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चंद्रयान-3 : वैज्ञानिक सुमित ने बीबीडीएनआईआईटी का नाम किया रौशन

लखनऊ। एक ओर जहां चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग से देश का नाम विश्व पटल पर ऊंचा हुआ है, वहीं इस मिशन पर काम कर रही टीम में फतेहपुर के सुमित कुमार ने बीबीडीएनआईआईटी का नाम रौशन किया है। सुमित के हाथों से वह कैमरा गुजरा, जो चांद से भारत के लिए नई तस्वीरें और नए इनपुट भेज रहा है। सुमित कुमार की इस अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए बीबीडी ग्रुप की चेयरपर्सन श्रीमती अलका दास गुप्ता और प्रेसिडेंट विराज सागर दास ने शुभकामनाएं दीं।

बीबीडी ग्रुप की चेयरपर्सन श्रीमती अलका दास गुप्ता व प्रेसिडेंट विराज सागर दास ने दीं अभूतपूर्व उपलब्धि के लिए शुभकामनाएं

बीबीडी ग्रुप के प्रेसिडेंट विराज सागर दास ने कहा कि बीबीडियन पूरी दुनिया में छाए हुए हैं और महत्वपूर्ण पदों पर रहकर देश-विदेश की सेवा कर रहे हैं। साथ ही अपने उत्कृष्ट कार्यों से बीबीडी ग्रुप का नाम भी रौशन कर रहे हैं। बीबीडी एजुकेशनल ग्रुप विश्वस्तरीय बनने के संकल्प के साथ नित्य नई ऊंचाइयां हासिल कर रहा है। इसकी गवाही बीबीडी यूनिवर्सिटी और संबद्ध कालेजों में लगातार बढ़ रही विद्यार्थियों की संख्या है। साथ ही छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापरक शिक्षा मिलने के चलते उनका केंद्र और प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में चयन हो रहा है। बीबीडी ग्रुप की चेयरपर्सन श्रीमती अलका दास गुप्ता और बीबीडी ग्रुप के प्रेसिडेंट विराज सागर दास निरंतर छात्र-छात्राओं की सुविधा और उनकी गुणवत्तापरक शिक्षा के लिए प्रयासरत रहते हैं ताकि छात्रों को भविष्य की ऊंचाइयां मिल सकें। इसी का परिणाम है कि वर्ष 2003 में सुमित कुमार ने बाबू बनारसी दास नार्दन इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीबीडीएनआईआईटी) में दाखिला लिया और वर्ष 2007 में इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की पढ़ाई पूरी की। बीबीडीएनआईआईटी के उत्कृष्ट शिक्षा प्रणाली के फलस्वरूप वर्ष 2008 में सुमित कुमार ने इसरो में चयनित होकर अपना परचम लहराया।

बता दें कि चंद्रयान-3 को बीते 14 जुलाई को लांच किया गया था। 23 अगस्त की शाम 6 बजकर 05 मिनट पर चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग हुई। इस मिशन में सुमित कुमार की भी अहम भूमिका है। उन्होंने देश और प्रदेश के साथ-साथ बाबू बनारसी दास नार्दन इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीबीडीएनआईआईटी) का नाम रौशन किया है। फतेहपुर जिले कीखागा तहसील के विजय नगर के रहने वाले अर्जुन सिंह के बेटे सुमित कुमार मिशन चंद्रयान-3 में शामिल हैं। उन्होंने अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई खागा कस्बे के शुकदेव इंटर कॉलेज से करने के बाद लखनऊ के प्रतिष्ठित और शिक्षा क्षेत्र में अग्रणी संस्थान बाबू बनारसी दास नार्दन इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (बीबीडीएनआईआईटी) से इलेक्ट्रानिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग ब्रांच से बीटेक किया। सुमित कुमार वर्ष 2008 में इसरो के अहमदाबाद केंद्र में बतौर वैज्ञानिक नियुक्त हुए थे। वह वर्तमान में स्पेस एप्लीकेशन सेंटर में तैनात हैं। उनका चंद्रयान-3 के अलावा पीएसएलवी, जीएसएलवी उपग्रह प्रक्षेपण व चंद्रयान-2 अभियान में भी योगदान रहा है।

बीबीडी ग्रुप की चेयरपर्सन श्रीमती अलका दास गुप्ता और बीबीडी ग्रुप के प्रेसिडेंट, यूपी बैडमिंटन एसोसिएशन के अध्यक्ष, उ.प्र. ओलंपिक संघ के अध्यक्ष एवं बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष विराज सागर दास ने कहा है कि चंद्रयान-3 की कैमरा डिजाइन संबंधी उनके कार्य से न केवल देश का मस्तक गर्व से ऊंचा हुआ है, वहीं बीबीडी ग्रुप भी अपने छात्र की इस उपलब्धि से खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा है। बीबीडी ग्रुप की चेयरपर्सन श्रीमती अलका दास गुप्ता ने कहा कि संस्थान के लिए यह गौरव का क्षण है। इससे यहां अध्ययनरत छात्रों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी उच्च पदों पर पहुंचकर राष्ट्र की सेवा में अपनी महती भूमिका का निर्वाह कर सकेंगे।

वहीं, बीबीडी ग्रुप के प्रेसिडेंट विराजसागर दास ने कहा कि सुमित कुमार बाबू बनारसी दास नार्दन इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के होनहार और मेधावी छात्र रहे हैं। चंद्रयान-3 के चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सफल लैंडिंग के लिए इसरो के सभी वैज्ञानिकों का योगदान अहम है लेकिन कैमरे की डिजाइनिंग अपने आप में बड़ा काम है और उससे भी बड़ा है, इस विलक्षण काम में बीबीडी के छात्र का अहम योगदान। सुमित कुमार ने जिस सूझ-बूझ, दृढ़ता और संकल्पशक्ति के साथ चंद्रयान-3 के कैमरे की डिजाइनिंग की है, उसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, कम है। ऐसा करके उन्होंने अपनी सफलता का इतिहास रच दिया है। उनके डिजाइन किए गए कैमरे से चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की जानकारी देश-दुनिया को मिल सकेगी।

बीबीडी ग्रुप अपने इस छात्र की उल्लेखनीय सफलता पर गद्गद है और इस बात के लिए पूरी तरह आश्वस्त है कि उसके छात्र इसी तरह देश की सेवा में अपना शत-प्रतिशत योगदान देते रहेंगे। उन्होंने कहा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान-3 के लैंडर (विक्रम) और रोवर (प्रज्ञान) से युक्त लैंडर मॉड्यूल का पहुंचना भारत के लिए गौरव की बात है। इससे न केवल चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के गूढ़ रहस्यों से पर्दा उठेगा, बल्कि अंतरिक्ष क्षेत्र में पूरी दुनिया में भारत का डंका बजेगा।

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