जब योग अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तभी वह समाज को सच्चा लाभ पहुँचा सकता है: मनीष प्रताप सिंह
लखनऊ। कैसरबाग स्थित भातखंडे संस्कृत विश्वविद्यालय के राय उमानाथ बली आॅडिटोरियम में योगकुलम ह्यूमन वेलफेयर सोसाइटी का ‘योगशक्ति समारोह 2026’ का आयोजन शुक्रवार को किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संस्थापक डॉ. मनीष प्रताप सिंह, मुख्य अतिथि योग गुरु सुधीर शर्मा, योग शिक्षक हैं योगकुलम के विकास सिंह राजपूत और जल योग एक्सपर्ट रोमा जी द्वारा दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ। मुख्य अतिथि सुधीर शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा, “अब योग केवल ऋषियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोग को भगाने का सर्वोत्तम उपाय बन गया है।
लखनऊ में 2012 में स्थापित यह संस्था ‘भारतीय योग दर्शन’ को शिक्षा के केंद्र में रखती है। संस्था के पाठ्यक्रम में भगवद्गीता के जीवन सूत्र और सनातन संस्कृति के मूल्य समाहित हैं। डॉ. मनीष प्रताप सिंह का मानना है कि जब योग अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तभी वह समाज को सच्चा लाभ पहुँचा सकता है। इस सोच के कारण ही योगकुलम के हजारों स्नातक केवल योग नहीं, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों के वाहक बनकर निकलते हैं।
संस्थापक डॉ. मनीष प्रताप सिंह ने कहा, योग केवल आसन नहीं, बल्कि परिवार के साथ सामंजस्य बनाना है, आत्मनिर्भरता है और मिलकर अच्छे समाज का निर्माण करना है। यह समय आपसी प्रतिस्पर्धा का नहीं, बल्कि आपसी सहयोग का है। समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से आए डिप्लोमा पाठ्यक्रम पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्रमाणपत्र वितरित किए गए। प्रमाणपत्र प्राप्त करते समय छात्रों के चेहरे पर संतोष और आत्मविश्वास स्पष्ट झलक रहा था। कार्यक्रम में प्रदेश भर के विशिष्ट योग शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान से विभूषित किया गया। सम्मानित शिक्षकों में सत्यम सिंह, रोमा, डॉली, दीपक, ऋतिक, आरके मिश्रा, अमृता गुप्ता, ज्वाला सिंह, श्वेता सिंह, राहुल, दिशा, निधि, विकास सिंह और अर्चना प्रमुख रहे।
कार्यक्रम का संचालन सर्वेश मिश्रा ने किया। अंत में डॉ. सिंह ने भावी योग शिक्षकों को उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और जीवनपर्यंत सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम के समापन पर आयोजित होली मिलन समारोह ने पूरे आयोजन को उत्सवमय रंग दे दिया। कई विद्यार्थियों ने मंच से अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि योगकुलम ने उन्हें केवल योग नहीं, बल्कि अनुशासन, आत्मबल और करियर का मार्ग भी दिखाया।





