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सीबीआई कोर्ट के फैसले को हाई कोर्ट में देंगे चुनौती : ज़फ़रयाब जिलानी

  • हमे बताया जाये कि मस्जिद किसने गिरायी थी : मौलाना कल्बे जव्वाद

लखनऊ। रामजन्म भूमि विवाद में सुन्नी वक़्फ़ बोर्ड के वकील रहे और आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव ज़फ़रयाब जिलानी ने बुधवार को कहा कि सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में 32 आरोपियों को दोषमुक्त करार दिये जाने वाले आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी जायेगी।

जिलानी ने दावा किया कि इस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों, आईपीएस अधिकारियों और पत्रकारों ने सैकड़ों बयान दिये हैं कि मस्जिद गिराये जाने से पहले लगभग सभी आरोपी उस मंच पर मौजूद थे, जहां से भड़काऊ भाषण दिए जा रहे थे। उन्होंने कहा कि लाल कृष्ण अडवाणी व अन्य के खिलाफ आईपीएस की धारा 153ए (धर्म, मूलवंश, भाषा, जन्म-स्थान, निवास-स्थान, इत्यादि के आधारों पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता का संप्रवर्तन और सौहार्द्र बने रहने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले कार्य करना) और धारा 153बी (राष्ट्रीय अखंडता पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाले लांछन) के साफ़ सबूत थे।

पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव ने यह भी दावा किया कि पीड़ितों और प्रत्यक्षदर्शियों को अपील करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि मुसलमान इस केस के विक्टिम हैं। हमारे कई लोग इस मामले में प्रत्यक्षदर्शी हैं। हम भी उनमे से एक हैं। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष की तरफ से हम लोगों ने अदालत में अप्लीकेशन दी थी।

अयोध्या के कुछ गवाहों की तरफ से भी कोर्ट में अप्लीकेशन दी गई थी। ये ऐसे लोग थे जिनके घर जलाये गये थे। हालांकि, अप्लीकेशन खारिज कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि पर्सनल लॉ बोर्ड भी इस अपील में एक पार्टी हो सकती है। यह पूछने पर कि हाईकोर्ट में याचिका कौन दाखिल करेगा? जिलानी ने कहा कि इन सब पहलुओं पर बाद में चर्चा की जायेगी।

अयोध्या विध्वंस केस में सभी आरोपित को बरी करने के फैसले पर शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद नकवी ने कहा कि अगर गुंजाइश हो तो इस सिलसिले में कोर्ट के फैसले पर ओपन अपील करनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने बाबरी मस्जिद फैसले में ये माना था कि मस्जिद को गिराना बड़ा जुर्म और कानून के खिलाफ था, तो फिर आज हमें बताया जाए कि बाबरी मस्जिद को गिराने वाले मुजरिम कहां हैं? मस्जिद को गिराने का सारा खेल पुलिस के सामने हुआ था।

मौलाना ने कहा कि पुलिस ने उन मुजरिमों के खिलाफ अपनी रिपोर्ट सही तरह से पेश क्यों नहीं की? इसमें पुलिस के रोल की भी जांच हो। साथ ही उस वक्त की सरकार ने क्यों मस्जिद गिराने वालों की कोर्ट में पुख्ता और सही रिपोर्ट पेश नहीं की ये भी अहम सवाल है। अब जब कि बाबरी मस्जिद ढांचा विध्वंस केस में सारे आरोपी बरी हो गए हैं तो हमें बताया जाये कि मस्जिद किसने गिरायी थी। या मस्जिद को किसी ने गिराया ही नहीं था?

वहीं, ऐशबाग ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। आज हुए फैसले पर हमें कुछ नहीं कहना है। मगर सभी लोग जानते हैं कि 6 दिसंबर 1992 में बाबरी मस्जिद गिराई गई और कानून की धज्जियां उड़ाई गईं। अब मुस्लिम ऑर्गेनाइजेशन बैठ कर तय करेंगी कि आगे अपील करना है या नहीं करना है। मुख्यमंत्री ने इस मामले में दोषियों को कठोरतम दंड दिलवाने के लिए इसको फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाने की भी घोषणा की है।

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