के लिए उनकी हर लीला एक सीख है । इसलिए लोगों से अपील करेंगे की डिजिटल लाइट और साउंड से सजे मंच पर हो रही भगवान की इस लीला का सजीव अवलोकन करने अवश्य पधारें ।





