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चैत्र नवरात्र : मां कालरात्रि की पूजा-अर्चना करने मंदिरों में उमड़े श्रद्धालु

लखनऊ। चैत्र नवरात्र के सातवें दिन बुधवार को मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा हुई। मां कालरात्रि शत्रु और दुष्टों का संहार करती हैं। मां की पूजा करने से भय और बुरी शक्तियां दूर होती हैं। मां की पूजा से शनि देव भी शांत होते हैं। मां कालरात्रि की चार भुजाएं हैं। ऊपर की दाहिनी भुजा से मां भक्तों को वर प्रदान करती हैं। निचली दायीं भुजा से अभय देती हैं। जबकि बायीं भुजा में माता खड़ग और कटीला मूसल धारण करती हैं। चंड मुंड का वध करने से माता चामुंडा देवी नाम से भी विख्यात हैं। माता कालरात्रि का वाहन गर्दभ है। मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़हल का फूल बेहद प्रिय है। भक्तों ने मां को मिष्ठान और फल का प्रसाद अर्पित किया। मां सप्तसती का पाठ कर आरती उतारी।
चौक स्थित बड़ी काली जी मंदिर में माता को सफेद और सुनहरा गोटेदार वस्त्र पहनाकर श्रृंगार हुआ। माता रानी को खीर और सिंघाड़े के हलवा का भोग लगाया गया। महंत ओम भारती ने पूरे विधि विधान के साथ पूजन कर मां की आरती उतारी। वहीं ठाकुरगंज स्थित पूर्वी देवी मंदिर में मां का महाकाली के स्वरूप में श्रृंगार हुआ। माता को लाल वस्त्र पहनाए गएए भवन भी लाल रंग से सजाया गया। माता के भद्रकाली स्वरूप की पूजा हूई। माता को दीपकों से सजाया गया। माता को पंचमेवा और पेड़े का भोग लगाया गया। महिला मण्डली ने सोने का दरबार सिंहासन मणियों का गीत गाकर सभी को भाव विभोर कर दिया। काली बाड़ी मंदिर में माता को खिचड़ी, पापड़, पांच प्रकार की भाजा का भोग लगाया गया। वहीं चौपटिया स्थित संदोहन देवी मंदिर में मां को लाल और पीला वस्त्र पहनाकर शृंगार किया गया। माता संदोहन देवी ने महिषासुर मर्दनी के रूप में दर्शन दिए। माता का दरबार फूलों से सजाया गया। दुर्गा सप्तशती के 11 वें अध्याय एवं अनुष्ठान के मंत्र ॐ ह हनुमते नम: पर हवन हुआ। वहीं माता संकटा देवी, माता शीतला देवी मंदिर में भी माता का भव्य श्रृंगार हुआ। वहीं मदेयगंज स्थित नानक शाह मठ में धर्मेंद्रदास महाराज द्वारा आयोजित महासप्तमी अनुष्ठान में आहुति अर्पित की।

मां कालरात्रि से मांगा अभय और उत्तम स्वास्थ्य:
चैत्र नवरात्र के सातवें दिन मां के कालरात्रि स्वरूप की पूजा हुई। मां कालरात्रि शत्रु और दुष्टों का संहार करती हैं। मां की पूजा करने से भय और बुरी शक्तियां दूर होती हैं। मां की पूजा से शनि देव भी शांत होते हैं। मां कालरात्रि की चार भुजाएं हैं। ऊपर की दाहिनी भुजा से मां भक्तों को वर प्रदान करती हैं। निचली दायीं भुजा से अभय देती हैं। जबकि बायीं भुजा में माता खड़ग और कटीला मूसल धारण करती हैं। चंड मुंड का वध करने से माता चामुंडा देवी नाम से भी विख्यात हैं। माता कालरात्रि का वाहन गर्दभ है। मां कालरात्रि को गुड़ और गुड़हल का फूल बेहद प्रिय है।

