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चैत्र नवरात्र : भक्तों ने की महागौरी की पूजा-अर्चना, मांगी सुख-समृद्धि

लखनऊ। गुरुवार अष्टमी पर माता रानी के दर्शन के लिए मंदिरों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। माता के महागौरी स्वरूप की पूजा अर्चना हुई। महागौरी की पूजा करने से भक्तों के हर कष्ट दूर होते हैं। मां भक्तों पर अपनी कृपा बरसाती हैं। मां महागौरी को नारियल और हलवे का भोग लगाया गया। वहीं घर पर लोगों ने माता का पाठ कर पूजा अर्चना की। शनिवार को शहर में कई जगह भक्तों ने कन्या भोज का भी आयोजन किया गया।
चौक स्थित काली जी मंदिर में सुबह से ही भक्तों ने बड़ी संख्या में माता रानी के दरबार पहुंच कर हाजिरी लगाई। माता को नये वस्त्र पहनाए गए। गुलाब के फूलों की माला पहनाकर शृंगार किया गया। वहीं ठाकुरगंज स्थित मां पूर्वी देवी में माता के महागौरी स्वरूप का शृंगार हुआ। माता को हरे और रानी रंग का वस्त्र पहनाए गए। शृंगार सामग्री माता रानी को भेंट की। प्रसाद स्वरूप फल, पेड़ा, बिन्दिया, सिन्दूर, नेलपॉलिश व मेहंदी आदि शृंगार का सामान भेंट किया गया। चौपटिया स्थित संतोषी माता मंदिर में माता को नारंगी रंग के वस्त्र पहनाए गए। गुड़ चना का भोग लगाया गया। वहीं संदोहन देवी मंदिर में माता ने हरे वस्त्र में शेर पर सवार होकर भक्तों को दर्शन दिए। साथ ही शीतला माता मंदिर, मसानी देवी, दुर्गा मंदिर में भी खूब भीड़ रही।

कन्या भोज का आयोजन:


नन्दना बीकेटी स्थित इक्यावन शक्तिपीठ में चल रहे नवरात्र उत्सव में अष्टमी मनाई गई। भक्तों ने मां की आराधना पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ की। मन्दिर में चल रहे नवरात्र के मौके पर हवन उसके बाद वृहद कन्या भोज का आयोजन किया गया। जिसमें सैकड़ों की संख्या में कन्याओं ने भोजन कराया गया। मन्दिर की अध्यक्ष तृप्ति तिवारी ने बताया कि कन्याओं को भोजन कराने के लिए लोगों की होड़ लगी रही। बहुत से भक्तों ने कन्याओं को उनके मन पसंद खिलौने और रुपये देकर आशीर्वाद लिया तो कुछ भक्तों ने टाफी, बिस्कुट, चाकलेट, कोल्ड्रींग का वितरण किया। सुबह सुन्दरकाण्ड का पाठ हुआ।

लक्ष्मी नारायण की अष्टधातु की मूर्ति के दर्शन:
चौक स्थित काली जी मंदिर के महंत ने बताया कि मंदिर में बेहद प्राचीन अष्टधातु की लक्ष्मी नारायण की मूर्ति है। जिसे नवरात्र में अष्टमी और नवमी के दिन भक्तों के दर्शन के लिए निकाला जाता है। इस तरह भक्त वर्ष में चार बार ही इस मूर्ति के दर्शन कर पाते हैं। इसके बाद यह मूर्ति मंदिर के गर्भगृह में रख दी जाती है। मान्यता है कि अष्टधातु मूर्ति के सामने जो भी मन्नत मांगी जाती है वह पूरी होती है। यही वजह है कि नवरात्र की अष्टमी और नवमी को बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं।

यहां दर्शन करने से गृहस्थ जीवन की हर परेशानी होती दूर:
चौपटिया स्थित संतोषी माता मंदिर भक्तों की आस्था का केंद्र है। मंदिर की स्थापना करीब 72 वर्ष पूर्व हुई थी। माता को गुड़ और चने का भोग लगाने की परंपरा है। मां को खट्टा पदार्थ चढ़ाना वर्जित है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में भक्त दर्शन के लिए आते हैं। संतोषी माता मंदिर प्रबंध समिति के सचिव हिमांशु जायसवाल ने बताया कि संतोषी माता गृहस्थों की देवी हैं। माता के दर्शन मात्र से मन को शांति मिलती है। मां को गुड़ चने का भोग लगाकर आराधना से संतान प्राप्तिए ऐश्वर्य और धन धान्य में वृद्धि होती है। यहां सच्चे मन से मांगी हर मुराद पूरी होती है। माता की पूजा करने से गृहस्थ जीवन की हर परेशानी दूर होती है।

घर-घर हुआ कन्या भोज:
अष्टमी पर कई जगह कन्या भोज हुआ। लोगों ने घर आई कन्याओं के पैर पूजे। हलवा पूड़ी और दही जलेबी का भोग लगाया। कन्याओं को भेंट स्वरूप उपहार और दक्षिणा दी। इसके अलावां कई भक्तों ने मंदिरों में जाकर भी कन्या पूजन किया और दान दक्षिण दी।

