चैती महोत्सव का सातवां दिन
लखनऊ । गुरुवार को ऐशबाग रामलीला मैदान में आयोजित चैती महोत्सव में तुलसी रंगमंच पर कलाकारों ने अपनी प्रतिभा से श्रीकृष्ण पर आधारित नृत्य नाटिकाओं एवं भाव नृत्यों द्वारा दर्शकों को खासा प्रभावित किया ।
मंच की प्रथम प्रस्तुति ईलाइट डांस एकेडमी द्वारा दी गई, सपना थापा एवं पंकज चौहान के निर्देशन में अधरम मधुरम, गगरिया फोड़ दी, राधा गोरी गोरी, वो कृष्णा है आदि भजनो को कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से जीवंत किया । इसके उपरांत दीपशिखा सिन्हा के निर्देशन में सांस्कृतिक विभाग के कलाकारों द्वारा नृत्य प्रस्तुतियां दी गईं जिन्हे दीपशिखा सिन्हा, अश्मिता श्रीवास्तव, साक्षी, शुभ्रा यादव, शर्मिष्ठा श्रीवास्तव, तान्या राव, श्री मिश्रा, शुभी रस्तोगी, समृद्धि श्रीवास्तव, संस्कृति श्रीवास्तव एवं अंशिमा सिन्हा ने अपनी नृत्य प्रतिभा से सजाया ।
कोलकाता और लखनऊ के कलाकारों द्वारा श्रीकृष्ण लीला का मंचन द्रौपदी स्वयंवर से आरंभ किया गया, अज्ञातवास के दौरान जब पांडव भेष बदल कर रह रहे थे उसी समय पर राजा द्रुपद द्वारा घोषणा की जाती है कि जो भी पानी में प्रतिबिंब देखकर उस पर धनुष से तीर चलाकर ऊपर टंगी हुई मछली पर सटीक निशाना लगा देगा उसी को द्रौपदी द्वारा वरमाला पहनाई जाएगी।
पांडव भी ब्राह्म्ण भेष में स्वयंवर देखने जाते हैं, जहाँ सैकड़ों सूरवीर पहले से विराजमान होते हैं इनमें धृतराष्ट्र के सौ पुत्र, अंग देश का राजा कर्ण, श्रीकृष्ण, शिशुपाल, जरासंध आदि भी उपस्थित थे।
स्वयंवर पंडाल में एक-एक करके सूरमा उठते धनुष पर डोरी चढ़ाते हारते और अपमानित होकर लौट जाते। कितने ही सुप्रसिद्ध वीरों को इस तरह मुँह की खानी पड़ी जिनमे शिशुपाल, जरासंध, शल्य व दुर्योधन जैसे पराक्रमी राजकुमार तक असफल हो गए। जब कर्ण की बारी आई तो सभा में एक लहर सी दौड़ गई। लोगों को लगने लगा अंग नरेश जरूर सफल होंगे । कर्ण ने धनुष उठाकर प्रत्यंचा चढ़ानी शुरू कर दी जिसे स्वयं द्रौपदी ने अपने कटु वचनों रोक दिया । तभी भीड़ के बीच से अर्जुन उठ खड़े होते हैं। ब्राह्मण वेषधारी अर्जुन धनुष उठकर उस पर तीर चढ़ाते हैं और घूमते हुए चक्र में टंगी मछली पर अचूक निशाना लगाते हैं जिसे देख सभा में कोलाहल मच जाता है और द्रौपदी ब्राह्मण भेषधारी अर्जुन को वरमाला पहना देती हैं, जिसके उपरांत पांडव द्रौपदी को विदा करा कर अपने साथ ले जाते हैं।
उधर श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा भी अर्जुन से प्रेम करती हैं और उनसे विवाह भी करना चाहती हैं परंतु बलराम जी को यह रिश्ता मंजूर नहीं था । श्रीकृष्ण भी जानते थे कि सुभद्रा अर्जुन से विवाह करना चाहती हैं, इसलिए उन्होंने अर्जुन को सुभद्रा का अपहरण करने की सलाह दी, जब सुभद्रा रेवतक पर्वत पर पूजा के लिए गई तभी अर्जुन श्रीकृष्ण की योजना के अनुसार सुभद्रा का हरण को अंजाम देते हैं उधर कृष्ण के समझाने पर नाराज बलराम भी मान जाते हैं और सुभद्रा व अर्जुन का विधिवत विवाह संपन्न हो जाता है ।
इसी के साथ सातवें दिन की लीला का विराम हो जाता है ।
ऐशबाग रामलीला कमेटी के अध्यक्ष हरिशचन्द्र अग्रवाल ने बताया कि शुक्रवार की लीला में श्रीकृष्ण का जामवंती एवं सत्यभामा से विवाह, नरकासुर वध, कृष्ण सुदामा मिलन व सत्यभामा का गुरूर मर्दन की लीलाओं के साथ ही रामनवमी उत्सव का भी आयोजन किया जाएगा ।