51 शक्ति पीठ में मां का फूलों से हुआ शृंगार
लखनऊ। नंदन बक्शी का तालाब स्थित 51 शक्तिपीठ धाम में नवरात्र की सप्तमी को कालरात्रि की पूजा अर्चना की गई। आज के पिंडी पूजन का सौभाग्य सुनीता वार्ष्णेय को प्राप्त हुआ। 51 शक्तिपीठ तीर्थ में आज मां का पुष्प श्रंगार हुआ। मंदिर की की अध्यक्ष तृप्ति तिवारी ने बताया कि मन्दिर मे अष्टमी मनाई जायेगी और माँ महागौरी का पूजन होगा। शाम को पुष्पा, आकांक्षा, गीता, वंदना, कुमकुम ने भजन सुनाये।
दो लाख श्रद्धालुओं ने किये दर्शन: नवरात्र के सप्तमी दिवस के अवसर पर मां के कालरात्रि रूप का पूजन एवं दर्शन लगभग दो लाख श्रद्धालुओं ने किया। मंदिर के व्यवस्थापक स्वामी हसानंद ने बताया की मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप है मां का रूप अत्यंत उग्र भयानक एवं तीन नेत्रधारी व गले में विद्युत की माला रहती है। मीडिया प्रभारी अभय उपाध्याय ने बताया मंदिर नवरात्र की अष्टमी को 2500 वर्ष पुरानी अष्टधातु से निर्मित अर्धनारीश्वर के विशेष दर्शन प्राप्त होते हैं जो की अष्टमी के प्रात: 10 बजे रुद्राभिषेक के उपरांत दर्शन हेतु कपाट खोले जाते हैं व नवमी के भोग आरती के उपरांत पुन: इसे विस्थापित कर मंदिर में अगली नवरात्रि के लिए संग्रहित कर लिया जाता है। मंदिर में आज विशेष रूप से अभिषेक कौशिक मुख्यमंत्री पूर्व ओएसडी भाजपा नेत्री चेतना पांडे ने दर्शन किए । मंदिर व्यवस्था में मुख्य रूप से मुकुंद मिश्रा , अंकित ,प्रकाश , विकास, आकाश, दीपांशु, वैभव, अमित, राहुल, तुषार, देवराज सिंह एवं अन्य सेवादार उपस्थित रहे ।

अष्टमी व नवमी को अष्टधातु से निर्मित 2500 वर्ष प्राचीन अर्धनारीश्वर मूर्ति के दर्शन

लखनऊ। चौक स्थित मठ श्री बड़ी काली जी मंदिर में चैत्र नवरात्र के सातवें दिन के अवसर पर माता के सातवें स्वरूप मां के कालरात्रि रूप का पूजन एवं दर्शन लाखों श्रद्धालुओं ने किया। महंत स्वामी विवेकानंद गिरी महाराज ने बताया की मां कालरात्रि नवदुर्गा का सातवां स्वरूप है मां का रूप अत्यंत उग्र भयानक एवं तीन नेत्रधारी व गले में विद्युत की माला रहती है। मीडिया प्रभारी अभय उपाध्याय ने बताया नवरात्र की अष्टमी को 2500 वर्ष पुरानी अष्टधातु से निर्मित अर्धनारीश्वर के विशेष दर्शन प्राप्त होते हैं जो की अष्टमी के प्रात: 9 बजे रुद्राभिषेक के उपरांत मंत्रों द्वारा विधि विधान पूर्वक स्थापित कर दर्शन हेतु कपाट खोले जाते हैं व नवमी के रात्रि भोग आरती के उपरांत पुन: इसे विस्थापित कर मंदिर में अगली नवरात्रि के लिए संग्रहित कर लिया जाता है । मंदिर व्यवस्था में मुख्य रूप से मुकुंद मिश्रा , अभय उपाध्याय, शिवम पंडित शक्तिदीन अवस्थी आदर्श महाराज राहुल ,तुषार, देवराज सिंह , दीप प्रकाश, विकास तिवारी पंकज उपाध्याय मेघांश वैभव प्रकाश अंकित एवं अन्य सेवादार उपस्थित रहे ।

अष्टमी आज, होगी महागौरी की उपासना

लखनऊ। चैत्र नवरात्र की अष्टमी और नवमी पर कन्या पूजन और हवन कर नवरात्र का व्रत संपन्न होता है। मां दुगार्जी की आठवीं शक्ति का नाम महागौरी है। दुगार्पूजा के आठवें दिन महागौरी की उपासना का विधान है। इनकी शक्ति अमोघ और सद्य: फलदायिनी है। इनकी उपासना से भक्तों के सभी कल्मष धुल जाते हैं, पूर्वसंचित पाप भी विनष्ट हो जाते हैं। भविष्य में पाप-संताप, दैन्य-दु:ख उसके पास कभी नहीं जाते। वह सभी प्रकार से पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी हो जाता है। श्वेते वृषे समारुढा श्वेताम्बरधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।। इनका वर्ण पूर्णत: गौर है। इस गौरता की उपमा शंख, चंद्र और कुंद के फूल से दी गई है। इनकी आयु आठ वर्ष की मानी गई है अष्टवर्षा भवेद् गौरी। इनके समस्त वस्त्र एवं आभूषण आदि भी श्वेत हैं। महागौरी की चार भुजाएं हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे के बाएं हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है। पार्वती जी का रंग अत्यंत ओजपूर्ण होता है, उनकी छटा चांदनी के सामन श्वेत और कुन्द के फूल के समान धवल दिखाई पड़ती है, उनके वस्त्र और आभूषण से प्रसन्न होकर देवी उमा को गौर वर्ण का वरदान देते हैं।

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