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अब अडानी समूह लेगा विकास, प्रबंधन और वित्तीय मामलों के फैसले
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नहीं बढ़ाया जायेगा कोई शुल्क, और सुविधायें देने की तैयारी
लखनऊ। राजधानी लखनऊ का देश के प्रतिष्ठित माने जाने वाले चौधरी चरण सिंह अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट का संचालन सोमवार से एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के हाथों से निकाल कर निजी हाथों में चला गया। एएआई के अफसरों ने 50 साल के लिए एयरपोर्ट की कमान अडानी समूह की एक और कंपनी अडानी लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को सौंपी दी है। इसके साथ ही अब एएआई की जगह अब अडानी समूह अमौसी एयरपोर्ट के विकास, प्रबंधन और वित्तीय मामलों के फैसले लेगा।
सीसीएस लखनऊ अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के निदेशक एके शर्मा ने लखनऊ में सीसीएस लखनऊ इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के सीईओ एससी होता और लखनऊ में अडाणी एयरपोर्ट्स के सीईओ बेहनाद जांदी को हवाई अड्डा सौंप दिया। लखनऊ एयरपोर्ट पहले साल एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के निदेशक साथ में डेढ़ सौ एएआई के सीनियर एग्जीक्यूटिव और अडानी समूह का प्रबंधन रहेगा।
इस प्रबंधन में प्रशासन से केंद्र सरकार के साथ हुए करार के मुताबिक अब अडानी ग्रुप तीन साल तक एयरपोर्ट प्रशासन के साथ काम करेंगे। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के जवान पहले की तरह सुरक्षा व्यवस्था की कमान सं•ाालते रहेंगे। फायर फाइटिंग सिस्टम और इंजीनियरिंग सेवाएं के अधिकारी काम करेंगे। पर अब सीआईएसएफ, फायर फाइटिंग के अधिकार अडानी ग्रुप के निर्देश पर काम करेगा।
शुरूआती दौर में अभी तक पर किसी भी सुविधा शुल्क को बढ़ाया नहीं गया है। कहा जा रहा है कि एयरपोर्ट को निजी हाथों में देने से यात्रियों की सुविधा में काफी इजाफा होगा। और अडानी ग्रुप की भी एयरपोर्ट पर सुविधाओं के विस्तार की योजना है। लखनऊ एयरपोर्ट पर दिल्ली की तर्ज पर मुफ्त पिक और ड्रॉप सेवा उपलब्ध कराई जायेगी।
करार के तहत एयरपोर्ट में पीपीई मॉडल लागू होने के बाद 1,400 करोड़ के नये टर्मिनल बनेंगे। इसमें टर्मिनल नंबर तीन का निर्माण होना है और आठ एप्रन बनेंगे। रनवे का विस्तार जो कि अभी 2700 मीटर है उसे 3500 मीटर किया जायेगा। सुविधाओं में समानांतर टैक्सी वे बनाने की योजना है। एयरपोर्ट की जो जमीन बाहर है वहां पर मॉल होटल खोले जायेंगे और यह सभी सुविधाएं टर्मिनल बिल्डिंग के भी यात्रियो के लिए मुहैया होगी।
गौरतलब है कि लखनऊ एयरपोर्ट 1986 में बनकर तैयार हुआ जो अमौसी एयरपोर्ट के नाम से बना। उस समय इसका इस्तेमाल कॉपोर्रेट व सरकारी अधिकारीयों के लिए किया जाता था। समय के साथ जैसे-जैसे यात्रियों की संख्या बढ़ने लगी तो 1996 में टर्मिनल-1 का निर्माण किया गया। 2005 में जब इंडियन एयरलाइन्स के अलावा कई अन्य प्राइवेट कंपनियों ने एविएशन के क्षेत्र में आयी तो एएआई ने इसका और विस्तार किया। 17 जुलाई 2008 को सरकार ने एयरपोर्ट का नाम अमौसी से बदल कर चौधरी चरण सिंह अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट कर दिया था। हालांकि, सीसीएस को अंतर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट का दर्जा मई 2012 में मिला।
सीसीएस एयरपोर्ट देश के चुनिंदा एयरपोर्ट्स में से एक है जहां खराब मौसम या कोहरे में भी हवाई जहाज को लैंड किया जा सकता है। यहां के अलावा यह सुविधा सिर्फ दिल्ली, जयपुर, अमृतसर और कोलकाता में ही उपलब्ध है। अपने 34 साल के इतिहास में सीसीएस एयरपोर्ट ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
जुलाई 2013 में सीसीएस एयरपोर्ट को जोधपुर के साथ संयुक्त रूप से बेहतरीन एयरपोर्ट से सम्मानित किया गया। लाभ न कमाने वाली वैश्विक संस्था एयरपोर्ट कौंसिल ने इसको लखनऊ एयरपोर्ट को छोटे एयरपोर्ट श्रेणी में दूसरा स्थान दिया था। अभी पिछले साल ही एशिया-प्रशांत रीजन में एयरपोर्ट सर्विस क्वालिटी में पहला इनाम मिला था।