मंदिरों में हुआ मुण्डन संस्कार:
नवरात्र में मुण्डन संस्कार का विशेष महत्व है। चौक स्थित काली जी मंदिर व सीतापुर रोड स्थित चन्द्रिका देवी आदि मंदिरों में मुण्डन संस्कार हुए। मुण्डन संस्कार के बाद लोगों ने भोज कराया।

मंदिरों में हुआ भव्य शृंगार:
नवरात्र को लेकर मंदिरों में भी धूम रही। हर कोई मां की भक्ति में लीन नजर आ रहा था। शास्त्रीनगर स्थित दुर्गा मंदिर में मां को फूलों से विशेष श्रृंगार किया गया। इसके अलावा राजेंद्र नगर के महाकाल मंदिर में मां के सिद्धिदात्री स्वरूप में महाकाल का भव्य श्रृंगार किया गया। ठाकुरगंज स्थित मां पूर्वी देवी मंदिर मां का सिद्धिदात्री स्वरूप में भव्य श्रंगार के साथ भजन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें भक्तों ने हिस्सा लिया। वहीं, चौक स्थित छोटी व बड़ी कालीजी मंदिर, चौपटिया स्थित संदोहन देवी मंदिर, संकटा देवी मंदिर समेत अन्य जगहों पर मां की महाआरती के साथ हवन व भजन का आयोजन किया गया।

अति प्राचीन अष्टधातु की निर्मित अर्धनारीश्वर मूर्ति की हुई स्थापना
लखनऊ। नवरात्रि की अष्टमी को चौक स्थित मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर में नवदुर्गा के आठवें स्वरूप महागौरी के दर्शन के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। महंत विवेकानंद गिरी ने बताया कि नवरात्रि के आठवें दिन महागौरी पूजन के विशेष अवसर पर प्राचीन काल से चली आ रही। परंपरा के अनुसार 2500 वर्ष प्राचीन अष्टधातु से निर्मित भगवती की प्रतिमा का विधि विधान से पूजन अर्चना कर भक्तों के दर्शन हेतु प्रात: काल गर्भ ग्रह में दो दिवस के लिए स्थापित किया गया। अष्टधातु से निर्मित इस प्रतिमा का भक्तों के दर्शन हेतु चैत्र और अश्विन के नवरात्र के अष्टमी और नवमी के दिन प्राचीन काल से स्थापित किया जा रहा है। मीडिया प्रभारी अभय उपाध्याय ने बताया अष्टधातु की भगवती की प्रतिमा का महंत विवेकानंद गिरी, कमलानंद बाबा विधायक नीरज बोरा अपर्णा यादव उपाध्यक्ष महिला आयोग उत्तर प्रदेश भाजपा नेता अभिजात मिश्रा द्वारा अभिषेक कर स्थापना की गई जोकि विश्व में भगवती का अत्यंत ही दुर्लभ विग्रह है जो की पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व रखता है। भक्तों का मानना है कि इसके दुर्लभ दर्शन मात्र से कष्टों का हरण होता है। भगवती के इस स्वरूप के दर्शन के लिए सुबह से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। देर रात्रि मंदिर प्रांगण में अष्टमी हवन संपन्न किया गया । आज विशेष रूप से युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष/सदस्य विधान परिषद प्रांशु दत्त द्विवेदी, नैमिष त्रिपाठी सदस्य युवा मोर्चा उत्तर प्रदेश, अंशुल विद्यार्थी प्रांत संगठन मंत्री एबीवीपी ,भाजपा पूर्व लखनऊ जिला अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने दर्शन किया। मंदिर व्यवस्था में मुख्य रूप से प्रकाश सिंह राहुल सारस्वत तुषार वर्मा आदर्श महाराज देवराज सिंह शिवम् पंडित दीप प्रकाश वैभव सिंह शिवा निषाद मेघांश एवं अन्य सेवक उपस्थित रहे।

कन्या पूजन का भव्य आयोजन
लखनऊ। ठाकुरगंज स्थित संगत बाबा हजाराबाग उदासीन आश्रम में महा मंडलेश्वर स्वामी हरि प्रकाश उदासीन वा महंत स्वामी हरेंद्र मुनि द्वारा राम नवमी के पावन अवसर पर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ कन्या पूजन का भव्य आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं ने भाग लिया और पूरे आश्रम परिसर में धार्मिक वातावरण बना रहा। कार्यक्रम की शुरूआत विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ हुई, जिसमें भगवान श्रीराम का स्मरण करते हुए भक्तों ने मंगल कामनाएं कीं। इसके बाद कन्या पूजन की परंपरा निभाई गई, जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका आदर-सत्कार किया गया। श्रद्धालुओं ने कन्याओं के चरण धोए, माथे पर तिलक लगाया और उन्हें फूल, चुनरी, प्रसाद तथा उपहार अर्पित किए। आश्रम के संतों और आयोजकों ने बताया कि कन्या पूजन भारतीय संस्कृति की एक महत्वपूर्ण परंपरा है, जो नारी शक्ति के सम्मान और आदर का प्रतीक है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों को समाज में बेटियों के महत्व को समझने और उन्हें सम्मान देने का संदेश भी दिया गया।

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